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Hathras News: मजदूर की कमाई 10 हजार रुपये महीना.. खाते में पहुंचे 4.12 करोड़ रुपये
Fri, 04 Sep 2026 02:47 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 04 Sep 2026 02:47 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
कमल वार्ष्णेय
हाथरस। मजदूरी कर महीने के महज 10 हजार रुपये कमाने वाले सहपऊ के गांव नगला सेवा निवासी मोहनवीर के खाते में चार करोड़ 12 लाख रुपये पहुंचे थे। जब राजस्थान पुलिस सम्मन लेकर पहुंची तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके मित्र जितेंद्र के खाते में 16.91 लाख रुपये आए थे और इसी तरह कई युवाओं के खातों में लाखों रुपये पहुंचे, जिनमें कोई ढकेल लगाता है तो कोई खेत में मजदूरी करता है।
सहपऊ पुलिस की आंख तब फटी रह गईं, जब 10 अगस्त को राजस्थान के जोधपुर साइबर सेल पुलिस यहां पहुंची। यहां की पुलिस ने नहीं सोचा था कि इतने छोटे कस्बे में करोड़ों का खेल उजागर होगा। जोधपुर पुलिस के हाथ में नगला सेवा व कस्बा सहपऊ के पांच खातों की डिटेल थी। पता चला कि जोधपुर के होटल व्यवसायी से ठगी गई रकम को यहां भेजा गया है।
जोधपुर साइबर सेल के निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि 12 जुलाई को होटल व्यवसायी सौरभ चौधरी से 26.91 लाख रुपये के फ्रॉड का मामला सामने आया था। टेलीग्राम पर निवेश के नाम पर उनसे ठगी हुई थी। संवाद
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पहली से तीसरी लेयर तक पहुंची रकम
जोधपुर के व्यापारी से ठगी की रकम पहली लेयर में मोहनवीर व जितेंद्र के खाते में पहुंची। मोहनवीर के खाते में 10 लाख और जितेंद्र के खाते में 16.91 लाख रुपये पहुंचे थे। इनके खातों से रकम निकलकर दूसरी व तीसरी लेयर में तीन अन्य खातों में पहुंची। ये पांचों खाते सहपऊ कस्बे के युवकों के हैं और डीसीबी बैंक आगरा में खोले गए हैं। इन खातों से आगे का लिंक जोधपुर पुलिस निकालने में जुटी है।
22 अगस्त को जोधपुर गए दोनों मजदूर
मोहनवीर व जितेंद्र गांव के ही दीपक के साथ जोधपुर की साइबर सेल पहुंचे। यहां पुलिस पूछताछ में दोनों ने अनंत कौशिक व प्रसून के नाम बताए, जिन्होंने धोखे से खाते खोले थे। अनंत ने पहले दीपक से ही संपर्क किया था। जोधपुर पुलिस से ही दोनों को पता चला कि उनके खातों में करोड़ों रुपये खपाए गए हैं। मोहनवीर ने वहां पुलिस को बताया कि वह टेढ़ी बगिया, आगरा में झाड़े की फैक्टरी में नौकरी करता है। वहीं जितेंद्र मथुरा के कोसी छाता में 10 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी कर रहा है।
राजस्थान पुलिस के हाथ नहीं आए शातिर
10 अगस्त को राजस्थान पुलिस के आते ही 12 अगस्त को सहपऊ पुलिस ने पहली एफआईआर दर्ज की। 24 अगस्त को दोनों मजदूरों के लौटने पर दीपक से तहरीर लेकर 27 अगस्त को एक और एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन अनंत कौशिक, प्रसून, प्रीतक, हर्ष, निशांत या गौरव में से कोई राजस्थान पुलिस के हाथ नहीं लग सका।
प्रकरण गंभीर है। संगठित गिरोह की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। विवेचना साइबर सेल को ट्रांसफर कर दी गई है।
-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी
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हाथरस। मजदूरी कर महीने के महज 10 हजार रुपये कमाने वाले सहपऊ के गांव नगला सेवा निवासी मोहनवीर के खाते में चार करोड़ 12 लाख रुपये पहुंचे थे। जब राजस्थान पुलिस सम्मन लेकर पहुंची तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके मित्र जितेंद्र के खाते में 16.91 लाख रुपये आए थे और इसी तरह कई युवाओं के खातों में लाखों रुपये पहुंचे, जिनमें कोई ढकेल लगाता है तो कोई खेत में मजदूरी करता है।
सहपऊ पुलिस की आंख तब फटी रह गईं, जब 10 अगस्त को राजस्थान के जोधपुर साइबर सेल पुलिस यहां पहुंची। यहां की पुलिस ने नहीं सोचा था कि इतने छोटे कस्बे में करोड़ों का खेल उजागर होगा। जोधपुर पुलिस के हाथ में नगला सेवा व कस्बा सहपऊ के पांच खातों की डिटेल थी। पता चला कि जोधपुर के होटल व्यवसायी से ठगी गई रकम को यहां भेजा गया है।
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जोधपुर साइबर सेल के निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि 12 जुलाई को होटल व्यवसायी सौरभ चौधरी से 26.91 लाख रुपये के फ्रॉड का मामला सामने आया था। टेलीग्राम पर निवेश के नाम पर उनसे ठगी हुई थी। संवाद
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पहली से तीसरी लेयर तक पहुंची रकम
जोधपुर के व्यापारी से ठगी की रकम पहली लेयर में मोहनवीर व जितेंद्र के खाते में पहुंची। मोहनवीर के खाते में 10 लाख और जितेंद्र के खाते में 16.91 लाख रुपये पहुंचे थे। इनके खातों से रकम निकलकर दूसरी व तीसरी लेयर में तीन अन्य खातों में पहुंची। ये पांचों खाते सहपऊ कस्बे के युवकों के हैं और डीसीबी बैंक आगरा में खोले गए हैं। इन खातों से आगे का लिंक जोधपुर पुलिस निकालने में जुटी है।
22 अगस्त को जोधपुर गए दोनों मजदूर
मोहनवीर व जितेंद्र गांव के ही दीपक के साथ जोधपुर की साइबर सेल पहुंचे। यहां पुलिस पूछताछ में दोनों ने अनंत कौशिक व प्रसून के नाम बताए, जिन्होंने धोखे से खाते खोले थे। अनंत ने पहले दीपक से ही संपर्क किया था। जोधपुर पुलिस से ही दोनों को पता चला कि उनके खातों में करोड़ों रुपये खपाए गए हैं। मोहनवीर ने वहां पुलिस को बताया कि वह टेढ़ी बगिया, आगरा में झाड़े की फैक्टरी में नौकरी करता है। वहीं जितेंद्र मथुरा के कोसी छाता में 10 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी कर रहा है।
राजस्थान पुलिस के हाथ नहीं आए शातिर
10 अगस्त को राजस्थान पुलिस के आते ही 12 अगस्त को सहपऊ पुलिस ने पहली एफआईआर दर्ज की। 24 अगस्त को दोनों मजदूरों के लौटने पर दीपक से तहरीर लेकर 27 अगस्त को एक और एफआईआर दर्ज कर ली, लेकिन अनंत कौशिक, प्रसून, प्रीतक, हर्ष, निशांत या गौरव में से कोई राजस्थान पुलिस के हाथ नहीं लग सका।
प्रकरण गंभीर है। संगठित गिरोह की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। विवेचना साइबर सेल को ट्रांसफर कर दी गई है।
-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी