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Jalaun News: कोमेश के जन्मदिन व कनिष्क के पास होने की खुशी में गए थे सभी

Wed, 15 May 2024 02:56 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Wed, 15 May 2024 02:56 AM IST
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Everyone had gone to celebrate Komesh's birthday and Kanishk's presence.
उरई। पांचों मृतक आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे। रविवार को महेंद्र प्रताप उर्फ कोमेश का जन्मदिन था। जिस पर पार्टी देने की बात हुई। इसके अलावा कनिष्क का सोमवार को हाईस्कूल का रिजल्ट आया, जिसमें वह अच्छे नंबरों से पास हो गया। इसी को लेकर सभी में पार्टी देने की बात हुई। आपस में विचार करने के बाद सलाघाट जाने को तैयार हुए।
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सलाघाट जाने से पहले सभी अपने दोस्त हेमंत को लेने के लिए बोहदपुरा गांव पहुंचे और वहां से सलाघाट पहुंच गए। जहां नहाते समय एक-दूसरे को बचाने के चक्कर में सभी की बेतवा नदी में डूबने से मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि वह कहां जा रहे हैं, उन्होंने इस बारे में कुछ बताया नहीं था। इससे सोचा कि वह बाजार में कहीं घूमने या मोहल्ले में होंगे। शाम को जब पुलिस से उनके लापता होने की जानकारी मिली तो सन्न रह गए। परिजन पूरी रात नदी के किनारे बैठकर अपनों के मिलने के इंतजार में टकटकी लगाए रहे। जैसे ही उनके शव नदी से निकले परिजनों के आंखों से आंसू निकल पड़े। एक साथ पांच मौतों से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
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कार पंचर होने के बाद मौत ने बुला लिया सलाघाट
उरई। पांचों के जाने की बात हुई तो सभी ने बाइकों से न चलने की बात कही। जिस पर सभी ने मिलकर रुपये एकत्रित कर कार से चलने का फैसला किया। लेकिन कार जैसे ही उरई से निकली तो पंचर हो गई। इसके बाद वह सभी बाइकों के सहारे ही सलाघाट पहुंच गए। लोगों का कहना है कि उन्हें मौत अपनी ओर खींच रही थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वह जहां जा रहे हैं वहां से अब वह कभी वापस नहीं आ पाएंगे।
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कोचिंग से हुई थी दोस्ती, भाई की तरह रहते थे सभी
उरई। सभी अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते थे, लेकिन कोचिंग एक साथ पढ़ते थे, जिससे उनकी दोस्ती हो गई। यह दोस्ती भाईचारे में बदल गई। जिससे वह एक दूसरे के बिना नहीं रहते थे। परिजनों ने बताया कि एक का भी फोन आने पर सभी इकट्ठा हो जाते थे। सभी दोस्तों में काफी प्रेम था, कोई एक दूसरे की बात नहीं काटते थे। जिस वजह से परिजन भी सभी को अपने बेटों की तरह मानते थे।

बीस घंटे में निकल सके सभी शव, घाट पर मची रही चीख पुकार
उरई। पांचों दोस्तों के एक के बाद एक का शव मिलने से घाट पर बीस घंटे तक चीख पुकार मची रही। शव मिलते ही परिजन उससे लिपट जाते और दूसरे की उम्मीद कर फिर नदी की ओर देखने लगते। फिर एक शव मिल जाता। शाम से शुरू हुआ यह सिलसिला दोपहर 12 बजे तक चलता रहा। सभी शव मिलने के बाद लोग उरई लौट आए। मंगलवार को सलाघाट पर सैकड़ों की संख्या में लोग अपनों की मिलने की चाह में खड़े रहे।


परिजनों ने नहीं खाया खाना, पसरा रहा सन्नाटा
उरई। एक ही मोहल्ले के चार दोस्तों के शव जैसे ही घर पहुंचे तो परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन उनके शवों को देखकर खून के आंसू रो रहे थे। उनकी मां बिलख बिलखकर बच्चों को निहारे जा रही थी। वह कभी उनके शव को सीने से लगा रही थी, तो कभी उठो लाल और एक बार मम्मी कह दो कहकर रो रही थी। उनकी करुण पुकार सुनकर आसपास के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। एक ही मोहल्ले में एक साथ चार मौतों से परिजनों में कोहराम है। शाम को ही उनके लापता हो जाने की जानकारी पर परिजनों ने खाना पीना छोड़ दिया था। शव आने के बाद उनका पूरा दिन रोते रोते निकल गया। लोगों ने परिजनों को खूब समझाया, लेकिन वह सिर्फ अपनों को सोच बस रोते जा रहे थे।



मृतकों के परिजनों को मिलेगा मुआवजा
उरई। नदी में डूबे पांच दोस्तों की जानकारी मिलते ही कोंच एसडीएम सुशील कुमार मौके पर पहुंचे और बताया कि सभी मृतकों के शव को निकाल लिया गया है। सभी को शासन की तरफ से चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
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