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कृषि विश्वविद्यालय में 488 पदों का अनुमोदन
ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2016 12:37 AM IST
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षण एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने विश्वविद्यालय में नवसृजित 488 पदों का अनुमोदन कर दिया है, अब मंजूरी के लिए फाइल वित्त मंत्रालय भेजी गई है।
महारानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना को दो वर्ष हो चुके हैं। वर्तमान में यहां बीएससी (कृषि) प्रथम व द्वितीय वर्ष की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। कृषि विश्वविद्यालय के पास स्वयं का स्टाफ न होने से उक्त कक्षाओं में अध्यापन कार्य भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई) के स्टाफ द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा स्टाफ न होने की वजह से अन्य कोर्स भी प्रारंभ नहीं हो पा रहे हैं।
विश्वविद्यालयीय गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए 488 पद सृजित किए गए हैं, इनमें 254 अध्यापन व 234 गैर शैक्षणिक पद हैं। दस फरवरी को हुई विश्वविद्यालय की बोर्ड बैठक में इन पदों को मंजूरी दे दी गई थी। इसके बाद अनुमोदन के लिए फाइल केंद्रीय कृषि मंत्रालय भेजी गई थी।
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कृषि मंत्रालय द्वारा उक्त पदों को अनुमोदित कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय से फाइल केंद्रीय वित्त मंत्रालय भेज दी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त मंत्रालय द्वारा जल्द ही स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी।
‘केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने नवसृजित पदों को अनुमोदित कर दिया है। मंजूरी के लिए फाइल केंद्रीय वित्त मंत्रालय भेजी गई है। वित्त मंत्रालय की स्वीकृति मिलते ही नियुक्ति की कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाएगी।’
-डॉ. अरविंद कुमार, कुलपति
भवन निर्माण को एनबीसीसी ने डाला डेरा
झांसी। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण की तैयारियां जारी हैं, इसकी जिम्मेदारी नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन (एनबीसीसी) को सौंपी गई है। एनबीसीसी की टीम चिह्नित भूमि पर डेरा डाले हुए है। वर्तमान में मिट्टी की जांच का काम किया जा रहा है।
मालूम हो कि विश्वविद्यालय के पास आईजीएफआरआई परिसर में तीन सौ एकड़ भूमि है। यहां प्रशासनिक भवन, पुस्तकालय भवन, महाविद्यालयों के शैक्षिक भवन, अतिथि गृह, छात्रावास, सभागार व कर्मचारी आवास का निर्माण किया जाना है।
शिलान्यास को प्रधानमंत्री का इंतजार
झांसी। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के भवन के शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया है। यह पत्र केंद्रीय कृषि मंत्री के माध्यम से पीएम के पास भेजा गया है। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय से अब तक इसके लिए समय नहीं दिया गया है। पीएम का समय न मिलने की स्थिति में मार्च से काम प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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महारानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना को दो वर्ष हो चुके हैं। वर्तमान में यहां बीएससी (कृषि) प्रथम व द्वितीय वर्ष की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। कृषि विश्वविद्यालय के पास स्वयं का स्टाफ न होने से उक्त कक्षाओं में अध्यापन कार्य भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (आईजीएफआरआई) के स्टाफ द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा स्टाफ न होने की वजह से अन्य कोर्स भी प्रारंभ नहीं हो पा रहे हैं।
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विश्वविद्यालयीय गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए 488 पद सृजित किए गए हैं, इनमें 254 अध्यापन व 234 गैर शैक्षणिक पद हैं। दस फरवरी को हुई विश्वविद्यालय की बोर्ड बैठक में इन पदों को मंजूरी दे दी गई थी। इसके बाद अनुमोदन के लिए फाइल केंद्रीय कृषि मंत्रालय भेजी गई थी।
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कृषि मंत्रालय द्वारा उक्त पदों को अनुमोदित कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय से फाइल केंद्रीय वित्त मंत्रालय भेज दी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त मंत्रालय द्वारा जल्द ही स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी।
‘केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने नवसृजित पदों को अनुमोदित कर दिया है। मंजूरी के लिए फाइल केंद्रीय वित्त मंत्रालय भेजी गई है। वित्त मंत्रालय की स्वीकृति मिलते ही नियुक्ति की कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाएगी।’
-डॉ. अरविंद कुमार, कुलपति
भवन निर्माण को एनबीसीसी ने डाला डेरा
झांसी। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण की तैयारियां जारी हैं, इसकी जिम्मेदारी नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन (एनबीसीसी) को सौंपी गई है। एनबीसीसी की टीम चिह्नित भूमि पर डेरा डाले हुए है। वर्तमान में मिट्टी की जांच का काम किया जा रहा है।
मालूम हो कि विश्वविद्यालय के पास आईजीएफआरआई परिसर में तीन सौ एकड़ भूमि है। यहां प्रशासनिक भवन, पुस्तकालय भवन, महाविद्यालयों के शैक्षिक भवन, अतिथि गृह, छात्रावास, सभागार व कर्मचारी आवास का निर्माण किया जाना है।
शिलान्यास को प्रधानमंत्री का इंतजार
झांसी। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के भवन के शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा गया है। यह पत्र केंद्रीय कृषि मंत्री के माध्यम से पीएम के पास भेजा गया है। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय से अब तक इसके लिए समय नहीं दिया गया है। पीएम का समय न मिलने की स्थिति में मार्च से काम प्रारंभ कर दिया जाएगा।