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यूपी की 15 फसलों की एमएसपी तय करने का ‘कॉरिडोर’ बनेगा कृषि विवि
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झांसी। उत्तर प्रदेश की 15 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के लिए रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय जल्द अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजेगा। कृषि लागत योजना का नोडल केंद्र बनने के बाद विश्वविद्यालय ने फसलों का सर्वे कराना शुरू कर दिया है। किसानों की लागत से लेकर आय तक का ब्योरा एकत्र करके केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
फसलों की एमएसपी तय करने के लिए करीब पांच दशक पहले योजना शुरू की गई थी। मौजूदा समय में देश के 19 प्रांत में इसके नोडल संस्थान बनाए गए हैं, जो कि देश की प्रमुख 25 फसलों की एमएसपी तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले 49 सालों से आगरा के राजा बलवंत कॉलेज के पास ये जिम्मेदारी थी। एक माह पहले ही झांसी के रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को यूपी का नोडल बना दिया गया है। योजना के नोडल अधिकारी डॉ. एआर शर्मा और क्षेत्राधिकारी डॉ. डीवी सिंह है। डॉ. सिंह ने बताया कि सर्वे के दौरान हर तीन साल के लिए किसानों का चयन होता है। उनकी बोई गई फसलों की लागत और आय का अध्ययन करके रिपोर्ट भारत सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय को भेजी जाती है। कृषि मूल्य आयोग के समन्वय के साथ केंद्र सरकार के समक्ष आंकड़े रखे जाते हैं। फिर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में फसलों की एमएसपी तय होती है। उन्होंने बताया कि फसलों की एमएसपी तय करने में कृषि विश्वविद्यालय की ओर से जारी की जाने वाली सिफारिश का बहुत अधिक महत्व होगा। क्योंकि, यूपी में ही सबसे अधिक किसानों पर अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की जाती है। सर्वे के लिए सभी 75 जिलों में कार्मिक अधिकारी की तैनाती कर दी गई है।
बुंदेलखंड को होगा फायदा
बुंदेलखंड में वर्षा आधारित खेती होती है। यहीं पर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के कृषि लागत योजना का नोडल बनने के बाद विशेषज्ञ बुंदेलखंड की फसलों का बारीकी से अध्ययन कर सकेंगे। संभावना जताई जा रही है कि बुंदेलखंड में बोई जाने वाली फसलों की एमएसपी में पिछले सालों की तुलना में ज्यादा इजाफा हो सकता है।
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ये हैं प्रदेश की 15 फसलें
उत्तर प्रदेश में 15 फसलों पर एमएसपी लागू है। इन फसलों में गेहूं, धान, बाजरा, मक्का, गन्ना, आलू, चना, उर्द, सरसों, जौ, अरहर, तिल, मसूर, मूंगफली, मूंग शामिल है।
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फसलों की एमएसपी तय करने के लिए करीब पांच दशक पहले योजना शुरू की गई थी। मौजूदा समय में देश के 19 प्रांत में इसके नोडल संस्थान बनाए गए हैं, जो कि देश की प्रमुख 25 फसलों की एमएसपी तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पिछले 49 सालों से आगरा के राजा बलवंत कॉलेज के पास ये जिम्मेदारी थी। एक माह पहले ही झांसी के रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को यूपी का नोडल बना दिया गया है। योजना के नोडल अधिकारी डॉ. एआर शर्मा और क्षेत्राधिकारी डॉ. डीवी सिंह है। डॉ. सिंह ने बताया कि सर्वे के दौरान हर तीन साल के लिए किसानों का चयन होता है। उनकी बोई गई फसलों की लागत और आय का अध्ययन करके रिपोर्ट भारत सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय को भेजी जाती है। कृषि मूल्य आयोग के समन्वय के साथ केंद्र सरकार के समक्ष आंकड़े रखे जाते हैं। फिर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में फसलों की एमएसपी तय होती है। उन्होंने बताया कि फसलों की एमएसपी तय करने में कृषि विश्वविद्यालय की ओर से जारी की जाने वाली सिफारिश का बहुत अधिक महत्व होगा। क्योंकि, यूपी में ही सबसे अधिक किसानों पर अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की जाती है। सर्वे के लिए सभी 75 जिलों में कार्मिक अधिकारी की तैनाती कर दी गई है।
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बुंदेलखंड को होगा फायदा
बुंदेलखंड में वर्षा आधारित खेती होती है। यहीं पर स्थित कृषि विश्वविद्यालय के कृषि लागत योजना का नोडल बनने के बाद विशेषज्ञ बुंदेलखंड की फसलों का बारीकी से अध्ययन कर सकेंगे। संभावना जताई जा रही है कि बुंदेलखंड में बोई जाने वाली फसलों की एमएसपी में पिछले सालों की तुलना में ज्यादा इजाफा हो सकता है।
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ये हैं प्रदेश की 15 फसलें
उत्तर प्रदेश में 15 फसलों पर एमएसपी लागू है। इन फसलों में गेहूं, धान, बाजरा, मक्का, गन्ना, आलू, चना, उर्द, सरसों, जौ, अरहर, तिल, मसूर, मूंगफली, मूंग शामिल है।