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खाद के बजाए मिलता जवाब, आएगी तो बांटी जाएगी
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कमलापत
- फोटो : ORAI
माधौगढ़/सरावन। यूरिया खाद के लिए किसान जहां समितियों के चक्कर काट रहे हैं वहीं समिति कर्मचारियों के पास एक ही जवाब होता है कि आएगी तो मिल जाएगी। इस पर मरता क्या न करता परेशान किसान समिति से निकलकर सीधे प्राइवेट दुकान पहुंचता है, जहां ऊंचे दामों में यूरिया खरीद कर जैसे-तैसे फसलों को बचा रहा है।
बता दें कि ब्लाक माधौगढ़ क्षेत्र में ग्यारह सहकारी समिति हैं। जिसमें गोपालपुरा, मिझौना, अटागांव, कैलोर, चितौरा, पड़कुला, रूदपुरा, अमखेडा़, सरावन, गोहन, माधौगढ़ समिति शामिल हैं। इनमें यूरिया न होने से किसान समितियों के चक्कर काट रहे है। बाजरा, तिली, गन्ना, धान आदि की फसलों में यूरिया की सख्त जरूरत है। वहीं माधौगढ़ सहकारी क्रय विक्रय समिति के सचिव चुनूवाद पाल का कहना है कि पांच ट्रक की रकम जमा है। दो तीन दिन में यूरिया के आने की संभावना है। सरावन प्रतिनिधि के अनुसार खरीफ का सीजन होने के बाद भी अभी तक साधन सहकारी समिति में यूरिया एवं डीएपी का अता पता नहीं है। किसानों को ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। सचिव कौशल किशोर का कहना है कि समिति का भवन न होने से खाद नहीं मंगाई है, पुराना भवन जर्जर है। जिससे नुकसान की आशंका को देखते हुए खाद नहीं मंगाई है। पीसीएफ अध्यक्ष सौरभ कुमार ने कहा कि अधिकांश स्थानों पर यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जहां पर दिक्कत है, वहां का निरीक्षण कर उसे भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा। कहीं पर भी दुकानदार कालाबाजारी करते पाए तो उनके खिलाफ रासुका तक की कार्रवाई की जाएगी।
अब यूरिया बनी समस्या
माधौगढ़ तहसील के ऊंचा गांव निवासी किसान मुन्ना मिश्रा का कहना है कि बड़ी मुश्किल से तो अन्ना मवेशियों से फसल को बचाकर यहां तक लाए हैं, अब यूरिया की किल्लत ने तो मुश्किलें और बढ़ा दी है। किसानों की सुनने वाला भी तो कोई नहीं है।
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दुकानों से नगद खरीदनी पड़ रही यूरिया
माधौगढ़ के हैदलपुर गांव निवासी किसान महादेव के मुताबिक दो तीन मर्तबा समिति जा चुके हैं लेकिन खाद नहीं मिली। अब मजबूरन दुकानों से नगद रुपये देकर यूरिया खरीदनी पड़ रही है। समिति से तो कार्ड की भी सुविधा मिल जाती है लेकिन वहां खाद ही नहीं है।
लागत निकलना भी मुश्किल
सरावन के किसान मो. शानू का कहना है कि समितियों से यूरिया का इंतजार करते रहे तो सिवाय नुकसान के कुछ भी हाथ नहीं लगेगा। रुपयों का जुगाड़ कर प्राइवेट दुकानों से अधिक दामों पर उठान करनी पड़ रही है। जिससे लागत निकलना भी मुश्किल है।
अब यूरिया के लिए हो रहे परेशान
सरावन के ही किसान कमलापत का कहना है कि पहले तो डीजल के बढ़े दामों ने होश उड़ा दिए थे। जैसे-तैसे फसल खड़ी की तो अब यूरिया की किल्लत से पसीने छूट रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा कि किसान जाए तो जाए कहां और क्या करें, किससे कहे।
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बता दें कि ब्लाक माधौगढ़ क्षेत्र में ग्यारह सहकारी समिति हैं। जिसमें गोपालपुरा, मिझौना, अटागांव, कैलोर, चितौरा, पड़कुला, रूदपुरा, अमखेडा़, सरावन, गोहन, माधौगढ़ समिति शामिल हैं। इनमें यूरिया न होने से किसान समितियों के चक्कर काट रहे है। बाजरा, तिली, गन्ना, धान आदि की फसलों में यूरिया की सख्त जरूरत है। वहीं माधौगढ़ सहकारी क्रय विक्रय समिति के सचिव चुनूवाद पाल का कहना है कि पांच ट्रक की रकम जमा है। दो तीन दिन में यूरिया के आने की संभावना है। सरावन प्रतिनिधि के अनुसार खरीफ का सीजन होने के बाद भी अभी तक साधन सहकारी समिति में यूरिया एवं डीएपी का अता पता नहीं है। किसानों को ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। सचिव कौशल किशोर का कहना है कि समिति का भवन न होने से खाद नहीं मंगाई है, पुराना भवन जर्जर है। जिससे नुकसान की आशंका को देखते हुए खाद नहीं मंगाई है। पीसीएफ अध्यक्ष सौरभ कुमार ने कहा कि अधिकांश स्थानों पर यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जहां पर दिक्कत है, वहां का निरीक्षण कर उसे भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा। कहीं पर भी दुकानदार कालाबाजारी करते पाए तो उनके खिलाफ रासुका तक की कार्रवाई की जाएगी।
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अब यूरिया बनी समस्या
माधौगढ़ तहसील के ऊंचा गांव निवासी किसान मुन्ना मिश्रा का कहना है कि बड़ी मुश्किल से तो अन्ना मवेशियों से फसल को बचाकर यहां तक लाए हैं, अब यूरिया की किल्लत ने तो मुश्किलें और बढ़ा दी है। किसानों की सुनने वाला भी तो कोई नहीं है।
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दुकानों से नगद खरीदनी पड़ रही यूरिया
माधौगढ़ के हैदलपुर गांव निवासी किसान महादेव के मुताबिक दो तीन मर्तबा समिति जा चुके हैं लेकिन खाद नहीं मिली। अब मजबूरन दुकानों से नगद रुपये देकर यूरिया खरीदनी पड़ रही है। समिति से तो कार्ड की भी सुविधा मिल जाती है लेकिन वहां खाद ही नहीं है।
लागत निकलना भी मुश्किल
सरावन के किसान मो. शानू का कहना है कि समितियों से यूरिया का इंतजार करते रहे तो सिवाय नुकसान के कुछ भी हाथ नहीं लगेगा। रुपयों का जुगाड़ कर प्राइवेट दुकानों से अधिक दामों पर उठान करनी पड़ रही है। जिससे लागत निकलना भी मुश्किल है।
अब यूरिया के लिए हो रहे परेशान
सरावन के ही किसान कमलापत का कहना है कि पहले तो डीजल के बढ़े दामों ने होश उड़ा दिए थे। जैसे-तैसे फसल खड़ी की तो अब यूरिया की किल्लत से पसीने छूट रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा कि किसान जाए तो जाए कहां और क्या करें, किससे कहे।

मोहम्मद शानू- फोटो : ORAI

माधौगढ़ समिति में पसरा सन्नाटा- फोटो : ORAI

कालपी में प्राइवेट दुकान से खाद लेते किसान- फोटो : ORAI

मुन्ना मिश्रा- फोटो : ORAI

महादेव- फोटो : ORAI