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शहर में सबसे ज्यादा बिजली चोरी
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Sat, 12 Dec 2015 11:09 PM IST
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दीया तले अंधेरा वाली कहावत इन दिनों बिजली विभाग के अधिकारियों पर
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चरितार्थ हो रही है। विभाग के सभी बड़े अधिकारियों के कार्यालय उरई में हैं
और जिले में सबसे ज्यादा बिजली चोरी भी उरई में ही हो रही है। यह स्थिति
तब है जब विभागीय अधिकारियों पर राजस्व वसूली बढ़ाने और बिजली चोरी रोकने
का भारी दबाव है।
बिजली चोरों के आगे विभाग के अधिकारी पस्त नजर आ रहे हैं। खास बात तो ये कि विभाग के सभी बड़े अधिकारियों के उरई में बैठने के बावजूद यहीं पर सबसे ज्यादा बिजली चोरी हो रही है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक उरई में हर महीने करीब 30 से 32 लाख यूनिट बिजली चोरी हो रही है। कोंच में हर महीने पांच से सात लाख यूनिट बिजली चोरी हो जाती
है। बिजली चोरी में तीसरा स्थान जालौन का है। यहां पर हर माह पांच लाख यूनिट बिजली चोरी दर्ज की जा रही है। सबसे कम बिजली चोरी कालपी नगर में हो रही है। यहां हर महीने सिर्फ तीन से चार लाख यूनिट बिजली चोरी होती है। इस तरह पूरे जिले में हर महीने क रीब 50 लाख यूनिट बिजली चोरी हो रही है। बिजली विभाग के जिले के सबसे बड़े अधिकारी
अधीक्षण अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता व अन्य अधिकारियों के कार्यालय उरई में हैं। यह अधिकारी दिन भर शहर में डेरा डाले रहते हैं। इसके बावजूद शहर में सबसे ज्यादा बिजली चोरी होना विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े
कर रहा है। इसका कारण यह है कि बिजली विभाग के अधिकारियों के पास बिजली चोरी रोकने की कोई ठोस योजना नहीं है। इसके चलते विभागीय अधिकारी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं और बिजली चोर मौज में हैं।
व्यापक अभियान की जरूरत
जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए विभाग को नई योजना तैयार करके व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है। जब तक शहर के कोने-कोने में चेकिंग अभियान नहीं चलेगा, तब तक बिजली चोरी रोक पाना नामुमकिन है। अभी विभाग से अभियान तो चलाया जाता है, पर यह कुछ दिनों में ही बंद हो जाता है। इससे बड़े पैमाने पर बिजली चोरी करने वाले कार्रवाई की जद में आने से बच जाते हैं।
विभागीय लोगों की मिलीभगत भी कारण
शहर में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी का एक कारण विभागीय लोगों की मिलीभगत भी है। सूत्रों के अनुसार विभाग के कुछ जेई, बाबू, कर्मचारी व दलाल निजी लाभ के लिए बिजली चोरों को संरक्षण दिए हैं। ये बड़े पैमाने पर बिजली चोरी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का अभियान कब और कहां चलेगा इसकी सूचना पहले से ही इनको मिल जाती है। इससे बिजली चोर विभागीय अधिकारियों को चकमा देने में सफल हो जाते हैं।
विभाग में सेटिंग का खेल
इन दिनों बिजली विभाग में सेटिंग का खेल चल रहा है। अभियान के दौरान बिजली चोरी करते हुए पाने जाने के बाद भी अधिकांश बिजली चोर सेटिंग-गेटिंग में सफल हो जाते हैं और इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। गौरतलब है कि बिजली चोरी करते हुए पाए जाने पर विभाग द्वारा संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान है। पर कुछ बिजली चोर रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद भी बच जाते हैं।
वर्जन
शहर में बिजली चोरी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जल्द ही फिर से व्यापक अभियान चलाया जाएगा। बिजली चोरों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। बिजली चोरों पर अंकुश लगाने के लिए विभाग योजना तैयार कर रहा है।
अजय कुमार, एसडीओ, उरई
बिजली चोरों के आगे विभाग के अधिकारी पस्त नजर आ रहे हैं। खास बात तो ये कि विभाग के सभी बड़े अधिकारियों के उरई में बैठने के बावजूद यहीं पर सबसे ज्यादा बिजली चोरी हो रही है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक उरई में हर महीने करीब 30 से 32 लाख यूनिट बिजली चोरी हो रही है। कोंच में हर महीने पांच से सात लाख यूनिट बिजली चोरी हो जाती
है। बिजली चोरी में तीसरा स्थान जालौन का है। यहां पर हर माह पांच लाख यूनिट बिजली चोरी दर्ज की जा रही है। सबसे कम बिजली चोरी कालपी नगर में हो रही है। यहां हर महीने सिर्फ तीन से चार लाख यूनिट बिजली चोरी होती है। इस तरह पूरे जिले में हर महीने क रीब 50 लाख यूनिट बिजली चोरी हो रही है। बिजली विभाग के जिले के सबसे बड़े अधिकारी
अधीक्षण अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता व अन्य अधिकारियों के कार्यालय उरई में हैं। यह अधिकारी दिन भर शहर में डेरा डाले रहते हैं। इसके बावजूद शहर में सबसे ज्यादा बिजली चोरी होना विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े
कर रहा है। इसका कारण यह है कि बिजली विभाग के अधिकारियों के पास बिजली चोरी रोकने की कोई ठोस योजना नहीं है। इसके चलते विभागीय अधिकारी पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं और बिजली चोर मौज में हैं।
व्यापक अभियान की जरूरत
जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए विभाग को नई योजना तैयार करके व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है। जब तक शहर के कोने-कोने में चेकिंग अभियान नहीं चलेगा, तब तक बिजली चोरी रोक पाना नामुमकिन है। अभी विभाग से अभियान तो चलाया जाता है, पर यह कुछ दिनों में ही बंद हो जाता है। इससे बड़े पैमाने पर बिजली चोरी करने वाले कार्रवाई की जद में आने से बच जाते हैं।
विभागीय लोगों की मिलीभगत भी कारण
शहर में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी का एक कारण विभागीय लोगों की मिलीभगत भी है। सूत्रों के अनुसार विभाग के कुछ जेई, बाबू, कर्मचारी व दलाल निजी लाभ के लिए बिजली चोरों को संरक्षण दिए हैं। ये बड़े पैमाने पर बिजली चोरी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का अभियान कब और कहां चलेगा इसकी सूचना पहले से ही इनको मिल जाती है। इससे बिजली चोर विभागीय अधिकारियों को चकमा देने में सफल हो जाते हैं।
विभाग में सेटिंग का खेल
इन दिनों बिजली विभाग में सेटिंग का खेल चल रहा है। अभियान के दौरान बिजली चोरी करते हुए पाने जाने के बाद भी अधिकांश बिजली चोर सेटिंग-गेटिंग में सफल हो जाते हैं और इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती है। गौरतलब है कि बिजली चोरी करते हुए पाए जाने पर विभाग द्वारा संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का प्रावधान है। पर कुछ बिजली चोर रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद भी बच जाते हैं।
वर्जन
शहर में बिजली चोरी रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जल्द ही फिर से व्यापक अभियान चलाया जाएगा। बिजली चोरों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। बिजली चोरों पर अंकुश लगाने के लिए विभाग योजना तैयार कर रहा है।
अजय कुमार, एसडीओ, उरई