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हाथरस : जिले के छह और विद्यार्थी वापस लौटे यूक्रेन से अपने वतन
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हाथरस : यूक्रेन से लौटे छात्र आलोक चौधरी अपने परिजनों के साथ। संवाद
- फोटो : SHAPHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सहपऊ/हाथरस।
यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र-छात्राओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है। अब छह और विद्यार्थी अपने वतन आ गए हैं। इसमें कस्बा सादाबाद के चार विद्यार्थी शामिल हैं। इनके वापस लौटने पर कस्बा सादाबाद के लोगों ने इनका जोशीला किया। इन विद्यार्थियों ने यूक्रेन का भयावह मंजर भी बयां किया।
वहीं अभी जिले के छह लोगों के परिजन उनके घर वापस आने का इंतजार कर रहे हैं। इनके परिजन पूरे दिन काफी चिंतित रहे। यूक्रेन में हुई जंग के बाद जिले के 15 लोग वहां फंस गए थे। अब इनकी वतन वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। पांच अन्य छात्र बृहस्पतिवार को लौट आए।
इसमें सादाबाद कस्बे के बस स्टैंड के रहने वाले डॉ. सुनील उपाध्याय के बेटे कुलदीप उपाध्याय व इसी कस्बे के सलेमपुर रोड के रहने वाले राजेंद्र सिंह के बेटे आलोक चौधरी को स्लोवाकिया के रास्ते भारत लाया गया। कस्बा सादाबाद निवासी डॉ. माया चौधरी के बेटे तरुण चौधरी और समीम खान के बेटे शादाब खान को हंगरी के रास्ते देश लाया गया।
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कस्बे में आने पर इनके परिजन काफी भावुक हो गए। इन बच्चों का जोशीला स्वागत भी किया गया। इन सभी ने वहां के अनुभव साझा किए और वहां का भयानक मंजर बयां किया। सादाबाद के चारों विद्यार्थी वापस लौटने पर अपने परिजनों से मिलकर काफी रोए।
सादाबाद के ही गांव अरौठा निवासी विपुल भी अपने घर लौट आए। उनके परिजन इस समय आगरा में टेढ़ी बगिया के निकट रह रहे हैं। वह वह आगरा पहुुंच गया। गांव में रह रहे उसके परिजनों ने इसकी जानकारी दी। इधर, हाथरस तहसील के गांव मूंगसा निवासी अंकित भी रोमानिया से उड़ान के जरिये बृहस्पतिवार को मुंबई पहुंच गया और वहां एक रिश्तेदारी में रुक गया।
अंकित के पिता छत्तीसगढ़ में रहते हैं। ऐसे में वह अपने गांव मूंगसा आने की बजाय अपने पिता के पास छत्तीसगढ़ जाएगा। उसके परिजनों ने भी राहत की सांस ली। वहीं अभी जिले के आधा दर्जन विद्यार्थी अभी वापस नहीं लौटे हैं। ऐसे में इनके परिजन पूरे दिन चिंतित रहे और उनकी पल-पल की जानकारी लेते रहे। हालांकि इन विद्यार्थियों के भी अगले एक-दो दिन में वापस लौटने की उम्मीद है।
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यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्र-छात्राओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है। अब छह और विद्यार्थी अपने वतन आ गए हैं। इसमें कस्बा सादाबाद के चार विद्यार्थी शामिल हैं। इनके वापस लौटने पर कस्बा सादाबाद के लोगों ने इनका जोशीला किया। इन विद्यार्थियों ने यूक्रेन का भयावह मंजर भी बयां किया।
वहीं अभी जिले के छह लोगों के परिजन उनके घर वापस आने का इंतजार कर रहे हैं। इनके परिजन पूरे दिन काफी चिंतित रहे। यूक्रेन में हुई जंग के बाद जिले के 15 लोग वहां फंस गए थे। अब इनकी वतन वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। पांच अन्य छात्र बृहस्पतिवार को लौट आए।
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इसमें सादाबाद कस्बे के बस स्टैंड के रहने वाले डॉ. सुनील उपाध्याय के बेटे कुलदीप उपाध्याय व इसी कस्बे के सलेमपुर रोड के रहने वाले राजेंद्र सिंह के बेटे आलोक चौधरी को स्लोवाकिया के रास्ते भारत लाया गया। कस्बा सादाबाद निवासी डॉ. माया चौधरी के बेटे तरुण चौधरी और समीम खान के बेटे शादाब खान को हंगरी के रास्ते देश लाया गया।
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कस्बे में आने पर इनके परिजन काफी भावुक हो गए। इन बच्चों का जोशीला स्वागत भी किया गया। इन सभी ने वहां के अनुभव साझा किए और वहां का भयानक मंजर बयां किया। सादाबाद के चारों विद्यार्थी वापस लौटने पर अपने परिजनों से मिलकर काफी रोए।
सादाबाद के ही गांव अरौठा निवासी विपुल भी अपने घर लौट आए। उनके परिजन इस समय आगरा में टेढ़ी बगिया के निकट रह रहे हैं। वह वह आगरा पहुुंच गया। गांव में रह रहे उसके परिजनों ने इसकी जानकारी दी। इधर, हाथरस तहसील के गांव मूंगसा निवासी अंकित भी रोमानिया से उड़ान के जरिये बृहस्पतिवार को मुंबई पहुंच गया और वहां एक रिश्तेदारी में रुक गया।
अंकित के पिता छत्तीसगढ़ में रहते हैं। ऐसे में वह अपने गांव मूंगसा आने की बजाय अपने पिता के पास छत्तीसगढ़ जाएगा। उसके परिजनों ने भी राहत की सांस ली। वहीं अभी जिले के आधा दर्जन विद्यार्थी अभी वापस नहीं लौटे हैं। ऐसे में इनके परिजन पूरे दिन चिंतित रहे और उनकी पल-पल की जानकारी लेते रहे। हालांकि इन विद्यार्थियों के भी अगले एक-दो दिन में वापस लौटने की उम्मीद है।