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बदले हालात तो काम धंधा बदलना भी हुई मजबूरी
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मुहम्मदाबाद में रेडीमेड कपड़े बेचने वाला आरिफ सब्जी बेचता
- फोटो : ORAI
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उरई (जालौन)। लॉकडाउन के दिनों ने लोगों की न सिर्फ अपनी दिनचर्या ही बदल दी है बल्कि बदलते हालात में कुछ लोगों ने अपने व्यवसाय तक बदल डाले हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि मरता क्या न करता, पेट पालना है तो कब तक घर पर हाथ पर हाथ धरे बैठा जा सकता है। स्थिति यह है कि कोई फुटपाथ पर कपड़े की दुकान करता था तो अब घर के दरवाजे पर ही सब्जी और ब्रेड बेच रहा है तो चाट, पानी पूरी और चाऊमीन बेचने वाले दुकानदार भी अब सब्जी बेचते नजर आ रहे हैं।
रामपुरा संवाद के अनुसार, रामपुरा कस्बे के राजेंद्र नगर निवासी धर्मेंद्र बताते हैं कि लॉकडाउन के पहले तक चाट, पानी पूरी और चाऊमीन आदि बेचते थे। रोजाना के तीन चार सौ रुपये की कमाई भी हो जाती थी। जबसे लॉकडाउन हुआ तो ठेला घर पर ही खड़ा करना पड़ा। परिवार में तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, रोज कोई राशन भी देने वाला नहीं है। लिहाजा ठेले की दोबारा से साफ सफाई कर उसमें सब्जी रखकर बेचने लगे हैं। दूसरी गलियों में भी फेरी लगा लेते हैं, दो ढाई सौ रुपये तो मिलने भी लगे हैं।
मुहम्मदाबाद संवाद के मुताबिक, मुहम्मदाबाद निवासी आरिफ ने बताया कि लॉकडाउन के पहले तक पिता रहमतउल्ला के साथ मिलकर उरई के राजमार्ग स्थित बाजार में छोटी सी कपड़े की दुकान चलाते थे। लॉकडाउन ने सब कुछ बंद करा दिया। अब जीवनयापन के लिए गांव में घर के बाहर ही सब्जी की दुकान कर ली है। कुछ न कुछ हाथ आ ही जाता है। इस दुकान पर भी पिता पुत्र दोनों बारी बारी से बैठ रहे हैं।
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सिरसाकलार संवाद के अनुसार, यही हाल सिरसाकलार स्थित दमरास गांव के घनश्याम का भी है। जो पहले चाय पकौड़े की दुकान किए था। ग्राहक बिना बुलाए ही चाय नाश्ते के लिए दुकान आया करते थे, अब सब्जी बेच रहे हैं और चिल्ला-चिल्ला कर ग्राहकों को बुला रहे हैं। घनश्याम के मुताबिक आखिर घर पर रखी बचत से कब तक काम चल सकता था, पेट पालने के लिए कुछ तो करना ही था।
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रामपुरा संवाद के अनुसार, रामपुरा कस्बे के राजेंद्र नगर निवासी धर्मेंद्र बताते हैं कि लॉकडाउन के पहले तक चाट, पानी पूरी और चाऊमीन आदि बेचते थे। रोजाना के तीन चार सौ रुपये की कमाई भी हो जाती थी। जबसे लॉकडाउन हुआ तो ठेला घर पर ही खड़ा करना पड़ा। परिवार में तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, रोज कोई राशन भी देने वाला नहीं है। लिहाजा ठेले की दोबारा से साफ सफाई कर उसमें सब्जी रखकर बेचने लगे हैं। दूसरी गलियों में भी फेरी लगा लेते हैं, दो ढाई सौ रुपये तो मिलने भी लगे हैं।
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मुहम्मदाबाद संवाद के मुताबिक, मुहम्मदाबाद निवासी आरिफ ने बताया कि लॉकडाउन के पहले तक पिता रहमतउल्ला के साथ मिलकर उरई के राजमार्ग स्थित बाजार में छोटी सी कपड़े की दुकान चलाते थे। लॉकडाउन ने सब कुछ बंद करा दिया। अब जीवनयापन के लिए गांव में घर के बाहर ही सब्जी की दुकान कर ली है। कुछ न कुछ हाथ आ ही जाता है। इस दुकान पर भी पिता पुत्र दोनों बारी बारी से बैठ रहे हैं।
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सिरसाकलार संवाद के अनुसार, यही हाल सिरसाकलार स्थित दमरास गांव के घनश्याम का भी है। जो पहले चाय पकौड़े की दुकान किए था। ग्राहक बिना बुलाए ही चाय नाश्ते के लिए दुकान आया करते थे, अब सब्जी बेच रहे हैं और चिल्ला-चिल्ला कर ग्राहकों को बुला रहे हैं। घनश्याम के मुताबिक आखिर घर पर रखी बचत से कब तक काम चल सकता था, पेट पालने के लिए कुछ तो करना ही था।

रामपुरा में पानी पूड़ी बेचने वाला दुकानदार सब्जी बेचता हुआ- फोटो : ORAI