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US-Iran War: क्रूड ऑयल का आयात थमा, दाम हुए दो गुने, डामर की कमी से हाथरस में रूका सड़कों का निर्माण

Sun, 17 May 2026 11:02 AM IST
Chaman Kumar Sharma विनीत चौरसिया, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
विनीत चौरसिया, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 17 May 2026 11:02 AM IST
सार

हाथरस जिले में मुख्य रूप से मथुरा रिफाइनरी से डामर की आपूर्ति होती है, लेकिन वर्तमान में वहां भी सीमित मात्रा में माल उपलब्ध हो रहा है। ठेकेदारों को आठ दिन की प्रतीक्षा के बाद डामर मिल पा रहा है।

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Road construction in Hathras stalled due to lack of damar
इगलास रोड से लहरा रोड पर रुका पड़ा निर्माण कार्य - फोटो : स्वयं

विस्तार

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब हाथरस जिले की सड़कों पर भी दिखने लगा है। इस युद्ध के कारण क्रूड ऑयल का आयात थमने से डामर (बिटुमेन या तारकोल) की उपलब्धता प्रभावित हो गई है। इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। 40 हजार रुपये टन की कीमत वाला बिटुमेन 80 हजार रुपये टन पर पहुंच गया है, इससे लोक निर्माण विभाग की कई सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण का कार्य ठप पड़ गया है।

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जिन परियोजनाओं के टेंडर जारी हो चुके हैं, वहां भी ठेकेदारों ने बढ़ी लागत के चलते काम शुरू करने में रुचि नहीं दिखाई है। जिन सड़कों पर काम चल रहा है, वहां भी निर्माण की गति धीमी पड़ गई है। जिले में मुख्य रूप से मथुरा रिफाइनरी से डामर की आपूर्ति होती है, लेकिन वर्तमान में वहां भी सीमित मात्रा में माल उपलब्ध हो रहा है। ठेकेदारों को आठ दिन की प्रतीक्षा के बाद डामर मिल पा रहा है।

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हम मथुरा रिफाइनरी से डामर का परिवहन ऑर्डर के आधार पर करते हैं। इस समय माल की कमी है, जिससे ठेकेदारों को दिक्कत हो रही है। ऑर्डर देने के आठ दिन बाद माल आ रहा है। दुबई से भी आयात ठप है, जिससे परेशानी और बढ़ गई है।-कपिल अग्रवाल, बिटुमेन कारोबारी।

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बिटुमेन की कमी व कीमतों में बढ़ोतरी का असर निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और शासन को आपूर्ति संकट की जानकारी भेजी गई है। जल्द ही इस समस्या का समाधान निकलने की उम्मीद है, टेंडर में दरों को संशोधित किया जा सकता है।-संजीव कुमार वर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग हाथरस।

दुबई से सस्ता डामर भी नहीं आ रहा
अमेरिका-इस्राइल और ईरान युद्ध से पहले दुबई और अन्य खाड़ी देशों से आयात होने वाला सस्ता डामर भी बाजार में उपलब्ध था, जिससे ठेकेदारों को राहत थी, लेकिन अब आयात पूरी तरह बंद है। बाजार में वीजी-10, वीजी-30 और वीजी-40 जैसे ग्रेड के डामर की कमी है।

कोल्ड इमल्शन की आपूर्ति भी प्रभावित
हरियाणा के पानीपत से आने वाला कोल्ड इमल्शन भी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है। सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले इस पदार्थ को गर्म करने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह ठेकेदारों के लिए सुविधाजनक विकल्प माना जाता है। इसकी कमी से भी कई निर्माण व मरम्मत कार्य प्रभावित हुए हैं।

ठेकेदार बोले : पुरानी दरों पर काम करना मुश्किल
सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार रामकुमार शर्मा ने बताया कि जब टेंडर लिए गए थे, तब डामर की कीमत लगभग आधी थी। अब अचानक दाम दोगुने हो जाने से लागत संतुलन बिगड़ गया है। पुरानी स्वीकृत दरों पर काम करना आर्थिक रूप से बेहद कठिन हो गया है, यदि जल्द संशोधित दरें तय नहीं हुईं तो कई परियोजनाएं और लटक सकती हैं।

ठेकेदार सुरेश चंद्र शर्मा का कहना है कि केवल कीमत बढ़ना ही समस्या नहीं है, बल्कि सामग्री समय पर उपलब्ध न होना भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि मथुरा रिफाइनरी से डामर लेने के लिए आठ दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। काम शुरू भी करें तो सामग्री की अनिश्चितता के कारण मशीनें और मजदूर खाली बैठ जाते हैं, जिससे अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इन सड़कों का निर्माण रुका

सड़क का नाम     किलोमीटर कुल लागत
हाथरस जंक्शन-बेरगांव 7.40 किमी 1061.56 लाख
कोकना कलां-कोकना खुर्द मार्ग 6.20 किमी 914.60 लाख
सादाबाद-जलेसर-करकौली मार्ग 04 किमी 690.28 लाख
एनएच 530बी से हसायन मार्ग 12.226 किमी 2036.03 लाख
एनएच 34 से कचौरा मार्ग 6.70 किमी 987.96 लाख
सासनी-अकराबाद मार्ग 13 किमी 2314.78 लाख

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