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यहां इलाज कम, रेफर ज्यादा
ब्यूरो
Updated Mon, 21 Dec 2015 12:07 AM IST
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झांसी। जिला, रेलवे अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफरल यूनिट बन गए हैं। छोटे से छोटे केसों को वह मेडिकल कॉलेज ट्रांसफर कर दे रहे हैं। इसकी शिकायत मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा से कर दी है।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में पहले से ही दवाओं और संसाधनों का टोटा है। दूसरी तरफ अन्य सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों से सहयोग न मिल पाने से समस्या को और बढ़ावा मिल गया है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक साधारण मरीजों को स्वयं सेवी संस्थाएं अस्पताल छोड़ जाती हैं और फिर उनका इलाज नहीं करने का आरोप लगाती हैं। यहीं नहीं, कई बार स्वयं सेवी संस्थाओं के लोग स्वस्थ मरीजों को भी अस्पताल परिसर में छोड़ देते हैं।
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इसके साथ-साथ रेलवे अस्पताल, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदि सीधे मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दे रहे हैं। मामूली सी चोट तक का मेडिकोलीगल नहीं किया जा रहा है। ‘एमएलसी नॉट डन’ करके रेफर पर्चा बना दिया जाता है। चिकित्सकों द्वारा कोर्ट में पेश होने से बचने के लिए ऐसा किया जाता है।
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गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में पहले से ही दवाओं और संसाधनों का टोटा है। दूसरी तरफ अन्य सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों से सहयोग न मिल पाने से समस्या को और बढ़ावा मिल गया है।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक साधारण मरीजों को स्वयं सेवी संस्थाएं अस्पताल छोड़ जाती हैं और फिर उनका इलाज नहीं करने का आरोप लगाती हैं। यहीं नहीं, कई बार स्वयं सेवी संस्थाओं के लोग स्वस्थ मरीजों को भी अस्पताल परिसर में छोड़ देते हैं।
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इसके साथ-साथ रेलवे अस्पताल, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदि सीधे मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दे रहे हैं। मामूली सी चोट तक का मेडिकोलीगल नहीं किया जा रहा है। ‘एमएलसी नॉट डन’ करके रेफर पर्चा बना दिया जाता है। चिकित्सकों द्वारा कोर्ट में पेश होने से बचने के लिए ऐसा किया जाता है।