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Jalaun News: बिना सहमति के नाम भेजने पर बिफरे हड्डी रोग विशेषज्ञ
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उरई। लखनऊ हाईकोर्ट की एलोपैथिक डिस्पेंसरी में तैनाती के लिए बिना सहमति के नाम भेजने पर चारों आर्थो सर्जन जिला अस्पताल के सीएमएस पर बिफर गए। पहले तो चारों सीएमएस आफिस पहुंचे, वहां सीएमएस के न मिलने पर उनके आवास पर पहुंच गए जहां खूब हंगामा किया। चिकित्सकों के तेवर देखकर सीएमएस ने आश्वासन दिया कि वह पहले भेजे गए पत्र को निरस्त करने का दोबारा पत्र भेज रहे हैं तब चिकित्सक शांत हुए।
दरअसल, हाईकोर्ट लखनऊ की एलोपैथिक डिस्पेंसरी में आर्थो सर्जन व राजभवन स्थित चिकित्सालय में महिला चिकित्सकों की तैनाती की जा रही है। इसमें सभी अस्पतालों से इच्छुक चिकित्सकों की सूची मांगी गई है। इसमें कहा कि इच्छुक चिकित्सक आवेदन कर सकते हैं।
चिकित्सकों का आरोप है कि सीएमएस ने बिना उनकी इच्छा जाने चारों आर्थो सर्जन की सूची भेज दी। किसी तरह जब चिकित्सकों को सूची में नाम होने की जानकारी हुई तो वह आक्रोशित हो गए। आर्थो सर्जन डॉ. दीपक आर्या, डॉ. शक्ति मिश्रा, डॉ. राम द्विवेदी और डॉ.मधुसूदन पहले तो सीएमएस से मिलने उनके कार्यालय गए। वहां सीएमएस के न मिलने पर उनके आवास पर पहुंच गए। चिकित्सकों ने सीएमएस से पूछा कि बिना उनकी इच्छा जाने उनका नाम सूची में कैसे भेज दिया। इसे लेकर चिकित्सकों ने सीएमएस को खूूब खरी खोटी सुनाई।
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उन्होंने कहा कि उनका रवैया ठीक नहीं है। कई चिकित्सक बिना काम के वेतन पा रहे हैं और काम करने वालों को परेशान किया जा रहा है। इसी बीच एक नेत्र सर्जन भी आ गए। उन्होंने आक्रोशित चिकित्सकों को समझाने का प्रयास किया लेकिन नहीं माने। बाद में सीएमएस ने भेजे गए पत्र को वापस लेने का पत्र दोबारा भेजने की बात कही, तब चिकित्सक शांत हुए। इस बाबत सीएमएस डॉ. आनंद उपाध्याय का कहना है कि विभागीय मामला था, जो निपट गया।
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दरअसल, हाईकोर्ट लखनऊ की एलोपैथिक डिस्पेंसरी में आर्थो सर्जन व राजभवन स्थित चिकित्सालय में महिला चिकित्सकों की तैनाती की जा रही है। इसमें सभी अस्पतालों से इच्छुक चिकित्सकों की सूची मांगी गई है। इसमें कहा कि इच्छुक चिकित्सक आवेदन कर सकते हैं।
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चिकित्सकों का आरोप है कि सीएमएस ने बिना उनकी इच्छा जाने चारों आर्थो सर्जन की सूची भेज दी। किसी तरह जब चिकित्सकों को सूची में नाम होने की जानकारी हुई तो वह आक्रोशित हो गए। आर्थो सर्जन डॉ. दीपक आर्या, डॉ. शक्ति मिश्रा, डॉ. राम द्विवेदी और डॉ.मधुसूदन पहले तो सीएमएस से मिलने उनके कार्यालय गए। वहां सीएमएस के न मिलने पर उनके आवास पर पहुंच गए। चिकित्सकों ने सीएमएस से पूछा कि बिना उनकी इच्छा जाने उनका नाम सूची में कैसे भेज दिया। इसे लेकर चिकित्सकों ने सीएमएस को खूूब खरी खोटी सुनाई।
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उन्होंने कहा कि उनका रवैया ठीक नहीं है। कई चिकित्सक बिना काम के वेतन पा रहे हैं और काम करने वालों को परेशान किया जा रहा है। इसी बीच एक नेत्र सर्जन भी आ गए। उन्होंने आक्रोशित चिकित्सकों को समझाने का प्रयास किया लेकिन नहीं माने। बाद में सीएमएस ने भेजे गए पत्र को वापस लेने का पत्र दोबारा भेजने की बात कही, तब चिकित्सक शांत हुए। इस बाबत सीएमएस डॉ. आनंद उपाध्याय का कहना है कि विभागीय मामला था, जो निपट गया।