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न रानी का राजदंड आ सका और न तलवार
Jhansi
Updated Sun, 17 Nov 2013 05:44 AM IST
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झांसी। एक बार फिर 19 नवंबर को महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती मनाई जाएगी। इस दौरान विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, रानी के शौर्य और बलिदान पर प्रकाश डाला जाएगा, पर जनभावनाओं से जुड़ी रानी की जिन वस्तुओं को नगरवासी अपने शहर में देखना चाहते हैं, वह नहीं आ सकी हैं। फिर चाहे कुमाऊं रेजीमेंट में रखा राजदंड हो अथवा मप्र में रखी रानी की तलवार।
रानी का राजदंड रानीखेत स्थित कुमाऊं रेजीमेंट में रखा है। इसे झांसी लाने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं। प्रशासनिक से लेकर राजनैतिक स्तर तक इसको लेकर लिखा पढ़ी की गई। तत्कालीन मंडलायुक्त सत्यजीत ठाकुर ने भी पत्राचार किया, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। कमोबेश यही स्थिति रानी की तलवार को लेकर है। ग्वालियर में वीरगति प्राप्त होने के बाद रानी की तलवार वहीं रह गई थी। वह तलवार अब भी मध्य प्रदेश सरकार की देखरेख में है। झांसीवासी चाहते हैं कि राजदंड और तलवार स्थानीय संग्रहालय की शोभा बनें, ताकि स्थानीय लोगों के साथ- साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी ऐतिहासिक वस्तुओें का अवलोकन कर सकें।
उधर, दिल्ली स्थित संसद भवन में महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा नहीं लग सकी है। हालांकि, रानी का चित्र वहां जरूर लग गया है। लेकिन, झांसीवासी चाहते हैं कि वर्ष 1996 में संसद की संयुक्त समिति द्वारा पारित प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव का पालन होना चाहिए।
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‘कुमाऊं रेजीमेंट से राजदंड लाने के लिए रक्षा मंत्री के माध्यम से प्रयास चल रहा है। उम्मीद है कि प्रयास सफल होंगे। मध्य प्रदेश सरकार से तलवार को लेकर वार्ता हुई है। संसद भवन में रानी की प्रतिमा लगाने के लिए समिति गठित कर दी गई है। झलकारी बाई का चित्र भी संसद में लगवाने का प्रयास चल रहा है।’
- प्रदीप जैन आदित्य, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री
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रानी का राजदंड रानीखेत स्थित कुमाऊं रेजीमेंट में रखा है। इसे झांसी लाने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं। प्रशासनिक से लेकर राजनैतिक स्तर तक इसको लेकर लिखा पढ़ी की गई। तत्कालीन मंडलायुक्त सत्यजीत ठाकुर ने भी पत्राचार किया, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। कमोबेश यही स्थिति रानी की तलवार को लेकर है। ग्वालियर में वीरगति प्राप्त होने के बाद रानी की तलवार वहीं रह गई थी। वह तलवार अब भी मध्य प्रदेश सरकार की देखरेख में है। झांसीवासी चाहते हैं कि राजदंड और तलवार स्थानीय संग्रहालय की शोभा बनें, ताकि स्थानीय लोगों के साथ- साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी ऐतिहासिक वस्तुओें का अवलोकन कर सकें।
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उधर, दिल्ली स्थित संसद भवन में महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा नहीं लग सकी है। हालांकि, रानी का चित्र वहां जरूर लग गया है। लेकिन, झांसीवासी चाहते हैं कि वर्ष 1996 में संसद की संयुक्त समिति द्वारा पारित प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव का पालन होना चाहिए।
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‘कुमाऊं रेजीमेंट से राजदंड लाने के लिए रक्षा मंत्री के माध्यम से प्रयास चल रहा है। उम्मीद है कि प्रयास सफल होंगे। मध्य प्रदेश सरकार से तलवार को लेकर वार्ता हुई है। संसद भवन में रानी की प्रतिमा लगाने के लिए समिति गठित कर दी गई है। झलकारी बाई का चित्र भी संसद में लगवाने का प्रयास चल रहा है।’
- प्रदीप जैन आदित्य, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री