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बेटी ने दी मुखाग्नि-City
Updated Sat, 30 Dec 2017 08:17 PM IST
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बेटी ने दी मां को दी मुखाग्नि
विधिविधान से किया अंतिम संस्कार
मां की देखरेख के लिए घर तक नहीं बसाया
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
रूढ़िवाद पर कुठाराघात करते हुए सीपरी बाजार के अत्रि गार्डन के सामने रहने वाली पामेला रॉय ने अपनी मां दीप्ती रॉय का नंदनपुरा मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार विधिविधान से किया। पामेला का कोई भाई नहीं है, उन्होंने अपनी मां की देखरेख के लिए शादी तक नहीं की।
नेशनल हाफिज सिद्दीकी में शिक्षिका पामेला रॉय के पिता का देहांत हो चुका है। छोटी बहन रोमिला रॉय का विवाह बंगाली परिवार में नवीन डे से करने के बाद मां की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर ले ली और कभी बेटे की कमी उन्हें महसूस नहीं होने दी। एकाएक मां की तबियत बिगड़ने के कारण उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। शुक्रवार की देर शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। मां के देहांत के बाद पामेला ने उनका अंतिम संस्कार खुद करने का निर्णय लिया।
घर से अर्थी को पॉमेला और रोमिला ने कंधा दिया। नंदनपुरा मुक्तिधाम पहुंच कर बेटी ने हर वो फर्ज निभाया जो बेटा निभाता है। पॉमेला रॉय ने बताया कि उन्होंने अपने पिता के देहांत पर विधि विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया था। मां-बाप को कभी बेटे का एहसास न हो इसलिए उन्होंने अपना घर नहीं बसाया।
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बेटी को भी है अधिकार
गरुण पुराण के अनुसार कुंवारी कन्या मां-बाप की मृत्यु होने पर उनको मुखाग्नि दे सकती है। दामाद को इसका अधिकार नहीं है। बड़ी बेटी विवाहित न होने के कारण अपनी मां को मुखाग्नि दी, उसमें कोई दोष नहीं है।
एस. कुमार, बंगाली पंडित
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बेटी ने दी मां को दी मुखाग्नि
विधिविधान से किया अंतिम संस्कार
मां की देखरेख के लिए घर तक नहीं बसाया
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
रूढ़िवाद पर कुठाराघात करते हुए सीपरी बाजार के अत्रि गार्डन के सामने रहने वाली पामेला रॉय ने अपनी मां दीप्ती रॉय का नंदनपुरा मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार विधिविधान से किया। पामेला का कोई भाई नहीं है, उन्होंने अपनी मां की देखरेख के लिए शादी तक नहीं की।
नेशनल हाफिज सिद्दीकी में शिक्षिका पामेला रॉय के पिता का देहांत हो चुका है। छोटी बहन रोमिला रॉय का विवाह बंगाली परिवार में नवीन डे से करने के बाद मां की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर ले ली और कभी बेटे की कमी उन्हें महसूस नहीं होने दी। एकाएक मां की तबियत बिगड़ने के कारण उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। शुक्रवार की देर शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। मां के देहांत के बाद पामेला ने उनका अंतिम संस्कार खुद करने का निर्णय लिया।
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घर से अर्थी को पॉमेला और रोमिला ने कंधा दिया। नंदनपुरा मुक्तिधाम पहुंच कर बेटी ने हर वो फर्ज निभाया जो बेटा निभाता है। पॉमेला रॉय ने बताया कि उन्होंने अपने पिता के देहांत पर विधि विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया था। मां-बाप को कभी बेटे का एहसास न हो इसलिए उन्होंने अपना घर नहीं बसाया।
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बेटी को भी है अधिकार
गरुण पुराण के अनुसार कुंवारी कन्या मां-बाप की मृत्यु होने पर उनको मुखाग्नि दे सकती है। दामाद को इसका अधिकार नहीं है। बड़ी बेटी विवाहित न होने के कारण अपनी मां को मुखाग्नि दी, उसमें कोई दोष नहीं है।
एस. कुमार, बंगाली पंडित