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रंगकर्मी उकेरते हैं आम आदमी की पीड़ा-प्रदीप जैन
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sun, 05 Jun 2016 11:08 PM IST
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नाटक का मंचन करते इप्टा रंगकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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पूर्व केंद्रीय ग्रामीण राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने रविवार को यहां कहा कि रंगकर्मी अपनी कला के माध्यम से सामाजिक विषमता व शोषण रूपी अंधेरे को चीरकर समाज में बदलाव की बयार ला सकते हैं। वे अपने गीतों व नाटकों से उस आम आदमी की पीड़ा को सामने ला सकते हैं जो पूंजीवादी व्यवस्था, शोषण जैसी मुश्किलों से जूझ रहा है। वे भारतीय जन नाट्य
संघ (इप्टा) कोंच की ग्रीष्मकालीन नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रस्तुतीकरण एवं सम्मान समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश ने कहा कि इप्टा का नामकरण मशहूर वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने किया। इप्टा ने स्वरों को जिंदगी के सुरों से बांधा है। प्रांतीय महासचिव संतोष डे ने
रंगकर्मियों की प्रस्तुतियों पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि कोंच की तरह ही इप्टा का कारवां हर नगर, हर गांव मेें बढ़ रहा है। राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने मौजूदा दौर में बाल रंगमंच की आवश्यकता पर बल दिया, वहीं झांसी इप्टा इकाई के अध्यक्ष डॉ. इकबाल खान ने कहा कि सामाजिक प्रतिरोध की परंपरा का पालन इप्टा के
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रंगकर्मी अपने नाटकों और गीतों के माध्यम से करते हैं। इस मौके पर कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले रंगकर्मियों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोह लिया। नगर पालिका
परिषद् कोंच के अध्यक्ष प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया, डॉ. एके श्रीवास्तव, आतिपु इमरोज, बलवान सिंह यादव पूर्व जिला पंचायत सदस्य झांसी, लखनऊ इप्टा के अध्यक्ष प्रदीप घोष, उरई इप्टा के अध्यक्ष देवेन्द्र शुक्ला ने भी संबोधित किया।
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संघ (इप्टा) कोंच की ग्रीष्मकालीन नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रस्तुतीकरण एवं सम्मान समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर मुख्य वक्ता इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश ने कहा कि इप्टा का नामकरण मशहूर वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने किया। इप्टा ने स्वरों को जिंदगी के सुरों से बांधा है। प्रांतीय महासचिव संतोष डे ने
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रंगकर्मियों की प्रस्तुतियों पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि कोंच की तरह ही इप्टा का कारवां हर नगर, हर गांव मेें बढ़ रहा है। राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने मौजूदा दौर में बाल रंगमंच की आवश्यकता पर बल दिया, वहीं झांसी इप्टा इकाई के अध्यक्ष डॉ. इकबाल खान ने कहा कि सामाजिक प्रतिरोध की परंपरा का पालन इप्टा के
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रंगकर्मी अपने नाटकों और गीतों के माध्यम से करते हैं। इस मौके पर कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले रंगकर्मियों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोह लिया। नगर पालिका
परिषद् कोंच के अध्यक्ष प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया, डॉ. एके श्रीवास्तव, आतिपु इमरोज, बलवान सिंह यादव पूर्व जिला पंचायत सदस्य झांसी, लखनऊ इप्टा के अध्यक्ष प्रदीप घोष, उरई इप्टा के अध्यक्ष देवेन्द्र शुक्ला ने भी संबोधित किया।