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मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा, 20 दिन की ही बचीं

Wed, 19 Jul 2017 03:06 AM IST
Updated Wed, 19 Jul 2017 03:06 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा, 20 दिन की ही बचीं
मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा, 20 दिन की ही बचीं
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झांसी।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बस 20 की दवाएं बची हुई हैं। बजट के पूरे पैसे से दवाओं की खरीद की जा चुकी है। ऐसे में फिर से मरीजों के सामने दवाओं का गंभीर संकट दिख रहा है। कॉलेज प्रशासन ने शासन को पत्र लिखकर जल्द बजट देने की मांग की है।
मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर दवाओं का टोटा हो सकता है। शासन ने अप्रैल में कॉलेज प्रशासन को एक करोड़ 66 हजार रुपये का बजट दिया था। इसी से दवाओं के साथ ऑक्सीजन गैस की भी खरीद की गई। मौजूदा समय में बजट की पूरी राशि खत्म हो चुकी है। अब सिर्फ बीस दिन की दवाओं का कोटा बचा हुआ है। अभी ओपीडी में मरीजों को तीन दिन की दी दवाएं दी जा रही हैं। दवाएं खत्म होने के बाद ओपीडी तो दूर वार्ड और इमरजेंसी के मरीजों तक को दवा नहीं मिल पाएगी। हालांकि, अभी भी वार्ड, इमरजेंसी में एसिडिटी, दर्द, फ्लूड और घाव को सुखाने के लिए साधारण एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं। महंगी एंटीबायोटिक की खरीद कॉलेज प्रशासन नहीं कर पा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीस दिन बीतने के बाद तो मरीजों को दवाओं के लाले पड़ जाएंगे। सर्वाधिक समस्या तो आर्थिक रूप से कमजोर, लावारिस, दुर्घटना के बाद बेहोश हुए व्यक्ति के इलाज में आएगी।
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वर्जन..
शासन को बजट भेजने के संबंध में पत्र लिखा जा चुका है। दूसरी किश्त आने का समय आ गया है। जल्द ही बजट मिलने की संभावना है। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस।
जिला अस्पताल में फिजीशियन कम, मरीज ज्यादा
झांसी
जिला अस्पताल में लगभग एक साल से चल रही फिजीशियन की कमी अभी दूर नहीं हो सकी है। ऐसे में मरीजों को लंबी-लंबी लाइनों में लगकर इलाज कराना पड़ रहा है।
अस्पताल में फिजीशियन के तीन पद हैं। मौजूदा समय के मद्देनजर इन पदों की संख्या बढ़नी चाहिए थी लेकिन सृजित पोस्ट की तुलना में दो ही फिजीशियन तैनात हैं। हर मरीज के लिए 35 से 40 सेकेंड का समय होने के कारण डॉक्टर मरीजों को ठीक से समय नहीं दे पा रहे हैं और मरीजों का भी लंबे समय तक इंतजार करने के बाद नंबर आता है। मौजूदा समय में वायरल और पेट के मरीजों की संख्या में बीस फीसदी इजाफा हो गया है। इससे डॉक्टरों पर काफी लोड बढ़ गया है।
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