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गोशालाएं खाली, रातों को खेतों पर रखवाली
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एट। सरकारी मशीनरी के तमाम कवायद के बाद भी किसानों को अन्ना मवेशियों की धमाचौकड़ी से निजात नहीं मिल रहा है। हाल यह है कि कड़ाके की ठंड में फसलों को अन्ना मवेशियों से बचाने के लिए किसान रात-रात भर जागकर रखवाली कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अन्ना मवेशियों के खौफ ने दिन का चैन व रात की नींद उड़ा दी है। वहीं, यह आरोप भी लगा रहे हैं कि कई गोशालाएं अभी भी कागजों पर ही चल रही हैं, न तो वहां मवेशी ही दिखाई देते हैं और नहीं उनके लिए चारा-पानी की व्यवस्था है। अधिकांश गोशालाएं खाली पड़ी हुई हैं।
एट कस्बे में दो साल पहले लगभग 4.50 लाख रुपये की लागत से बनी गोशाला आधी अधूरी पड़ी है। ऐसे में गोशाला मैदान-सी बनी है। यहां पूरे दिन बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। जबकि अन्ना मवेशियों का झुंड कहीं खेतों पर तो कहीं हाईवे पर जमावड़ा लगाए रहते हैं।
मालूम हो कि हाल ही में एट को नगर पंचायत का दर्जा मिला तो किसानों को उम्मीद जागी थी कि अब अन्ना मवेशियों की समस्या से छुटकारा मिलेगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आधी अधूरी गोशाला में न तो मवेशियों के लिए पानी का कोई इंतजाम है और न ही कोई टीन शेड ही है। खानापूर्ति के नाम पर सिर्फ एट ग्राम पंचायत का बोर्ड जरूर लगा नजर आता है। उधर, इस बाबत एडीएम प्रमिल कुमार का कहना है कि वह इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे।
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एट कस्बे में दो साल पहले लगभग 4.50 लाख रुपये की लागत से बनी गोशाला आधी अधूरी पड़ी है। ऐसे में गोशाला मैदान-सी बनी है। यहां पूरे दिन बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। जबकि अन्ना मवेशियों का झुंड कहीं खेतों पर तो कहीं हाईवे पर जमावड़ा लगाए रहते हैं।
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मालूम हो कि हाल ही में एट को नगर पंचायत का दर्जा मिला तो किसानों को उम्मीद जागी थी कि अब अन्ना मवेशियों की समस्या से छुटकारा मिलेगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। आधी अधूरी गोशाला में न तो मवेशियों के लिए पानी का कोई इंतजाम है और न ही कोई टीन शेड ही है। खानापूर्ति के नाम पर सिर्फ एट ग्राम पंचायत का बोर्ड जरूर लगा नजर आता है। उधर, इस बाबत एडीएम प्रमिल कुमार का कहना है कि वह इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे।
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