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Jhansi News: बेतवा नदी उफनाने से टापू बने खेत पर फंसा चरवाहा
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- राजघाट बांध के गेट खुलने पर उफनाई नदी, चरवाहा सौंडे क्षेत्र में मवेशियों को चराने गया था, तभी बेतवा का बढ़ गया था जलस्तर
- पुलिस और फायर ब्रिगेड टीम पहुंची मौके पर, रेसक्यू के लिए एसडीआरएफ टीम को दी सूचना
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर/जखौरा। मंगलवार को राजघाट बांध से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया था, इससे बेतवा नदी उफान पर आ गई थी। बेतवा का जलस्तर बढ़ने से थाना जखौरा के ग्राम बसवां में टापू बन गए खेत पर नारायन सिंह फंस गया। वह मंगलवार रातभर यहां पर फंसा रहा। बुधवार को पुलिस को जानकारी हुई तो पुलिस व फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन पानी का बहाव अधिक होने से रेस्क्यू नहीं चल पाया। इस कारण से एसडीआरएफ की टीम को सूचित किया गया है। वहीं, परिजन व गांव के लोग नदी तट के पास डेरा जमाए हुए हैं।
ग्राम बसवां से निकली राजघाट बेतवा नदी के बीच में करीब 50 एकड़ सौंड़े नाम से एक जगह है। यहां गांव के लोग अपने मवेशियों को चराने के लिए ले जाते हैं। मंगलवार की दोपहर को नारायण सिंह अपनी भैंसों को चराने के लिए यहां पर ले गया था। लगातार हो रही बारिश के चलते मंगलवार की शाम को राजघाट बांध के गेट खोले गए। जिससे निचले इलाके में बह रही बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ गया और वह उफान मारकर बहने लगी। बेतवा के उफनाने पर सौंडे की उक्त जमीन के चारों ओर पानी ही पानी हो गया और सौंडे की इस जमीन का टुकड़ा एक टापू बन गया। इस कारण से यहां मौजूद नारायन सिंह वहां पर फंस गया और रात भर यहीं पर मौजूद रहकर नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करने लगा। लेकिन रातभर पानी कम नहीं हुआ। वहीं, बुधवार की सुबह राजघाट बांध से और अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाने लगा। सुबह तक जब नारायण सिंह घर लौटकर नहीं आया तो परिजनों व गांव के लोगों ने इसकी सूचना थाना पुलिस को दी। सूचना पर थाना जखौरा पुलिस मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड टीम को बुलाया। लेकिन पानी का बहाव अधिक होने से फायर ब्रिगेड टीम भी रेस्क्यू नहीं चला पाई। जिसके बाद एसडीआरएफ की टीम को सूचित करके बुलाया गया है। वहीं, परिजन व गांव के लोग नदी तट के पास डेरा जमाए हुए हैं। थाना जखौरा प्रभारी निरीक्षक हरीशंकर चंद के मुताबिक एसडीआरएफ टीम के रात तक मौके पर पहुंचने की संभावना है। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा। एसडीएम तालबेहट, लेखपाल व थाना जखौरा पुलिस की टीम नदी किनारे बनी हुई है। ग्रामीण को सकुशल निकाल लिया जाएगा।
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राजघाट बांध के गेट नहीं हो सके बंद
नारायण सिंह के टापू पर फंसने की जानकारी होने के बाद थाना जखौरा पुलिस ने सिंचाई विभाग से संपर्क कर बांध के गेट बंद करने की बात कही। जिस पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पुलिस को बताया कि ऊपरी क्षेत्र से बेतवा नदी के जरिए बांध में पानी की आवक बहुत ज्यादा हो रही है। बांध के गेट बंद करने पर राजघाट बांध के भराव क्षेत्र के गांवों में पानी भर जाएगा और बाढ़ जैसे हालात बन जाएंगे। इस कारण से बांध के गेट बंद नहीं किए जा सके।
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ड्रोन के जरिए पहुंचाया गया खाना
बेतवा नदी के बीच टापू पर 24 घंटे से फंसे नारायण सिंह को भूख और प्यास से बचाने के लिए जिला प्रशासन की टीम ने ड्रोन के जरिए खाना व पानी पहुंचाया। जिला प्रशासन व पुुलिस की टीमें बेतवा नदी किनारे मौजूद हैं।
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टापू पर फंसे ग्रामीण को ड्रोन के जरिए खाना पहुंचाया जा रहा है। एसडीएम सहित जिला प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है।
अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी
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भराव क्षेत्र से बांध में पानी की आवक काफी ज्यादा हो रही है। बांध की सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। बेतवा नदी के बीच खेतनुमा टापू पर फंसे ग्रामीण की मदद के लिए जो भी संभव होगा, मदद की जाएगी।
अजय कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड प्रथम
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- पुलिस और फायर ब्रिगेड टीम पहुंची मौके पर, रेसक्यू के लिए एसडीआरएफ टीम को दी सूचना
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर/जखौरा। मंगलवार को राजघाट बांध से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया था, इससे बेतवा नदी उफान पर आ गई थी। बेतवा का जलस्तर बढ़ने से थाना जखौरा के ग्राम बसवां में टापू बन गए खेत पर नारायन सिंह फंस गया। वह मंगलवार रातभर यहां पर फंसा रहा। बुधवार को पुलिस को जानकारी हुई तो पुलिस व फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन पानी का बहाव अधिक होने से रेस्क्यू नहीं चल पाया। इस कारण से एसडीआरएफ की टीम को सूचित किया गया है। वहीं, परिजन व गांव के लोग नदी तट के पास डेरा जमाए हुए हैं।
ग्राम बसवां से निकली राजघाट बेतवा नदी के बीच में करीब 50 एकड़ सौंड़े नाम से एक जगह है। यहां गांव के लोग अपने मवेशियों को चराने के लिए ले जाते हैं। मंगलवार की दोपहर को नारायण सिंह अपनी भैंसों को चराने के लिए यहां पर ले गया था। लगातार हो रही बारिश के चलते मंगलवार की शाम को राजघाट बांध के गेट खोले गए। जिससे निचले इलाके में बह रही बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ गया और वह उफान मारकर बहने लगी। बेतवा के उफनाने पर सौंडे की उक्त जमीन के चारों ओर पानी ही पानी हो गया और सौंडे की इस जमीन का टुकड़ा एक टापू बन गया। इस कारण से यहां मौजूद नारायन सिंह वहां पर फंस गया और रात भर यहीं पर मौजूद रहकर नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करने लगा। लेकिन रातभर पानी कम नहीं हुआ। वहीं, बुधवार की सुबह राजघाट बांध से और अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जाने लगा। सुबह तक जब नारायण सिंह घर लौटकर नहीं आया तो परिजनों व गांव के लोगों ने इसकी सूचना थाना पुलिस को दी। सूचना पर थाना जखौरा पुलिस मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड टीम को बुलाया। लेकिन पानी का बहाव अधिक होने से फायर ब्रिगेड टीम भी रेस्क्यू नहीं चला पाई। जिसके बाद एसडीआरएफ की टीम को सूचित करके बुलाया गया है। वहीं, परिजन व गांव के लोग नदी तट के पास डेरा जमाए हुए हैं। थाना जखौरा प्रभारी निरीक्षक हरीशंकर चंद के मुताबिक एसडीआरएफ टीम के रात तक मौके पर पहुंचने की संभावना है। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा। एसडीएम तालबेहट, लेखपाल व थाना जखौरा पुलिस की टीम नदी किनारे बनी हुई है। ग्रामीण को सकुशल निकाल लिया जाएगा।
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राजघाट बांध के गेट नहीं हो सके बंद
नारायण सिंह के टापू पर फंसने की जानकारी होने के बाद थाना जखौरा पुलिस ने सिंचाई विभाग से संपर्क कर बांध के गेट बंद करने की बात कही। जिस पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पुलिस को बताया कि ऊपरी क्षेत्र से बेतवा नदी के जरिए बांध में पानी की आवक बहुत ज्यादा हो रही है। बांध के गेट बंद करने पर राजघाट बांध के भराव क्षेत्र के गांवों में पानी भर जाएगा और बाढ़ जैसे हालात बन जाएंगे। इस कारण से बांध के गेट बंद नहीं किए जा सके।
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ड्रोन के जरिए पहुंचाया गया खाना
बेतवा नदी के बीच टापू पर 24 घंटे से फंसे नारायण सिंह को भूख और प्यास से बचाने के लिए जिला प्रशासन की टीम ने ड्रोन के जरिए खाना व पानी पहुंचाया। जिला प्रशासन व पुुलिस की टीमें बेतवा नदी किनारे मौजूद हैं।
टापू पर फंसे ग्रामीण को ड्रोन के जरिए खाना पहुंचाया जा रहा है। एसडीएम सहित जिला प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है।
अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी
भराव क्षेत्र से बांध में पानी की आवक काफी ज्यादा हो रही है। बांध की सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। बेतवा नदी के बीच खेतनुमा टापू पर फंसे ग्रामीण की मदद के लिए जो भी संभव होगा, मदद की जाएगी।
अजय कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड प्रथम