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बदलता मौसम: वायरल के बाद खांसी व सीने में दर्द से कराह रहे मरीज, डॉक्टरों ने दी यह सलाह
Sat, 26 Sep 2026 03:26 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sat, 26 Sep 2026 03:26 PM IST
सार
बदलते मौसम में वायरल के बाद खांसी व सीने में दर्द से मरीज कराह रहे हैं। क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज सीओपीडी पीड़ितों के लिए समय चुनौतीपूर्ण है।
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हाथरस जिला अस्पताल
- फोटो : संवाद
विस्तार
बदलते मौसम और वायरल के बढ़ते प्रकोप ने आम लोगों के साथ गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) यानी फेफड़ों की पुरानी बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। वायरल की चपेट में आने से इन मरीजों को तेज खांसी, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
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अस्पतालों की ओपीडी में फिजिशियन व वरिष्ठ परामर्शदाता के पास पहुंचने वाले मरीजों में 20 फीसदी सीओपीडी पीड़ित हैं, जिनकी स्थिति वायरल इन्फेक्शन के कारण बिगड़ी है। शुक्रवार को हाथरस जिला अस्पताल की ओपीडी में 2134 मरीज परामर्श के लिए पहुंचे। वायरल बुखार, खांसी व सर्दी-जुकाम के 600 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचे।
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इसलिए खतरनाक है वायरल
फिजिशियन डाॅ. अवधेश कुमार ने बताया कि सीओपीडी मरीजों के फेफड़े पहले से ही कमजोर और संवेदनशील होते हैं। जब इन मरीजों को वायरल इन्फेक्शन (जैसे फ्लू या कोई अन्य रेस्पिरेटरी वायरस) होता है, तो फेफड़ों और सांस की नलियों में सूजन बढ़ जाती है, जिससे बलगम ज्यादा बनने लगता है। लगातार आने वाली तेज खांसी के कारण सीने की मांसपेशियों और पसलियों पर खिंचाव पड़ता है, जिससे सीने में तेज दर्द होने लगता है। मरीज का ऑक्सीजन लेवल प्रभावित हो सकता है और सामान्य से अधिक सांस फूलने की शिकायत होने लगती है।
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फिजिशियन की सलाह
- सीओपीडी मरीज चिकित्सक की सलाह से ही नेबुलाइजर या इन्हेलर लें। खुद से शुरू या बंद न करें।
- बिना चिकित्सक की सलाह के खुद से कोई भी एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवा न लें।
- बीड़ी-सिगरेट के धुएं, चूल्हे के धुएं और धूल-मिट्टी वाली जगहों से पूरी तरह दूर रहें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें, गुनगुना पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।