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किसानों की किस्मत खोलने को बनी मंड़ियां ताले में बंद
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किसानों की किस्मत खोलने को बनी मंड़ियां ही ताले में बंद की खबर में ..... गढमऊ मंडी में छाया सन्नाटा औ?
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झांसी। किसानों की किस्मत बदलने को बनाई गईं गल्ला मंड़ियां ही ताले में बंद हैं। जनपद में बुंदेलखंड पैकेज के करोड़ों रुपये से सात गल्ला मंड़ियां बनाई गईं लेकिन, किसानों के काम कोई भी मंडी नहीं आ रही। अधिकांश मंड़ियों करीब पांच साल बीत जाने के बावजूद कामकाज शुरू नहीं हो सका। मंडी के भीतर बने गोदाम कहीं भूसा, तो कहीं कूड़ाघर में तब्दील हो चुके।
किसानों को अच्छा कृषि बाजार मुहैया कराने को विशिष्ट मंडी स्थल के तौर पर भोजला जबकि अंबाबाय, पुनावली, दिगारा, गढ़मऊ, बछौनी, मानपुर में उपमंड़ियां बनवाई गईं। इन सभी पर बुंदेलखंड पैकेज से कुल करीब 65 करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन, भोजला मंडी को छोड़कर अधिकांश मंड़ियों में कोई खरीद-फरोख्त नहीं होती। गढ़मऊ उपमंडी करीब चार साल पहले आरंभ हुई लेकिन, आज तक वीरान ही पड़ी है। मंडी के भीतर बने गोदाम में जंग लगे ताले लटक रहे हैं। अनाज की जगह इनमें कूड़ा भरा है। पिछले कई वर्षों से कामकाज न होने से मंडी परिसर में जगह-जगह झाड़ियां उग आईं।
भीतर आवारा जानवरों का कब्जा हो चुका। चारों तरफ सिर्फ गोबर के ढेर एवं कंटीली झाड़ियां दिखाई पड़ती हैं। लाइट के लिए भीतर कीमती एलईडी लगी है जिसका कोई इस्तेमाल नहीं। उपज का वजन मापने को अत्याधुनिक कांटा मशीन लगाई गई। वह भी झाड़ियों से घिरी हुई है। बिजली की निर्बाध आपूर्ति के बड़ा जनरेटर लगा हुआ है लेकिन, खुले में पड़ा वह अब सड़ रहा है। यही हाल दूसरी मंडी स्थलों का भी है। मंड़ियों में खरीद-फारोख्त न होने से किसान परेशान हैं। गढ़मऊ निवासी ओमप्रकाश, राजवीर, सुखवीर अहिरवार समेत दूसरे किसानों का कहना है मंडी खुलने से उपज बेचने में आसानी की उम्मीद जगी थी लेकिन, यह अफसरों की बेपरवाही की भेंट चढ़ गईं। मंडी दूर होने की वजह से अभी भी ज्यादातर किसान प्राइवेट व्यापारियों को ही अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है मंडी चालू कराने को कई बार शिकायतें हुई लेकिन, अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।
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मंडियों को शुरू कराने की कवायद की जा रही है। मानपुर मंडी मार्च तक आरंभ हो जाएगी। अंबाबाय समेत अन्य मंडियों के गोदाम के लिए यूपी स्टेट एग्रो, एफसीआई, आरएफसी आदि एजेंसियों से बात चल रही है।
पंकज शर्मा, मंडी सचिव
बेहद जरूरी कार्यों की खातिर दिया गया था बुंदेलखंड पैकेज
सूखा ग्रस्त इलाका होने के नाते किसानों को दुर्दशा से उबारने के लिए नीति आयोग के निर्देश पर यूपीए सरकार ने वर्ष 2009 में बुंदेलखंड राहत पैकेज का एलान किया गया था। यूपी के सात जनपदों को कुल 3600 करोड़ रुपये दिए गए थे। इनके जरिए सिंचाई, पशुपालन, ग्रामीण विकास, कृषि विपणन जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराए जाने थे लेकिन, इस पैकेज से मिले पैसों से किसानों को कोई फायदा होता नहीं दिख्रता।
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किसानों को अच्छा कृषि बाजार मुहैया कराने को विशिष्ट मंडी स्थल के तौर पर भोजला जबकि अंबाबाय, पुनावली, दिगारा, गढ़मऊ, बछौनी, मानपुर में उपमंड़ियां बनवाई गईं। इन सभी पर बुंदेलखंड पैकेज से कुल करीब 65 करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन, भोजला मंडी को छोड़कर अधिकांश मंड़ियों में कोई खरीद-फरोख्त नहीं होती। गढ़मऊ उपमंडी करीब चार साल पहले आरंभ हुई लेकिन, आज तक वीरान ही पड़ी है। मंडी के भीतर बने गोदाम में जंग लगे ताले लटक रहे हैं। अनाज की जगह इनमें कूड़ा भरा है। पिछले कई वर्षों से कामकाज न होने से मंडी परिसर में जगह-जगह झाड़ियां उग आईं।
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भीतर आवारा जानवरों का कब्जा हो चुका। चारों तरफ सिर्फ गोबर के ढेर एवं कंटीली झाड़ियां दिखाई पड़ती हैं। लाइट के लिए भीतर कीमती एलईडी लगी है जिसका कोई इस्तेमाल नहीं। उपज का वजन मापने को अत्याधुनिक कांटा मशीन लगाई गई। वह भी झाड़ियों से घिरी हुई है। बिजली की निर्बाध आपूर्ति के बड़ा जनरेटर लगा हुआ है लेकिन, खुले में पड़ा वह अब सड़ रहा है। यही हाल दूसरी मंडी स्थलों का भी है। मंड़ियों में खरीद-फारोख्त न होने से किसान परेशान हैं। गढ़मऊ निवासी ओमप्रकाश, राजवीर, सुखवीर अहिरवार समेत दूसरे किसानों का कहना है मंडी खुलने से उपज बेचने में आसानी की उम्मीद जगी थी लेकिन, यह अफसरों की बेपरवाही की भेंट चढ़ गईं। मंडी दूर होने की वजह से अभी भी ज्यादातर किसान प्राइवेट व्यापारियों को ही अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है मंडी चालू कराने को कई बार शिकायतें हुई लेकिन, अफसर चुप्पी साधे हुए हैं।
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मंडियों को शुरू कराने की कवायद की जा रही है। मानपुर मंडी मार्च तक आरंभ हो जाएगी। अंबाबाय समेत अन्य मंडियों के गोदाम के लिए यूपी स्टेट एग्रो, एफसीआई, आरएफसी आदि एजेंसियों से बात चल रही है।
पंकज शर्मा, मंडी सचिव
बेहद जरूरी कार्यों की खातिर दिया गया था बुंदेलखंड पैकेज
सूखा ग्रस्त इलाका होने के नाते किसानों को दुर्दशा से उबारने के लिए नीति आयोग के निर्देश पर यूपीए सरकार ने वर्ष 2009 में बुंदेलखंड राहत पैकेज का एलान किया गया था। यूपी के सात जनपदों को कुल 3600 करोड़ रुपये दिए गए थे। इनके जरिए सिंचाई, पशुपालन, ग्रामीण विकास, कृषि विपणन जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराए जाने थे लेकिन, इस पैकेज से मिले पैसों से किसानों को कोई फायदा होता नहीं दिख्रता।