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हाथरस : कोरोना काल में जांचें हुईं कम तो टीबी के रोगी घटे
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हाथरस : एमडीटीबी अस्पताल का भवन। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना काल में टीबी के रोगी खोजने का अभियान भी प्रभावित हुआ। पिछले दो साल में संदिग्ध क्षय रोगियों की जांच में कमी आई है और इसकी वजह से क्षय रोगियों की संख्या भी कम हुई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध पाए जाने पर रोगियों की लगातार जांच की जा रही है और क्षय रोग की पुष्टि होने पर उन्हें दवा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
पिछले दो साल में लोगों ने कोरोना का दंश झेला। स्वास्थ्य महकमा कोरोना से निपटने में लगा रहा तो इसकी वजह से अन्य बीमारियों के मरीजों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा। यदि जिले में क्षय रोगियों की संख्या देखें तो वर्ष 2019 में जिले में 18,846 मरीजों की जांच हुई। इनमें से 3,784 क्षय रोगी पाए गए। इसके बाद वर्ष 2020 में जांच की संख्या घट गई। कुल 11,286 ही जांच हो पाईं और इस दौरान मरीजों की संख्या में भी कमी आई। इस दौरान टीबी के 2,581 मरीज सामने आए। वर्ष 2021 में कोरोना के चलते कुल 10,663 लोगों की जांच हुई और जांच में 2,776 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई। इस साल अभी तक 514 मरीज सामने आए हैं। संवाद
टीबी अस्पताल के कोविड अस्पताल बनने से मरीज परेशान
हाथरस। जिले में टीबी के रोगियों के लिए अलग से 30 शैया का अस्पताल भी है। मटरूमल धन्नालाल टीबी अस्पताल करीब 70 साल पुराना है। इस अस्पताल में केवल टीबी के रोगियों का ही उपचार होता है। गंभीर मरीज अस्पताल में भर्ती भी होते हैं, लेकिन कोरोेना काल में यह अस्पताल कोविड अस्पताल में परिवर्तित कर दिया गया। अभी भी यह अस्पताल कोविड अस्पताल में परिवर्तित है। ऐसे में टीबी के मरीजों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा। इस अस्पताल की ओपीडी भी चालू नहीं है। ऐसे में टीबी के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई माह से कोई टीबी मरीज इस अस्पताल में दाखिल भी नहीं हुआ है। वैसे यहां आने वाले मरीजों की जिला अस्पताल भेजा जाता है, लेकिन यहां पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। संवाद
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कोरोना काल में टीबी के रोगी खोजने का अभियान भी प्रभावित हुआ। पिछले दो साल में संदिग्ध क्षय रोगियों की जांच में कमी आई है और इसकी वजह से क्षय रोगियों की संख्या भी कम हुई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध पाए जाने पर रोगियों की लगातार जांच की जा रही है और क्षय रोग की पुष्टि होने पर उन्हें दवा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
पिछले दो साल में लोगों ने कोरोना का दंश झेला। स्वास्थ्य महकमा कोरोना से निपटने में लगा रहा तो इसकी वजह से अन्य बीमारियों के मरीजों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा। यदि जिले में क्षय रोगियों की संख्या देखें तो वर्ष 2019 में जिले में 18,846 मरीजों की जांच हुई। इनमें से 3,784 क्षय रोगी पाए गए। इसके बाद वर्ष 2020 में जांच की संख्या घट गई। कुल 11,286 ही जांच हो पाईं और इस दौरान मरीजों की संख्या में भी कमी आई। इस दौरान टीबी के 2,581 मरीज सामने आए। वर्ष 2021 में कोरोना के चलते कुल 10,663 लोगों की जांच हुई और जांच में 2,776 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई। इस साल अभी तक 514 मरीज सामने आए हैं। संवाद
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टीबी अस्पताल के कोविड अस्पताल बनने से मरीज परेशान
हाथरस। जिले में टीबी के रोगियों के लिए अलग से 30 शैया का अस्पताल भी है। मटरूमल धन्नालाल टीबी अस्पताल करीब 70 साल पुराना है। इस अस्पताल में केवल टीबी के रोगियों का ही उपचार होता है। गंभीर मरीज अस्पताल में भर्ती भी होते हैं, लेकिन कोरोेना काल में यह अस्पताल कोविड अस्पताल में परिवर्तित कर दिया गया। अभी भी यह अस्पताल कोविड अस्पताल में परिवर्तित है। ऐसे में टीबी के मरीजों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा। इस अस्पताल की ओपीडी भी चालू नहीं है। ऐसे में टीबी के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई माह से कोई टीबी मरीज इस अस्पताल में दाखिल भी नहीं हुआ है। वैसे यहां आने वाले मरीजों की जिला अस्पताल भेजा जाता है, लेकिन यहां पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। संवाद
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