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शराब के नशे में रस्सी से घोटा था बेटी का गला
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नीरज के रोते बिलखते परिजन।
- फोटो : ORAI
उरई/ कुठौंद(जालौन)। कुठौंद थाना क्षेत्र के मजरा डगरुपुरवा में सोमवार रात किशोरी की मौत के मामले में मां ने पति के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इंस्पेक्टर अरुण तिवारी ने बताया कि किशोरी के पिता ने शराब के नशे में धुत होकर खेत पर बेटी का रस्सी से गला घोट दिया था। आरोपी पिता की तलाश में दबिश दी जा रही है। वहीं देर शाम एएसपी डॉक्टर अवधेश सिंह मजरे में पहुंचे। उन्होंने परिजनों से पूछताछ की।
मजरा डगरुपुरवा निवासी मजदूर रामबाबू ने शराब के नशे में सोमवार रात पत्नी निर्मला से घर पर मारपीट कर दी। बेटी नीरज (17) और नीलम (15) ने मां को बचाने का प्रयास किया तो रामबाबू ने तीनों को मारपीट कर घर से निकाल दिया। इस पर मां और दोनों बेटियां पास ही स्थित एक खेत में छिप गईं। कुछ देर बाद शराब के नशे में गुस्साया रामबाबू खेत पर पहुंच गया। वह पत्नी निर्मला को पीटने लगा। यहां भी उसकी बेटियों के साथ धक्का मुक्की हुई। इसी दौरान रामबाबू ने तिली बांधने वाली रस्सी से बेटी नीरज का गला घोट दिया। उसकी मौत हो गई। यह देख निर्मला और नीलम चीख पड़ीं। रामबाबू यहां से फरार हो गया। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से शव को घर लाकर पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। इंस्पेक्टर ने बताया कि रामबाबू के खिलाफ हत्या और मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज कर तलाश की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने की पुष्टि हुई है।
एक बीघा जमीन बनी विवाद की वजह
हत्यारोपी रामबाबू के पिता लल्लूराम ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले अपनी एक बीघा जमीन दोनों पौत्रियों की शादी के लिए बेची थी। इसी का पैसा रामबाबू मांग रहा था। इसको लेकर उसका अपनी पत्नी निर्मला से आए दिन विवाद होता था। क्या पता था कि यही विवाद एक दिन उसकी लाड़ली पौत्री की जान ले लेगा।
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हाय, चुनरी डालनी थी, कफन क्यों डाल दिया
बेटी की मौत से मां निर्मला बदहवास हो गईं। शाम के वक्त पोस्टमार्टम से कफन में लिपटा नीरज का शव घर के दरवाजे पहुंचा तो निर्मला चीख पड़ीं, हाय, लाडो पर कफन क्यों डाल दिया। उसकी तो शादी होने वाली है, उस पर कोई लाल चुनरी डाल दे। निर्मला की चीख सुनकर ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।
मेधावी थी बीए प्रथम वर्ष की नीरज
नीरज बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी। कुठंौंद स्थित एक इंटर कालेज से उसने इसी साल इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की थी। कालेज के प्रबंधक अमर चंद्र ने बताया कि नीरज की कक्षा की मेधावियों में गिनती होती थी। वह पढ़ लिख कर जीवन में कुछ बनना चाहती थी।
भगवान किसी को न दे ऐसा पिता
बहन के शव पर नीलम और उसके भाई अमन और प्रिंस जितने आंसू बहा रहे थे, उससे भी ज्यादा वे अपने क्रूर पिता को कोस रहे थे। बच्चों का कहना था कि भगवान किसी को भी ऐसा निर्दयी पिता किसी को न दे, जो अपने हाथों से लालच में बच्चों की जान का दुश्मन बन जाए।
पहले हुई थी आत्महत्या की चर्चा
नीरज की मौत के बाद परिजन शव लेकर घर आ गए थे। तब परिवार के ही कुछ लोगों ने मामले को दबाने के लिए उसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया था। इस पर ग्रामीणों को शक होने लगा। तभी निर्मला और उसके ससुर ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया। इससे पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।
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मजरा डगरुपुरवा निवासी मजदूर रामबाबू ने शराब के नशे में सोमवार रात पत्नी निर्मला से घर पर मारपीट कर दी। बेटी नीरज (17) और नीलम (15) ने मां को बचाने का प्रयास किया तो रामबाबू ने तीनों को मारपीट कर घर से निकाल दिया। इस पर मां और दोनों बेटियां पास ही स्थित एक खेत में छिप गईं। कुछ देर बाद शराब के नशे में गुस्साया रामबाबू खेत पर पहुंच गया। वह पत्नी निर्मला को पीटने लगा। यहां भी उसकी बेटियों के साथ धक्का मुक्की हुई। इसी दौरान रामबाबू ने तिली बांधने वाली रस्सी से बेटी नीरज का गला घोट दिया। उसकी मौत हो गई। यह देख निर्मला और नीलम चीख पड़ीं। रामबाबू यहां से फरार हो गया। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से शव को घर लाकर पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। इंस्पेक्टर ने बताया कि रामबाबू के खिलाफ हत्या और मारपीट की धाराओं में मामला दर्ज कर तलाश की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने की पुष्टि हुई है।
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एक बीघा जमीन बनी विवाद की वजह
हत्यारोपी रामबाबू के पिता लल्लूराम ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले अपनी एक बीघा जमीन दोनों पौत्रियों की शादी के लिए बेची थी। इसी का पैसा रामबाबू मांग रहा था। इसको लेकर उसका अपनी पत्नी निर्मला से आए दिन विवाद होता था। क्या पता था कि यही विवाद एक दिन उसकी लाड़ली पौत्री की जान ले लेगा।
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हाय, चुनरी डालनी थी, कफन क्यों डाल दिया
बेटी की मौत से मां निर्मला बदहवास हो गईं। शाम के वक्त पोस्टमार्टम से कफन में लिपटा नीरज का शव घर के दरवाजे पहुंचा तो निर्मला चीख पड़ीं, हाय, लाडो पर कफन क्यों डाल दिया। उसकी तो शादी होने वाली है, उस पर कोई लाल चुनरी डाल दे। निर्मला की चीख सुनकर ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।
मेधावी थी बीए प्रथम वर्ष की नीरज
नीरज बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी। कुठंौंद स्थित एक इंटर कालेज से उसने इसी साल इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की थी। कालेज के प्रबंधक अमर चंद्र ने बताया कि नीरज की कक्षा की मेधावियों में गिनती होती थी। वह पढ़ लिख कर जीवन में कुछ बनना चाहती थी।
भगवान किसी को न दे ऐसा पिता
बहन के शव पर नीलम और उसके भाई अमन और प्रिंस जितने आंसू बहा रहे थे, उससे भी ज्यादा वे अपने क्रूर पिता को कोस रहे थे। बच्चों का कहना था कि भगवान किसी को भी ऐसा निर्दयी पिता किसी को न दे, जो अपने हाथों से लालच में बच्चों की जान का दुश्मन बन जाए।
पहले हुई थी आत्महत्या की चर्चा
नीरज की मौत के बाद परिजन शव लेकर घर आ गए थे। तब परिवार के ही कुछ लोगों ने मामले को दबाने के लिए उसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया था। इस पर ग्रामीणों को शक होने लगा। तभी निर्मला और उसके ससुर ने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया। इससे पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।