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हाथरस : इस बार तीन हजार हेक्टेयर तक बढ़ सकता है आलू का रकबा
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हाथरस : खेत में आलू की बुवाई करते किसान। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में पिछले वर्ष की तुलना में आलू की फसल बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। इसकी वजह किसानों को इस बार आलू का भाव पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा मिलने की उम्मीद होना है। पिछले कई दिनों से आलू की गड़ाई का काम तेजी से चल रहा है।
जिले के सादाबाद, मुरसान, सहपऊ, हाथरस और सासनी विकास खंड में आलू की पैदावार सबसे ज्यादा की जाती है। इनमें से सादाबाद और मुरसान क्षेत्र तो आलू की पैदावार का हब है। पिछले वर्ष जिले में करीब 48 हजार 150 हेक्टेयर में आलू की पैदावार हुई थी, लेकिन इस बार आलू की फसल का क्षेत्र ढाई से तीन हजार हेक्टेयर बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। विभागीय लोग भी इसी बात को कह रहे हैं।
आलू की फसल की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। खाद, बीज, जुताई और सिंचाई सभी कुछ महंगा हो गया है। वर्ष के अंत तक भाव काफी कम होने के कारण किसानों का आलू की फसल से मोहभंग हो गया है, लेकिन अंत में आकर आलू का भाव अच्छा हो गया। इस कारण आलू की फसल को कुछ बढ़ाने की सोच रहे हैं।
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-अंकित, किसान
अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में आलू का भाव जमीन पर आ गया था । ऐसा लगा कि कोल्ड स्टोर के बाहर आलू फिंकेगा, लेकिन बारिश ने दाम बढ़ा दिए। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में किसानों ने आलू की बजाय सरसों बोई थी, लेकिन बारिश ने उसे खराब कर दिया, इसलिए सरसों वाले खेत में भी आलू ही पैदा करने की सोच रहे हैं।
-बालकिशन, दरकई
-जिले में 48 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बोई जाती है आलू की फसल।
-जिले में 161 से अधिक कोल्ड स्टोर हैं स्थापित।
जिले में आलू का रकबा बढ़ने की संभावना है, क्योंकि बारिश होने के कारण सरसों का क्षेत्रफल घटा है। इस कारण की फसल का क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
-अनीता यादव, जिला उद्यान अधिकारी हाथरस
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जिले में पिछले वर्ष की तुलना में आलू की फसल बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। इसकी वजह किसानों को इस बार आलू का भाव पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा मिलने की उम्मीद होना है। पिछले कई दिनों से आलू की गड़ाई का काम तेजी से चल रहा है।
जिले के सादाबाद, मुरसान, सहपऊ, हाथरस और सासनी विकास खंड में आलू की पैदावार सबसे ज्यादा की जाती है। इनमें से सादाबाद और मुरसान क्षेत्र तो आलू की पैदावार का हब है। पिछले वर्ष जिले में करीब 48 हजार 150 हेक्टेयर में आलू की पैदावार हुई थी, लेकिन इस बार आलू की फसल का क्षेत्र ढाई से तीन हजार हेक्टेयर बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। विभागीय लोग भी इसी बात को कह रहे हैं।
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आलू की फसल की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। खाद, बीज, जुताई और सिंचाई सभी कुछ महंगा हो गया है। वर्ष के अंत तक भाव काफी कम होने के कारण किसानों का आलू की फसल से मोहभंग हो गया है, लेकिन अंत में आकर आलू का भाव अच्छा हो गया। इस कारण आलू की फसल को कुछ बढ़ाने की सोच रहे हैं।
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-अंकित, किसान
अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में आलू का भाव जमीन पर आ गया था । ऐसा लगा कि कोल्ड स्टोर के बाहर आलू फिंकेगा, लेकिन बारिश ने दाम बढ़ा दिए। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में किसानों ने आलू की बजाय सरसों बोई थी, लेकिन बारिश ने उसे खराब कर दिया, इसलिए सरसों वाले खेत में भी आलू ही पैदा करने की सोच रहे हैं।
-बालकिशन, दरकई
-जिले में 48 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बोई जाती है आलू की फसल।
-जिले में 161 से अधिक कोल्ड स्टोर हैं स्थापित।
जिले में आलू का रकबा बढ़ने की संभावना है, क्योंकि बारिश होने के कारण सरसों का क्षेत्रफल घटा है। इस कारण की फसल का क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में बढ़ने की पूरी उम्मीद है।
-अनीता यादव, जिला उद्यान अधिकारी हाथरस