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11 लाख की अंग्रेजी शराब पकड़ी, दो तस्कर गिरफ्तार
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Tue, 24 Nov 2015 11:09 PM IST
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पुलिस ने हरियाणा से तस्करी कर लाई गई अंग्रेजी शराब की 340 पेटी बरामद कर
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दो तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक प्रधान पद के प्रत्याशी का पुत्र
है। शराब की कीमत 11 लाख 42 हजार रुपये बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक
यह शराब प्रधानी के चुनाव के दौरान मतदाताओं को बांटे जाने के लिए मंगाई गई
थी। आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
सीओ जंगबहादुर ने शहर कोतवाली में पत्रकारों को बताया कि सोमवार देर रात सूचना मिली कि कोतवाली क्षेत्र के भुआ गांव में हरियाणा से तस्करी कर लाई गई शराब उतारी जा रही है। कोतवाली के दरोगा अरुण तिवारी, मनोज गुप्ता, लाल बहादुर सिंह, एचसीपी जगदीश शरण, सिपाही चंद्रदेव सिंह, संदीप दुबे, इमरान खान, उपेंद्र सिंह, मशरुर, रजा हुसैन ने भुआ
गांव के प्राइमरी पाठशाला के पास दबिश दी तो वहां ट्रक से अवैध शराब उतारी जा रही थी। पुलिस ने घेेराबंदी कर दो तस्करों जितेंद्र कुमार निवासी गांव कैथेरी व अजीत कुमार निवासी भुआ को गिरफ्तार कर लिया। मौके पर करीब 16 हजार
शीशियों में भरी 340 पेटी शराब बरामद की गई। तस्कर अजीत कुमार के पिता अरविंद कुमार गांव से प्रधानी का चुनाव लड़ रहे हैं। इस बरामदगी पर एसपी ने कोतवाली पुलिस के प्रत्येक दरोगा व सिपाही को पांच-पांच हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है।
सरगनाओं पर हाथ नहीं डालती पुलिस
पुलिस ने पिछले दिनों कालपी, आटा, उरई आदि स्थानों पर छापा मारकर लाखों रुपये की शराब पकड़ी थी लेकिन गिरोह का सरगना अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। पुलिस को इन अवैध कारोबारियों की जानकारी है, पर उनकी राजनीतिक पहुंच के कारण उन पर हाथ डालने से कतराती है। यही माफिया पकड़े गए गुर्गों को छुड़ाने के लिए रात भर कोतवाली के बाहर डेरा डाले रहे लेकिन मामला प्रेस के संज्ञान में आने के बाद पुलिस सख्त रवैया अपनाए रही।
नदीगांव और रामपुरा बने तस्कारी के अड्डे
शराब के तस्कर पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण अपने काम का तरीका बदल देते हैं। सूत्रों के मुताबिक तस्कर इन दिनों सीमावर्ती रामपुरा व नदीगांव थानों के गांवों में शराब डंप करते हैं। रास्ता साफ देख यहीं से लग्जरी गाड़ियों के जरिए अपने गुर्गों तक इसकी सप्लाई करते हैं। इसी तरह की एक स्कार्पियो गाड़ी राठ रोड पर पलटी थी, जिसमें अवैध शराब लदी थी।
कौन है आबकारी का सिपाही
चर्चा है कि शराब की तस्करी में आबकारी विभाग का एक सिपाही भी शामिल है। वही शराब से लदे ट्रकों को पास करवाता है। इस दिशा में थाना व कोतवाली पुलिस की सक्रियता तो दिखती है, पर आबकारी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है। इस बाबत बात करने पर अधिकारी सीमित संसाधनों का रोना रोते हैं। लोगों का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जाए तो उस सिपाही का नाम सामने आ सकता है।
सीओ जंगबहादुर ने शहर कोतवाली में पत्रकारों को बताया कि सोमवार देर रात सूचना मिली कि कोतवाली क्षेत्र के भुआ गांव में हरियाणा से तस्करी कर लाई गई शराब उतारी जा रही है। कोतवाली के दरोगा अरुण तिवारी, मनोज गुप्ता, लाल बहादुर सिंह, एचसीपी जगदीश शरण, सिपाही चंद्रदेव सिंह, संदीप दुबे, इमरान खान, उपेंद्र सिंह, मशरुर, रजा हुसैन ने भुआ
गांव के प्राइमरी पाठशाला के पास दबिश दी तो वहां ट्रक से अवैध शराब उतारी जा रही थी। पुलिस ने घेेराबंदी कर दो तस्करों जितेंद्र कुमार निवासी गांव कैथेरी व अजीत कुमार निवासी भुआ को गिरफ्तार कर लिया। मौके पर करीब 16 हजार
शीशियों में भरी 340 पेटी शराब बरामद की गई। तस्कर अजीत कुमार के पिता अरविंद कुमार गांव से प्रधानी का चुनाव लड़ रहे हैं। इस बरामदगी पर एसपी ने कोतवाली पुलिस के प्रत्येक दरोगा व सिपाही को पांच-पांच हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है।
सरगनाओं पर हाथ नहीं डालती पुलिस
पुलिस ने पिछले दिनों कालपी, आटा, उरई आदि स्थानों पर छापा मारकर लाखों रुपये की शराब पकड़ी थी लेकिन गिरोह का सरगना अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। पुलिस को इन अवैध कारोबारियों की जानकारी है, पर उनकी राजनीतिक पहुंच के कारण उन पर हाथ डालने से कतराती है। यही माफिया पकड़े गए गुर्गों को छुड़ाने के लिए रात भर कोतवाली के बाहर डेरा डाले रहे लेकिन मामला प्रेस के संज्ञान में आने के बाद पुलिस सख्त रवैया अपनाए रही।
नदीगांव और रामपुरा बने तस्कारी के अड्डे
शराब के तस्कर पुलिस के बढ़ते दबाव के कारण अपने काम का तरीका बदल देते हैं। सूत्रों के मुताबिक तस्कर इन दिनों सीमावर्ती रामपुरा व नदीगांव थानों के गांवों में शराब डंप करते हैं। रास्ता साफ देख यहीं से लग्जरी गाड़ियों के जरिए अपने गुर्गों तक इसकी सप्लाई करते हैं। इसी तरह की एक स्कार्पियो गाड़ी राठ रोड पर पलटी थी, जिसमें अवैध शराब लदी थी।
कौन है आबकारी का सिपाही
चर्चा है कि शराब की तस्करी में आबकारी विभाग का एक सिपाही भी शामिल है। वही शराब से लदे ट्रकों को पास करवाता है। इस दिशा में थाना व कोतवाली पुलिस की सक्रियता तो दिखती है, पर आबकारी विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है। इस बाबत बात करने पर अधिकारी सीमित संसाधनों का रोना रोते हैं। लोगों का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जाए तो उस सिपाही का नाम सामने आ सकता है।