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ओमिक्रॉन का पता लगाने के लिए भेजे 45 सैंपल, एक की भी नहीं आई रिपोर्ट
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झांसी। जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए झांसी से भेजे गए ओमिक्रॉन के 45 सैंपलों में से एक की भी रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है। मेडिकल कॉलेज के प्रशासन का कहना है कि प्रदेश में 93 फीसदी मामले ओमिक्रॉन के हैं। ऐसे में तय है कि झांसी में भी इस स्ट्रेन से ही ज्यादातर मरीज संक्रमित हो रहे हैं।
झांसी में तीसरी लहर में कोरोना का पहला मामला 20 दिसंबर को सामने आया था। आरटीपीसीआर जांच के दौरान संक्रमित आने वाले मरीजों की जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजे गए। हर सोमवार को कुछ-कुछ नमूने लखनऊ केजीएमयू जांच के लिए भेजे जाते रहे। जबकि, कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ने लगे और ये स्पष्ट हो गया कि प्रदेश के ज्यादातर जिलों में ओमिक्रॉन के मामलों की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में फिर सैंपल भेजने से मना कर दिया गया। हालांकि, तब तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन 45 नमूने जांच के लिए लखनऊ भेज चुका था। मगर अब तक एक भी सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं आ पाई है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर का कहना है कि प्रदेश में अधिकतर मामले ओमिक्रॉन के ही हैं। भले ही जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है मगर यहां पर भी कोरोना के नए स्ट्रेन के मरीज जरूर मिल रहे हैं। चूंकि, कोरोना का इलाज समान ही है। इसका स्ट्रेन से कोई लेनादेना नहीं है। ऐसे में संक्रमित का हर संभव इलाज किया जा रहा है।
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झांसी में तीसरी लहर में कोरोना का पहला मामला 20 दिसंबर को सामने आया था। आरटीपीसीआर जांच के दौरान संक्रमित आने वाले मरीजों की जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजे गए। हर सोमवार को कुछ-कुछ नमूने लखनऊ केजीएमयू जांच के लिए भेजे जाते रहे। जबकि, कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़ने लगे और ये स्पष्ट हो गया कि प्रदेश के ज्यादातर जिलों में ओमिक्रॉन के मामलों की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में फिर सैंपल भेजने से मना कर दिया गया। हालांकि, तब तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन 45 नमूने जांच के लिए लखनऊ भेज चुका था। मगर अब तक एक भी सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं आ पाई है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर का कहना है कि प्रदेश में अधिकतर मामले ओमिक्रॉन के ही हैं। भले ही जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है मगर यहां पर भी कोरोना के नए स्ट्रेन के मरीज जरूर मिल रहे हैं। चूंकि, कोरोना का इलाज समान ही है। इसका स्ट्रेन से कोई लेनादेना नहीं है। ऐसे में संक्रमित का हर संभव इलाज किया जा रहा है।
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