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हाथरस : नगर पालिकाध्यक्ष को नोटिस, सात दिन में मांगा जवाब
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
तालाब के सौंदर्यीकरण, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति, ठंडे पानी के विक्रय के मामलों में की गई शिकायतों पर जांच के उपरांत शासन ने नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा को नोटिस दिया है और उनसे सात दिन के अंदर जवाब मांगा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि सात दिन के अंदर जवाब नहीं दिया तो उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
नोटिस जांच रिपोर्ट के आधार पर दिया गया है और जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता की बात कही गई है। उल्लेखनीय है कि नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा के खिलाफ कई मामलों में वित्तीय अनियमितता को लेकर शिकायतें की गई थीं। कई स्तर पर इनकी जांचें भी कराई गई थीं।
इसमें तालाब चौराहे के सौंदर्यीकरण के काम में वित्तीय अनियमितता, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति में वित्तीय अनियमितता, नगर पालिका के तहत ठंडा पानी के विक्रय हेतु वित्तीय अनियमितता की शिकायतें शामिल थीं। शासन को इस मामले में जांच रिपोर्ट मिली और उसके बाद प्रमुख सचिव अमृत अभिजात की ओर से विशेष सचिव सुनील कुमार चौधरी ने नोटिस भेजा है।
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तालाब चौराहे के सौंदर्यीकरण को लेकर नोटिस में कहा गया है कि तथ्यों से यह पुष्ट होता है कि मूल डीपीआर की धनराशि के सापेक्ष तीन गुना धनराशि व्यय होने के उपरांत भी तालाब चौराहे के सौंदर्यीकरण का काम आज तक नहीं हुआ है, जबकि 18 महीने के सापेक्ष चार साल से अधिक का समय बीत चुका है। इस प्रकार यह कृत्य वित्तीय अनियमितता के अंतर्गत आच्छादित है।
संबंधित कार्य की शर्तें अनुबंध का समय के तहत पालन न कराने के कराण वित्तीय हानि परिलक्षित हो रही है। इस नोटिस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कहा गया है कि इससे यह पुष्ट होता है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए श्रमिकों की आपूर्ति मैं. जिया इंटरप्राइजेज प्रा. लि.हाथरस का अनुबंध 31 मार्च 2019 को समाप्त होने के पश्चात भी नियमानुसार शहरी आजीविका केंद्र से न कराकर ई-टेंडरिंग के माध्यम से कराया गया है। यह शासनादेश के विपरीत है और इसमें भी वित्तीय अनियमितता परिलक्षित होती है।
ठंडे पानी के विक्रय का ठेके दिए जाने के बाबत शिकायत पर नोटिस में कहा गया है कि जांच समिति को यह मामला भी वित्तीय अनियमितता का मिला है। नोटिस में नगर पालिकाध्यक्ष से कहा गया है कि यदि सात दिन के अंदर स्पष्टीकरण नहीं दिया तो यह समझा जाएगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना और मामले में उपलब्ध अभिलेखों तथा गुण दोष के आधार पर उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 48 के तहत सुसंगत कार्रवाई कर दी जाएगी।
सांच को कोई आंच नहीं है। जो लोग यह चाहते हैं कि शहर का विकास न हो, वह इस तरह की झूठी शिकायतें करते रहते हैं और जांच कराते रहते हैं। मेरे कार्यकाल में किसी भी कार्य में कोई अनियमितता नहीं हुई है। स्पष्टीकरण मांगना एक प्रक्रिया है। शासन ने जिन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है, उसे लेकर स्पष्टीकरण दिए जाएंगे। - आशीष शर्मा, नगर पालिकाध्यक्ष, हाथरस
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तालाब के सौंदर्यीकरण, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति, ठंडे पानी के विक्रय के मामलों में की गई शिकायतों पर जांच के उपरांत शासन ने नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा को नोटिस दिया है और उनसे सात दिन के अंदर जवाब मांगा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि सात दिन के अंदर जवाब नहीं दिया तो उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
नोटिस जांच रिपोर्ट के आधार पर दिया गया है और जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया वित्तीय अनियमितता की बात कही गई है। उल्लेखनीय है कि नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा के खिलाफ कई मामलों में वित्तीय अनियमितता को लेकर शिकायतें की गई थीं। कई स्तर पर इनकी जांचें भी कराई गई थीं।
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इसमें तालाब चौराहे के सौंदर्यीकरण के काम में वित्तीय अनियमितता, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति में वित्तीय अनियमितता, नगर पालिका के तहत ठंडा पानी के विक्रय हेतु वित्तीय अनियमितता की शिकायतें शामिल थीं। शासन को इस मामले में जांच रिपोर्ट मिली और उसके बाद प्रमुख सचिव अमृत अभिजात की ओर से विशेष सचिव सुनील कुमार चौधरी ने नोटिस भेजा है।
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तालाब चौराहे के सौंदर्यीकरण को लेकर नोटिस में कहा गया है कि तथ्यों से यह पुष्ट होता है कि मूल डीपीआर की धनराशि के सापेक्ष तीन गुना धनराशि व्यय होने के उपरांत भी तालाब चौराहे के सौंदर्यीकरण का काम आज तक नहीं हुआ है, जबकि 18 महीने के सापेक्ष चार साल से अधिक का समय बीत चुका है। इस प्रकार यह कृत्य वित्तीय अनियमितता के अंतर्गत आच्छादित है।
संबंधित कार्य की शर्तें अनुबंध का समय के तहत पालन न कराने के कराण वित्तीय हानि परिलक्षित हो रही है। इस नोटिस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कहा गया है कि इससे यह पुष्ट होता है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए श्रमिकों की आपूर्ति मैं. जिया इंटरप्राइजेज प्रा. लि.हाथरस का अनुबंध 31 मार्च 2019 को समाप्त होने के पश्चात भी नियमानुसार शहरी आजीविका केंद्र से न कराकर ई-टेंडरिंग के माध्यम से कराया गया है। यह शासनादेश के विपरीत है और इसमें भी वित्तीय अनियमितता परिलक्षित होती है।
ठंडे पानी के विक्रय का ठेके दिए जाने के बाबत शिकायत पर नोटिस में कहा गया है कि जांच समिति को यह मामला भी वित्तीय अनियमितता का मिला है। नोटिस में नगर पालिकाध्यक्ष से कहा गया है कि यदि सात दिन के अंदर स्पष्टीकरण नहीं दिया तो यह समझा जाएगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना और मामले में उपलब्ध अभिलेखों तथा गुण दोष के आधार पर उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 48 के तहत सुसंगत कार्रवाई कर दी जाएगी।
सांच को कोई आंच नहीं है। जो लोग यह चाहते हैं कि शहर का विकास न हो, वह इस तरह की झूठी शिकायतें करते रहते हैं और जांच कराते रहते हैं। मेरे कार्यकाल में किसी भी कार्य में कोई अनियमितता नहीं हुई है। स्पष्टीकरण मांगना एक प्रक्रिया है। शासन ने जिन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है, उसे लेकर स्पष्टीकरण दिए जाएंगे। - आशीष शर्मा, नगर पालिकाध्यक्ष, हाथरस