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फैसले से पहले चाय के साथ बांटी पुरानी यादें

Sun, 10 Nov 2019 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2019 12:12 AM IST
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Old memories fresh with tea before decision
कदौरा में दोनों समुदाय के लोग बैठ कर बात करते - फोटो : ORAI
मुहम्मदाबाद/कदौरा। शहर की तरह गांव कस्बों में भी राम मंदिर के फैसले का इंतजार बेसब्री से था। यहां मंदिर मस्जिद की पूजा और नमाज से मतलब नहीं था, बल्कि यह जानने की ललक थी कि आखिरी तीस साल कोर्ट की कलम से फैसला कैसा निकलता है। शायद यही वजह थी कि किसी भी गांव कस्बे तक में तनाव सी कोई बात नहीं दिखाई दी।
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लोग रोज की तरह उठे, पास पड़ोस के हालचाल लिए और फिर दिनचर्या में शामिल कोई चबूतरा या फिर पेड़ की छांव में बैठकर चर्चाओं का दौर भी चला। डकोर ब्लाक के मुहम्मदाबाद गांव में चरनसिंह राजपूत के दरवाजे पड़े तख्त पर रोज की तरह गांव वाले आते रहे और मंदिर मसले पर बतियाते रहे। राजपूत के साथियों के साथ अशफाक और उनके साथियों ने चाय की चुस्कियां लीं
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और मंदिर मुद्दे से जुड़ी पुरानी यादों व उस वक्त के माहौल पर चर्चा करते नजर आए। इसी तरह कदौरा के चतेला तिराहे पर स्थित ढाबे पर भी रोज की तरह जिंदगी चलती नजर आई, बस शनिवार को वहां मौजूद न्यामत, अकील शाह, सोमनाथ व करन सिंह के बीच बातचीत का मुद्दा मंदिर मस्जिद जरूर थे लेकिन उनकी बातों में कहीं तकरार नहीं थी बल्कि पुरानी बातें ही याद कर खुशी व अफसोस जताया जा रहा था।
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