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बुंदेलखंड में हर ‘लहर’ ने नेताओं की लगाई नैया पार
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बुंदेलखंड में हर ‘लहर’ ने नेताओं की लगाई नैया पार
झांसी। राम मंदिर लहर हो, बंगलादेश निर्माण, आपातकाल हो या पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या, महंगाई अथवा मोदी लहर। हर बार बुंदेलखंड के मतदाताओं ने लहरों में बहकर नेताओं को दिल्ली तक पहुंचाया। वर्ष 1971 से 2014 तक 12 लोकसभा चुनाव हुए, जिनमें से नौ चुनावों में लहर के आधार पर पार्टी प्रत्याशी जीते।
आजादी के बाद यूं तो भारत ने पड़ोसी मुल्कों के साथ कई लड़ाइयां लड़ीं लेकिन 1971 का भारत-पाक युद्ध भारतीय सेना की वीरता की मिसाल बन गया। सेना और केंद्र सरकार की कूटनीतिक रणनीति की खूब जय-जय हुई। इसी का परिणाम था कि पूरे देश के साथ बुंदेलखंड वासियों ने भी कांग्रेस के प्रत्याशियों की झोली में जीत डाल दी। झांसी से डॉ. गोविंद दास रिछारिया, जालौन से चौधरी रामसेवक, हमीरपुर से स्वामी ब्रह्मानंद जीते। सिर्फ बांदा में जनसंघ के रामरतन शर्मा ने किला फतह किया। चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं लेकिन इंदिरा सरकार में तानाशाही के आरोप लगे। विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। देश पर आपातकाल थोप दिया गया।
इसके बाद हुए 1977 के चुनाव में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में देश में पहली बार सभी गैर कांग्रेेसी दल एक हुए। जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ केंद्रीय सत्ता पर काबिज हुई। इस लहर के साथ बुंदेलखंड भी बह गया। गैर कांग्रेसी झांसी में डॉ. सुशीला नैयर, हमीरपुर से तेज प्रताप सिंह, बांदा में अंबिका प्रसाद पांडे और जालौन में रामचरण ने जीत हासिल की। इस बदलाव को दूसरी आजादी की संज्ञा दी गई, लेकिन जनता की उम्मीदों पर पानी फिरा और सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच चली उठापटक के कारण देश को 1980 में मध्यावधि चुनाव झेलना पड़ा।
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एक बार फिर कांग्रेस की लहर चली और झांसी में पंडित विश्वनाथ शर्मा, हमीरपुर से डूंगर सिंह, बांदा में रामनाथ दुबे और जालौन में नाथूराम शाक्य चुनाव जीते। अक्तूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। इसके बाद हुए चुनाव में पूरे देश में सहानुभूति लहर चली। इस लहर में बहते हुए मतदाताओं ने झांसी से सुजान सिंह बुंदेला, बांदा में विष्णु देव दुबे, हमीरपुर से स्वामी प्रसाद सिंह, जालौन में चौधरी लच्छीराम को जीत की माला पहनाई।
1989 के आम चुनाव से ठीक पहले विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बोफोर्स तोप खरीद में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को कटघरे में कर दिया। इस लहर में भाजपा ने अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव में उतरकर कांग्रेस को धूल चटा दी। तब भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री झांसी से, जनता दल के गंगाचरण राजपूत हमीरपुर से, रामसेवक भाटिया जालौन से तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रामसजीवन सिंह बांदा से चुनाव जीते लेकिन सरकार नहीं चली और 1991 में मध्यावधि चुनाव हुए। उन दिनों अयोध्या में राममंदिर निर्माण का मुद्दा जोर पकड़े था। भाजपा को चुनाव में इसका फायदा मिला और झांसी से राजेंद्र अग्निहोत्री, हमीरपुर से पंडित विश्वनाथ शर्मा, जालौन से गया प्रसाद कोरी व बांदा से प्रकाश नारायण त्रिपाठी चुनाव जीते।
सांसदों की खरीद फरोख्त के चलते बदनामी झेलने वाली कांग्रेस की नरसिंह राव सरकार 1996 में मतदाताओं के निशाने पर रही। एक बार फिर भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री झांसी से, भानुप्रताप वर्मा जालौन से, गंगाचरण राजपूत हमीरपुर से जीते। बसपा ने पहली बार बांदा से खाता खोला और रामसजीवन सिंह चुनाव जीते।
देश को एक बार फिर मध्यावधि चुनाव झेलना पड़ा और 1998 में राम मंदिर की लहर में अटल बिहारी बाजपेयी को प्रधानमंत्री के रूप में जनादेश मिला। बुंदेलखंड में भी भाजपा की लहर चली और झांसी से राजेंद्र अग्निहोत्री, बांदा से रमेश चंद्र द्विवेदी, हमीरपुर से गंगाचरण राजपूत और जालौन से भानुप्रताप वर्मा चुनाव जीते। 2014 में मोदी लहर में बुंदेलखंड की चारों सीटें भाजपा के खाते में आ गईं। झांसी से उमा भारती, जालौन से भानु प्रताप वर्मा, बांदा से भैरों प्रसाद मिश्र और हमीरपुर से पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने परचम फहराया।
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झांसी। राम मंदिर लहर हो, बंगलादेश निर्माण, आपातकाल हो या पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या, महंगाई अथवा मोदी लहर। हर बार बुंदेलखंड के मतदाताओं ने लहरों में बहकर नेताओं को दिल्ली तक पहुंचाया। वर्ष 1971 से 2014 तक 12 लोकसभा चुनाव हुए, जिनमें से नौ चुनावों में लहर के आधार पर पार्टी प्रत्याशी जीते।
आजादी के बाद यूं तो भारत ने पड़ोसी मुल्कों के साथ कई लड़ाइयां लड़ीं लेकिन 1971 का भारत-पाक युद्ध भारतीय सेना की वीरता की मिसाल बन गया। सेना और केंद्र सरकार की कूटनीतिक रणनीति की खूब जय-जय हुई। इसी का परिणाम था कि पूरे देश के साथ बुंदेलखंड वासियों ने भी कांग्रेस के प्रत्याशियों की झोली में जीत डाल दी। झांसी से डॉ. गोविंद दास रिछारिया, जालौन से चौधरी रामसेवक, हमीरपुर से स्वामी ब्रह्मानंद जीते। सिर्फ बांदा में जनसंघ के रामरतन शर्मा ने किला फतह किया। चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं लेकिन इंदिरा सरकार में तानाशाही के आरोप लगे। विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। देश पर आपातकाल थोप दिया गया।
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इसके बाद हुए 1977 के चुनाव में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में देश में पहली बार सभी गैर कांग्रेेसी दल एक हुए। जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ केंद्रीय सत्ता पर काबिज हुई। इस लहर के साथ बुंदेलखंड भी बह गया। गैर कांग्रेसी झांसी में डॉ. सुशीला नैयर, हमीरपुर से तेज प्रताप सिंह, बांदा में अंबिका प्रसाद पांडे और जालौन में रामचरण ने जीत हासिल की। इस बदलाव को दूसरी आजादी की संज्ञा दी गई, लेकिन जनता की उम्मीदों पर पानी फिरा और सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच चली उठापटक के कारण देश को 1980 में मध्यावधि चुनाव झेलना पड़ा।
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एक बार फिर कांग्रेस की लहर चली और झांसी में पंडित विश्वनाथ शर्मा, हमीरपुर से डूंगर सिंह, बांदा में रामनाथ दुबे और जालौन में नाथूराम शाक्य चुनाव जीते। अक्तूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। इसके बाद हुए चुनाव में पूरे देश में सहानुभूति लहर चली। इस लहर में बहते हुए मतदाताओं ने झांसी से सुजान सिंह बुंदेला, बांदा में विष्णु देव दुबे, हमीरपुर से स्वामी प्रसाद सिंह, जालौन में चौधरी लच्छीराम को जीत की माला पहनाई।
1989 के आम चुनाव से ठीक पहले विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बोफोर्स तोप खरीद में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को कटघरे में कर दिया। इस लहर में भाजपा ने अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव में उतरकर कांग्रेस को धूल चटा दी। तब भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री झांसी से, जनता दल के गंगाचरण राजपूत हमीरपुर से, रामसेवक भाटिया जालौन से तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रामसजीवन सिंह बांदा से चुनाव जीते लेकिन सरकार नहीं चली और 1991 में मध्यावधि चुनाव हुए। उन दिनों अयोध्या में राममंदिर निर्माण का मुद्दा जोर पकड़े था। भाजपा को चुनाव में इसका फायदा मिला और झांसी से राजेंद्र अग्निहोत्री, हमीरपुर से पंडित विश्वनाथ शर्मा, जालौन से गया प्रसाद कोरी व बांदा से प्रकाश नारायण त्रिपाठी चुनाव जीते।
सांसदों की खरीद फरोख्त के चलते बदनामी झेलने वाली कांग्रेस की नरसिंह राव सरकार 1996 में मतदाताओं के निशाने पर रही। एक बार फिर भाजपा के राजेंद्र अग्निहोत्री झांसी से, भानुप्रताप वर्मा जालौन से, गंगाचरण राजपूत हमीरपुर से जीते। बसपा ने पहली बार बांदा से खाता खोला और रामसजीवन सिंह चुनाव जीते।
देश को एक बार फिर मध्यावधि चुनाव झेलना पड़ा और 1998 में राम मंदिर की लहर में अटल बिहारी बाजपेयी को प्रधानमंत्री के रूप में जनादेश मिला। बुंदेलखंड में भी भाजपा की लहर चली और झांसी से राजेंद्र अग्निहोत्री, बांदा से रमेश चंद्र द्विवेदी, हमीरपुर से गंगाचरण राजपूत और जालौन से भानुप्रताप वर्मा चुनाव जीते। 2014 में मोदी लहर में बुंदेलखंड की चारों सीटें भाजपा के खाते में आ गईं। झांसी से उमा भारती, जालौन से भानु प्रताप वर्मा, बांदा से भैरों प्रसाद मिश्र और हमीरपुर से पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने परचम फहराया।