{"_id":"636557b55961e464e83f2f94","slug":"hathras-arise-god-wake-up-god-the-house-courtyard-reverberated-with-the-call-hathras-news-ali3040254126","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : उठो देव, जागो देव...के आह्वान से गूंजे घर-आंगन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : उठो देव, जागो देव...के आह्वान से गूंजे घर-आंगन
विज्ञापन
हाथरस : देवोत्थान एकादशी के मद्देनजर फूलमालाएं बेचता एक विक्रेता। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
देव प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर शुक्रवार को घर-घर देवोत्थान के लिए पूजा-अर्चना कर देवताओं को शयन से उठाया गया। लोगों ने भगवान विष्णु का उपवास रखकर सुख-समृद्धि और धन धान्य की कामना की गई। घर-घर रंगोली सजाई गई। गेरू और खड़िया के घोल से घर, आंगन और दहलीज पर देवों की आकृतियां काढ़ी गईं। इससे पहले दिनभर बाजारों में खरीदारी का दौर चलता रहा। गन्ना, फल और सब्जियों की खूब बिक्री हुई।
इस लेकर सुबह से तैयारियां घर में शुरू हो गईं। देवों को जगाने से पहले गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद आदि का भोग लगाया गया। इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया। उपवास रखकर भगवान विष्णु से भक्तों ने संतति, सुख संपदा, सर्वकामना सिद्धि की कामना की। भगवान विष्णु के क्षीरसागर से बाहर आने के बाद जो कोई निष्ठा भाव से उनकी स्तुति करता है, उसके हर तरह के दुख दूर हो जाते हैं।
इसके अलावा तुलसी और सालिग्राम विवाह भी किया गया। देवोत्थान के बाद से मांगलिक कार्यों और आयोजनों का क्रम भी शुरू हो जाएगा। देवोत्थान की खरीदारी पर महंगाई का असर भी साफ दिखाई दिया। अन्य दिनों की अपेक्षा सिंघाड़े के दाम भी उछल गए। शकरकंद 15 रुपये किलो और गन्ना 20 रुपये का एक मिला। फल और सब्जियों के दाम सुनकर लोगों ने हिसाब से खरीदारी की। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
देव प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर शुक्रवार को घर-घर देवोत्थान के लिए पूजा-अर्चना कर देवताओं को शयन से उठाया गया। लोगों ने भगवान विष्णु का उपवास रखकर सुख-समृद्धि और धन धान्य की कामना की गई। घर-घर रंगोली सजाई गई। गेरू और खड़िया के घोल से घर, आंगन और दहलीज पर देवों की आकृतियां काढ़ी गईं। इससे पहले दिनभर बाजारों में खरीदारी का दौर चलता रहा। गन्ना, फल और सब्जियों की खूब बिक्री हुई।
इस लेकर सुबह से तैयारियां घर में शुरू हो गईं। देवों को जगाने से पहले गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद आदि का भोग लगाया गया। इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया। उपवास रखकर भगवान विष्णु से भक्तों ने संतति, सुख संपदा, सर्वकामना सिद्धि की कामना की। भगवान विष्णु के क्षीरसागर से बाहर आने के बाद जो कोई निष्ठा भाव से उनकी स्तुति करता है, उसके हर तरह के दुख दूर हो जाते हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा तुलसी और सालिग्राम विवाह भी किया गया। देवोत्थान के बाद से मांगलिक कार्यों और आयोजनों का क्रम भी शुरू हो जाएगा। देवोत्थान की खरीदारी पर महंगाई का असर भी साफ दिखाई दिया। अन्य दिनों की अपेक्षा सिंघाड़े के दाम भी उछल गए। शकरकंद 15 रुपये किलो और गन्ना 20 रुपये का एक मिला। फल और सब्जियों के दाम सुनकर लोगों ने हिसाब से खरीदारी की। संवाद
विज्ञापन