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बिना योजना तोड़ दिया स्कूल, खुले में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल

Thu, 20 Oct 2022 12:26 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Oct 2022 12:26 AM IST
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damage sachool
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई झांसी का गौरव हैं। अब से 50-60 साल पहले इन्हीं के नाम से कोतवाली क्षेत्र में बच्चों को शिक्षा देने के लिए लक्ष्मीबाई पाठशाला संचालित की गई थी। लेकिन अब इस स्कूल की हालत बदतर हो चुकी है। जर्जर हो चुके स्कूल के कमरे 10 महीने पहले ध्वस्त कर दिए गए थे...और बच्चे खुले मैदान में पढ़ने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि परिसर में चल रहे दोनों स्कूलों में मात्र एक-एक कमरा ही बचा है, इसमें भी स्कूल का सामान रखा है। स्थिति अब यह है कि सर्दियां शुरू होने वाली हैं। लेकिन इन नौनिहालों की फिक्र किसी को नहीं है। शिक्षिकों की तमाम कोशिशों के बाद भी स्कूल के कमरे नहीं बन पा रहे हैं।
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बिना योजना के कार्य शुरू करने का खामियाजा कोतवाली स्थित लक्ष्मीबाई पाठशाला में पढ़ रहे 133 बच्चे को भुगतना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग द्वारा जर्जर स्कूल को ध्वस्त तो करवा दिया गया, लेकिन स्कूल के निर्माण के लिए विभाग के पास न तो कोई योजना है, न ही पैसा। ऐसे में देर रात यहां शराबी डेरा डाले रहते हैं। सुबह स्कूल में शराब की बोलते, सिगरेट आदि की डिब्बियां मिलती हैं। दिन में यह बाजार आ रहे लोगों के लिए पार्किंग स्थल बन जाता है।
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बच्चों के पढ़ने के लिए एक ही कमरा शेष बचा है। इसमें भी स्कूल का फर्नीचर, खेल किट, पुस्तकालय के लिए आईं पुस्तकें, स्टूडेंट लर्निंग मटीरियल आदि सामान भी रखा हुआ है। बताते हैं कि शिक्षा विभाग द्वारा इस स्कूल को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो पाया।
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शौचालय भी जर्जर पड़ा है... मैदान में भी गंदगी बिखरी
झांसी। कंपोजिट लक्ष्मीबाई जूनियर हाईस्कूल में 110 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए शिक्षिकाओं के पास फिलहाल सिर्फ एक ही कमरा है। स्कूल में एक प्रधानाध्यापिका और दो सहायक शिक्षिकाएं हैं। वहीं बेसिक प्राथमिक पाठशाला गणेश बाजार भी इसी परिसर में संचालित हो रहा है, जिसमें 23 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापिका नीतू गुप्ता ने बताया कि एक ही कमरे बचा है। इसमें बच्चे पढ़ते भी हैं, और मध्याह्न भोजन भी इसी कमरे में बनाया जाता है। जिससे सभी बच्चों को पढ़ाना भी मुश्किल होता है। ऐसे में अधिकांश बच्चे बाहर मैदान में जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं। उधर, शौचालय भी जर्जर पड़ा है। मैदान में भी गंदगी बिखरी है।
स्कूल में निर्माण कार्य कराने के लिए बजट की डिमांड परिषद को भेज दी है, जैसे ही बजट आवंटित होता है, निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। - नीलम यादव, बीएसए
वर्तमान में जितने प्राथमिक विद्यालय स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किए गए थे, उनमें कार्य कराए जा रहे हैं। भविष्य में अगर कोई नई योजना बनेगी, तो इसे भी शामिल करने पर विचार किया जाएगा हालांकि प्राथमिक विद्यालयों के निर्माण संबंधी दायित्व बेसिक शिक्षा विभाग का है। - पुलकित गर्ग, नगर आयुक्त।
विद्यालय के निर्माण को लेकर कई बार बीएसए को ज्ञापन दिया गया लेकिन, अभी तक कोई प्रस्ताव तैयार नहीं कराया गया। विद्यालय ध्वस्त हो जाने से विद्यालय के छात्राें एवं अध्यापकों को काफी परेशानी होती है।
- मुकेश सोनी (बंटी), पार्षद
स्कूल में सुबह कई बार शराब की बोतलें तक पड़ी मिलती हैं, इसके अलावा खुला पड़ा स्कूल जानवरों का अड्डा बन जाता है। - शुभ्रा करौलिया, सहायक अध्यापिका
बीईओ ने लिखित रूप से आदेश दिया है कि स्कूल को दो पाली में संचालित किया जाए, क्योंकि इतने बच्चों को एक साथ एक कमरे में नहीं पढ़ाया जा सकता। - रचना मिश्रा, सहायक अध्यापिका

बरसात के दिनों में तो बहुत ही ज्यादा परेशानी बच्चों और हम लोगों को उठानी पड़ी। छत से लगातार पानी ही टपकता रहता था, अभी भी दीवारों पर सीलन है। - साधना शुक्ला शिक्षा मित्र
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