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अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Tue, 17 Nov 2015 11:01 PM IST
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क्शहर के रामकुंड पर छठ पूजा का पर्व बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया
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गया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुओं न अस्त होते सूर्य को प्रथम अर्घ्य
देकर उपासना की और ईश्वर से सुख, समृद्धि और धनधान्य से परिपूर्ण होने की
प्रार्थना की। गौरतलब है कि सूर्यनारायण और भगवती शक्ति की उपासना का
पर्व छठ पर उगते हुए सूर्य के साथ अस्त होते हुए सूर्य को भी अर्घ्य
देेने की परंपरा है। ये सभी के प्रति उदारता एवं सम्मान देने का संदेश देती है। इस चार दिवसीय महापर्व का मंगलवार को तीसरा दिन था जिसमें अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है है। बुधवार को चौथे दिन के उदय होतो सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन होगा। इस अवसर पर समाजसेवी एवं शिक्षाविद संजय साहनी ने बताया कि जो व्यक्ति नित्य सूर्य को
नमन करते है वह कभी भी किसी रोग एवं दरिद्रता के शिकार नहीं होते हैं। इस महावर्प पर बिहार से आयी श्रृद्धालु आशा प्रसाद ने बताया कि भारतीय संस्कृति में अति महत्वपूर्ण पर्व है। यह महापर्व बिहार एवं पूर्वांचल के इलाके में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यह महापर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी से सप्तमी तक रहता है। इतना ही नहीं वेद और पुराणों में भी सूर्य
भगवान की पूजा अर्चना के बारे में मान्यता है कि पुरुषार्थ, धर्म, कर्म, अर्थ, मोक्ष प्रदान के अलावा दीर्घायु एवं आरोग्य देते है। इस मौके पर सुमन साहिनी, धनंजय झा, श्वेता आनंद, संजीव साहनी, यशोदा देवी, शैलेंद्र पाठक, बासमती देवी, संजय झा, डा. संजय सेंगर, संजय पाठक, खुशहाल साहनी, हर्षिता साहनी, अमन, मनीषा, डिंपल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
देेने की परंपरा है। ये सभी के प्रति उदारता एवं सम्मान देने का संदेश देती है। इस चार दिवसीय महापर्व का मंगलवार को तीसरा दिन था जिसमें अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है है। बुधवार को चौथे दिन के उदय होतो सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन होगा। इस अवसर पर समाजसेवी एवं शिक्षाविद संजय साहनी ने बताया कि जो व्यक्ति नित्य सूर्य को
नमन करते है वह कभी भी किसी रोग एवं दरिद्रता के शिकार नहीं होते हैं। इस महावर्प पर बिहार से आयी श्रृद्धालु आशा प्रसाद ने बताया कि भारतीय संस्कृति में अति महत्वपूर्ण पर्व है। यह महापर्व बिहार एवं पूर्वांचल के इलाके में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यह महापर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी से सप्तमी तक रहता है। इतना ही नहीं वेद और पुराणों में भी सूर्य
भगवान की पूजा अर्चना के बारे में मान्यता है कि पुरुषार्थ, धर्म, कर्म, अर्थ, मोक्ष प्रदान के अलावा दीर्घायु एवं आरोग्य देते है। इस मौके पर सुमन साहिनी, धनंजय झा, श्वेता आनंद, संजीव साहनी, यशोदा देवी, शैलेंद्र पाठक, बासमती देवी, संजय झा, डा. संजय सेंगर, संजय पाठक, खुशहाल साहनी, हर्षिता साहनी, अमन, मनीषा, डिंपल आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।