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अदर्स- मनरेगा में काम तेज-City
Updated Sat, 05 Aug 2017 08:28 PM IST
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अदर्स
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मनरेगा के काम का हुआ इंतजाम
427 गांवों में 13,622 मजदूरों को मिल रहा रोजगार
जिले में हैं 495 ग्राम पंचायतें, 1,62,000 जॉबकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के कामों ने रफ्तार पकड़ ली है। बहुत दिनों के बाद ऐसा मौका आया है, जब 495 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 427 पंचायतों में मनरेगा के काम चल रहे हैं। इन कामों में 13,622 मजदूर काम कर रहे हैं।
फरवरी-मार्च में मनरेगा की चाल बिगड़ गई थी, क्योंकि शासन से बजट नहीं आ रहा था। इस कारण मजदूरों ने काम बंद कर दिया था, लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। मनरेगा के अंतर्गत ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने के लिए शासन के निर्देश मिलने के बाद जिले में कामों ने अचानक रफ्तार पकड़ ली है। स्थिति यह है कि 427 ग्राम पंचायतों में मनरेगा मजदूर काम कर रहे हैं। अन्य गांवों में भी काम या तो हो चुके हैं या फिर शुरू होने वाले हैं, एक गांव ऐसा भी है, जहां मनरेगा में कोई काम शुरू नहीं हुआ और न ही वहां काम के लिए कोई दिलचस्पी ली जा रही है।
गरौठा तहसील का बरारू गांव एकमात्र ऐसा गांव है, जहां मनरेगा का कोई काम शुरू नहीं हुआ और न ही यहां पर एक भी पैसा मनरेगा पर खर्च हो सका है। बाकी गांवों में 1,62,000 मनरेगा मजदूरों में से 13,622 मजदूर काम कर रहे हैं। इन गांवों में 694 काम चल रहे हैं। इन कामों में तालाब खुदाई, चेकडैम और बंधी खुदाई के काम शामिल हैं। मनरेगा उपायुक्त आरके लोधी ने बताया कि मनरेगा मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार दिया जा रहा है।
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मनरेगा के काम का हुआ इंतजाम
427 गांवों में 13,622 मजदूरों को मिल रहा रोजगार
जिले में हैं 495 ग्राम पंचायतें, 1,62,000 जॉबकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के कामों ने रफ्तार पकड़ ली है। बहुत दिनों के बाद ऐसा मौका आया है, जब 495 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 427 पंचायतों में मनरेगा के काम चल रहे हैं। इन कामों में 13,622 मजदूर काम कर रहे हैं।
फरवरी-मार्च में मनरेगा की चाल बिगड़ गई थी, क्योंकि शासन से बजट नहीं आ रहा था। इस कारण मजदूरों ने काम बंद कर दिया था, लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। मनरेगा के अंतर्गत ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने के लिए शासन के निर्देश मिलने के बाद जिले में कामों ने अचानक रफ्तार पकड़ ली है। स्थिति यह है कि 427 ग्राम पंचायतों में मनरेगा मजदूर काम कर रहे हैं। अन्य गांवों में भी काम या तो हो चुके हैं या फिर शुरू होने वाले हैं, एक गांव ऐसा भी है, जहां मनरेगा में कोई काम शुरू नहीं हुआ और न ही वहां काम के लिए कोई दिलचस्पी ली जा रही है।
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गरौठा तहसील का बरारू गांव एकमात्र ऐसा गांव है, जहां मनरेगा का कोई काम शुरू नहीं हुआ और न ही यहां पर एक भी पैसा मनरेगा पर खर्च हो सका है। बाकी गांवों में 1,62,000 मनरेगा मजदूरों में से 13,622 मजदूर काम कर रहे हैं। इन गांवों में 694 काम चल रहे हैं। इन कामों में तालाब खुदाई, चेकडैम और बंधी खुदाई के काम शामिल हैं। मनरेगा उपायुक्त आरके लोधी ने बताया कि मनरेगा मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार दिया जा रहा है।
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