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Jhansi News: किसान, नौकरीपेशा और व्यवसायी भी सीख रहे मशरूम की पैदावार के तरीके
Sun, 12 Jul 2026 02:51 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sun, 12 Jul 2026 02:51 AM IST
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में मशरूम सर्टिफिकेट कोर्स का पांचवां बैच शुरु हो गया है। 10 जुलाई से शुरू हुए बैच में 16 अभ्यर्थी प्रवेश ले चुके हैं। खास बात यह है कि इस बार केवल किसान और विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि व्यवसायी, निजी नौकरी करने वाले और स्वरोजगार की तलाश में जुटे युवा भी इस प्रशिक्षण से जुड़ रहे हैं।
तीन माह का यह प्रमाणपत्र कोर्स आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों पर आधारित है, इसकी फीस पांच हजार रुपये निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रतिभागी स्वयं की मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं, लैब विकसित कर सकते हैं, सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी का लाभ लेने के पात्र होंगे। मशरूम उत्पादन से जुड़ी कंपनियों और संस्थानों में रोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम के व्यावसायिक उत्पादन के साथ-साथ औषधीय महत्व वाले रीशी और शीताके मशरूम के उत्पादन, उपयोग और बाजार की वैज्ञानिक जानकारी भी दी जा रही है। विशेषज्ञ स्पॉन उत्पादन, सब्सट्रेट तैयार करने, बैग भरने, तापमान व आर्द्रता प्रबंधन, रोग नियंत्रण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन तक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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कोर्स में वैज्ञानिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में औषधीय मशरूम की बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मांग की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी जा रही है।
डॉ. शुभा त्रिवेदी, मशरूम वैज्ञानिक
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तीन माह का यह प्रमाणपत्र कोर्स आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों पर आधारित है, इसकी फीस पांच हजार रुपये निर्धारित की गई है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रतिभागी स्वयं की मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं, लैब विकसित कर सकते हैं, सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी का लाभ लेने के पात्र होंगे। मशरूम उत्पादन से जुड़ी कंपनियों और संस्थानों में रोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकते हैं।
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प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बटन मशरूम और ऑयस्टर मशरूम के व्यावसायिक उत्पादन के साथ-साथ औषधीय महत्व वाले रीशी और शीताके मशरूम के उत्पादन, उपयोग और बाजार की वैज्ञानिक जानकारी भी दी जा रही है। विशेषज्ञ स्पॉन उत्पादन, सब्सट्रेट तैयार करने, बैग भरने, तापमान व आर्द्रता प्रबंधन, रोग नियंत्रण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन तक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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कोर्स में वैज्ञानिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में औषधीय मशरूम की बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मांग की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी जा रही है।
डॉ. शुभा त्रिवेदी, मशरूम वैज्ञानिक