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जालसाज ने बैंक अकाउंट हैक कर निकाले 6.57 लाख
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2016 12:43 AM IST
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thiefing, case, jhansi news
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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झांसी। चंद्र विहार कॉलोनी सिविल लाइन निवासी उमेश अग्रवाल के बैंक अकाउंट को हैक कर इंटरनेट बैंकिंग के जरिये उनके खाते से 6.57 लाख रुपये निकाल लिए गए। यह राशि पश्चिम बंगाल के तीन अलग- अलग बैंकों से निकाली गई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सदर बाजार थाने में दी तहरीर में चंद्र विहार कॉलोनी बीकेडी सिविल लाइन निवासी उमेश अग्रवाल ने बताया कि उनका बैंक अकाउंट यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सदर बाजार शाखा में खुला हुआ है। विगत 17 सितंबर की शाम उनके मोबाइल में सिगनल नहीं आ रहे थे। 19 सितंबर को अचानक उन्होंने इंटरनेट पर अपने अकाउंट की जांच की तो उसमें जमा 6.57 लाख राशि की निकासी पाकर हतप्रभ रह गए।
उन्होंने सदर बाजार जाकर यूनियन बैंक के अधिकारियों से संपर्क किया तो पता चला कि उसी दिन उनके खाते से इंटरनेट बैंकिंग के जरिये पश्चिम बंगाल में स्थित स्टेट बैंक हैदराबाद काली कृष्णा टैगोर स्ट्रीट शाखा में रतनदास के खाते से 2.50 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया अंबतिपुर नील गंज रोड कालोनी बाजार डी पी नगर, तरुण पल्ली बेलघरिया में प्रीती घोष के खाते में 2.10 लाख रुपये व यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में अरिदम साहा के खाते में 1.97 लाख रुपये ट्रांसफर हुए जिनकी निकासी कर ली गई हैं।
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इसके बाद वह ललितपुर रोड स्थित बीएसएनएल कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि वहां शनिवार को पुरानी सिम खराब होना बताकर उनके नाम व मोबाइल नंबर से दूसरी सिम निकाली गई है। संबंधित व्यक्ति द्वारा जमा किए गए फार्म पर नाम व पता उनका ही था। मगर, कर्मचारी ने बिना आईडी प्रूफ के ही सिम जारी कर दिया गया था। कर्मचारी की इस गलती का खामियाजा उनको भुगतना पड़ा। इंटरनेट बैंकिंग के शातिरों ने उनकी सिम की मदद से खाते को हैक कर उक्त निकासी कर ली थी। इधर, पुलिस की जांच से बचने के लिए बीएसएनएल कर्मचारियों ने 2005 में सिम प्राप्त करते समय लिए गए ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो कॉपी शनिवार को जमा किए गए फार्म में लगा दी।
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सदर बाजार थाने में दी तहरीर में चंद्र विहार कॉलोनी बीकेडी सिविल लाइन निवासी उमेश अग्रवाल ने बताया कि उनका बैंक अकाउंट यूनियन बैंक ऑफ इंडिया सदर बाजार शाखा में खुला हुआ है। विगत 17 सितंबर की शाम उनके मोबाइल में सिगनल नहीं आ रहे थे। 19 सितंबर को अचानक उन्होंने इंटरनेट पर अपने अकाउंट की जांच की तो उसमें जमा 6.57 लाख राशि की निकासी पाकर हतप्रभ रह गए।
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उन्होंने सदर बाजार जाकर यूनियन बैंक के अधिकारियों से संपर्क किया तो पता चला कि उसी दिन उनके खाते से इंटरनेट बैंकिंग के जरिये पश्चिम बंगाल में स्थित स्टेट बैंक हैदराबाद काली कृष्णा टैगोर स्ट्रीट शाखा में रतनदास के खाते से 2.50 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया अंबतिपुर नील गंज रोड कालोनी बाजार डी पी नगर, तरुण पल्ली बेलघरिया में प्रीती घोष के खाते में 2.10 लाख रुपये व यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में अरिदम साहा के खाते में 1.97 लाख रुपये ट्रांसफर हुए जिनकी निकासी कर ली गई हैं।
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इसके बाद वह ललितपुर रोड स्थित बीएसएनएल कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि वहां शनिवार को पुरानी सिम खराब होना बताकर उनके नाम व मोबाइल नंबर से दूसरी सिम निकाली गई है। संबंधित व्यक्ति द्वारा जमा किए गए फार्म पर नाम व पता उनका ही था। मगर, कर्मचारी ने बिना आईडी प्रूफ के ही सिम जारी कर दिया गया था। कर्मचारी की इस गलती का खामियाजा उनको भुगतना पड़ा। इंटरनेट बैंकिंग के शातिरों ने उनकी सिम की मदद से खाते को हैक कर उक्त निकासी कर ली थी। इधर, पुलिस की जांच से बचने के लिए बीएसएनएल कर्मचारियों ने 2005 में सिम प्राप्त करते समय लिए गए ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो कॉपी शनिवार को जमा किए गए फार्म में लगा दी।