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Jalaun News: दिखावटी ढांचा बनकर रह गए एमआरएफ सेंटर
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उरई। स्वच्छता अभियान के मद्देनजर कूड़ा निस्तारण के लिए जिले में पांच जगहों पर एमआरएफ सेंटर बनवाए गए हैं। उरई, जालौन, कोंच, कालपी और कदौरा में बनवाए गए ये सेंटर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी उपयोग में नहीं आ रहे हैं। अधिकतर एमआरएफ सेंटरों में बिजली के कनेक्शन नहीं हो पाए हैं। नगर पालिका और नगर पंचायत प्रशासन के पास इन सेंटरों के शुरू न होने का कोई न कोई बहाना है। शहर में कूड़ों के ढेर लगे हैं और आबादी के बीच इनका निस्तारण किया जा रहा है।
जेल रोड स्थित रामकुंड पार्क के पीछे 32 लाख रुपये की लागत से एमआरएफ सेंटर का निर्माण कराया गया है। मोहल्लों से एकत्र करके लाए गए कूड़े को शहर के करमेर रोड, आंबेडकर चौराहा, झांसी रोड, बजरिया इलाके में सड़क किनारे डंप कर दिया जाता है। इसी कारण आवारा जानवर विचरण करते हैं और कूड़े को फैला देते हैं। कूड़े से उठने वाली दुर्गंध से लोगों को काफी मुश्किल होती है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि कई-कई दिन तक नगर पालिका की टीम कूड़ा उठाने नहीं पहुंचती है। सूखा कूड़ा निस्तारण केंद्र के निर्माण के बाद उम्मीद जागी थी कूड़े से निजात मिलेगी। शहर से हर रोज 50 से 60 टन कूड़ा निकलता है। लोगों ने कूड़ा निस्तारण के लिए शहर में एमआरएफ सेंटर बनाकर शुरु कराए जाने की मांग की है। सेंटर मे अभी वेट स्केलिंग मशीन, फ्लैट सेकेशन, हाइड्रोलिक प्लास्टिक बॉलिग मशीन, वेइंग मशीन अब तक नहीं आई है। नगर पालिका ईओ विमलापति का कहना है कि एक माह पहले ही एमआरएफ सेंटर की चाबी मिली है। मशीन न होने के कारण इसका संचालन नहीं हो पा रहा है।
जालौन। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत नगर पालिका क्षेत्र में उदोतपुरा के पास मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर का निर्माण किया गया है। एमआरएफ सेंटर बनकर तैयार है। सेंटर पर बिजली व्यवस्था और पेयजल की भी व्यवस्था है। कूड़ा छंटनी के लिए चार कर्मचारियों को लगाया गया है। नगर में लगभग 20 टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है। योजना थी कि कूड़े के साथ आने वाली प्लास्टिक, लोहे का सामान, प्लास्टिक की बोतलों आदि को अलग कर नीलामी कराई जाएगी। एमआरएफ सेंटर बनकर तैयार हो गया है। मशीन भी लगवा दी गई है लेकिन यह अभी शुरू नहीं हो पाया है। इस संदर्भ में नगर पालिका एसआई देवेंद्र कुमार ने बताया कि एमआरएफ सेंटर में मशीनें लग चुकी हैं, जल्द ही शुरू कराया जाएगा। कर्मचारियों ने बताया कि एमआरएफ सेंटर पर सबमर्सिबल पंप पिछले करीब 10 दिनों से खराब पड़ा है। जिससे पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है।
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कोंच। पिछले आठ महीने से निर्माणाधीन एमआरएफ सेंटर अब तक चालू नहीं हो सका है। मशीनें आ गई हैं, बिजली की लाइन भी खिंच गई और विभाग ने मीटर भी टांग दिया है लेकिन, लाइन में करंट प्रवाहित होना अभी बाकी है। एमआरएफ सेंटर तक सड़क भी बनकर तैयार नहीं हो पाई है। अभी इसका निर्माण कार्य चल रहा है। नगर से इकट्ठा किया जाने वाला कूड़ा सीधा डंपिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत पहले कूड़ा एमआरएफ सेंटर पहुंचाया जाएगा। यहां कूड़े की मशीनों से छंटनी होगी, इसके बाद कूड़े का निस्तारण होगा। केंद्र में कंपोस्ट खाद बनाने से लेकर अन्य उपयोगों में कूड़े के छांटे गए अवयवों को लाने की योजना है जिसके लिए एमआरएफ सेंटर में आठ टैंक भी बनाए गए हैं। कैलिया बाईपास इलाके में तहसील की सरकारी जमीन पर एमआरएफ बनाने में 33 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। मशीनों पर करीब 20 लाख के खर्च का अनुमान है। सेंटर तक पहुंचने के लिए डामरीकृत सड़क भी निर्माणाधीन है जिस पर करीब 80 लाख खर्च होना है। ईओ नगर पालिका पवन किशोर मौर्य ने बताया कि बिजली का कनेक्शन अभी नहीं हुआ है। 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि 15 दिन के अंदर सेंटर चालू हो जाएगा।
कदौरा। लाखों की लागत से बनाया गया एमआरएफ सेंटर चालू न होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। यह सेंटर महीनों पहले बनकर तैयार हो गया है लेकिन अभी तक बिजली का कनेक्शन नहीं हो पाया है। अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही से संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ा है। कूड़ा इधर-उधर जमा करने वाले सफाई कर्मियों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। नगर के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश मोहल्लों में कूड़े कचरे के ढेर सड़क किनारे जमा किया जा रहा है। नगरपालिका कर्मी इस कचरे को बाहर ले जाकर निस्तारित करने की बजाय जला देते हैं। नगर वासियों में रामकुमार, सुनील कुमार, हेमंत सिंह, संजय सिंह आदि ने बताया कि कूड़े को कर्मी यहां वहां फेंक देते है। और आग लगाकर कूड़ा जला देते हैं। इससे उठने वाला धुआं कस्बे के लोगों के लिए मुसीबत बनता है। लाखों की लागत से काशीराम कालोनी के नजदीक बना एमआरएफ सेंटर भी अभी तक चालू नहीं हुआ है। प्रभारी ईओ राधा बल्लभ चतुर्वेदी ने कहा कि बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था, अभी तक कनेक्शन न होने के कारण कूड़ा निस्तारण केंद्र चालू नहीं हो पाया है। एसडीओ राजेश पटेल ने कहा कि कनेक्शन की स्वीकृति दे दी गई है। अभी तक क्यों नही हुआ है इसकी जांच की जाएगी।
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जेल रोड स्थित रामकुंड पार्क के पीछे 32 लाख रुपये की लागत से एमआरएफ सेंटर का निर्माण कराया गया है। मोहल्लों से एकत्र करके लाए गए कूड़े को शहर के करमेर रोड, आंबेडकर चौराहा, झांसी रोड, बजरिया इलाके में सड़क किनारे डंप कर दिया जाता है। इसी कारण आवारा जानवर विचरण करते हैं और कूड़े को फैला देते हैं। कूड़े से उठने वाली दुर्गंध से लोगों को काफी मुश्किल होती है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि कई-कई दिन तक नगर पालिका की टीम कूड़ा उठाने नहीं पहुंचती है। सूखा कूड़ा निस्तारण केंद्र के निर्माण के बाद उम्मीद जागी थी कूड़े से निजात मिलेगी। शहर से हर रोज 50 से 60 टन कूड़ा निकलता है। लोगों ने कूड़ा निस्तारण के लिए शहर में एमआरएफ सेंटर बनाकर शुरु कराए जाने की मांग की है। सेंटर मे अभी वेट स्केलिंग मशीन, फ्लैट सेकेशन, हाइड्रोलिक प्लास्टिक बॉलिग मशीन, वेइंग मशीन अब तक नहीं आई है। नगर पालिका ईओ विमलापति का कहना है कि एक माह पहले ही एमआरएफ सेंटर की चाबी मिली है। मशीन न होने के कारण इसका संचालन नहीं हो पा रहा है।
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जालौन। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत नगर पालिका क्षेत्र में उदोतपुरा के पास मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर का निर्माण किया गया है। एमआरएफ सेंटर बनकर तैयार है। सेंटर पर बिजली व्यवस्था और पेयजल की भी व्यवस्था है। कूड़ा छंटनी के लिए चार कर्मचारियों को लगाया गया है। नगर में लगभग 20 टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है। योजना थी कि कूड़े के साथ आने वाली प्लास्टिक, लोहे का सामान, प्लास्टिक की बोतलों आदि को अलग कर नीलामी कराई जाएगी। एमआरएफ सेंटर बनकर तैयार हो गया है। मशीन भी लगवा दी गई है लेकिन यह अभी शुरू नहीं हो पाया है। इस संदर्भ में नगर पालिका एसआई देवेंद्र कुमार ने बताया कि एमआरएफ सेंटर में मशीनें लग चुकी हैं, जल्द ही शुरू कराया जाएगा। कर्मचारियों ने बताया कि एमआरएफ सेंटर पर सबमर्सिबल पंप पिछले करीब 10 दिनों से खराब पड़ा है। जिससे पेयजल की समस्या उत्पन्न हो रही है।
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कोंच। पिछले आठ महीने से निर्माणाधीन एमआरएफ सेंटर अब तक चालू नहीं हो सका है। मशीनें आ गई हैं, बिजली की लाइन भी खिंच गई और विभाग ने मीटर भी टांग दिया है लेकिन, लाइन में करंट प्रवाहित होना अभी बाकी है। एमआरएफ सेंटर तक सड़क भी बनकर तैयार नहीं हो पाई है। अभी इसका निर्माण कार्य चल रहा है। नगर से इकट्ठा किया जाने वाला कूड़ा सीधा डंपिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत पहले कूड़ा एमआरएफ सेंटर पहुंचाया जाएगा। यहां कूड़े की मशीनों से छंटनी होगी, इसके बाद कूड़े का निस्तारण होगा। केंद्र में कंपोस्ट खाद बनाने से लेकर अन्य उपयोगों में कूड़े के छांटे गए अवयवों को लाने की योजना है जिसके लिए एमआरएफ सेंटर में आठ टैंक भी बनाए गए हैं। कैलिया बाईपास इलाके में तहसील की सरकारी जमीन पर एमआरएफ बनाने में 33 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। मशीनों पर करीब 20 लाख के खर्च का अनुमान है। सेंटर तक पहुंचने के लिए डामरीकृत सड़क भी निर्माणाधीन है जिस पर करीब 80 लाख खर्च होना है। ईओ नगर पालिका पवन किशोर मौर्य ने बताया कि बिजली का कनेक्शन अभी नहीं हुआ है। 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि 15 दिन के अंदर सेंटर चालू हो जाएगा।
कदौरा। लाखों की लागत से बनाया गया एमआरएफ सेंटर चालू न होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। यह सेंटर महीनों पहले बनकर तैयार हो गया है लेकिन अभी तक बिजली का कनेक्शन नहीं हो पाया है। अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही से संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ा है। कूड़ा इधर-उधर जमा करने वाले सफाई कर्मियों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। नगर के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश मोहल्लों में कूड़े कचरे के ढेर सड़क किनारे जमा किया जा रहा है। नगरपालिका कर्मी इस कचरे को बाहर ले जाकर निस्तारित करने की बजाय जला देते हैं। नगर वासियों में रामकुमार, सुनील कुमार, हेमंत सिंह, संजय सिंह आदि ने बताया कि कूड़े को कर्मी यहां वहां फेंक देते है। और आग लगाकर कूड़ा जला देते हैं। इससे उठने वाला धुआं कस्बे के लोगों के लिए मुसीबत बनता है। लाखों की लागत से काशीराम कालोनी के नजदीक बना एमआरएफ सेंटर भी अभी तक चालू नहीं हुआ है। प्रभारी ईओ राधा बल्लभ चतुर्वेदी ने कहा कि बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था, अभी तक कनेक्शन न होने के कारण कूड़ा निस्तारण केंद्र चालू नहीं हो पाया है। एसडीओ राजेश पटेल ने कहा कि कनेक्शन की स्वीकृति दे दी गई है। अभी तक क्यों नही हुआ है इसकी जांच की जाएगी।