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35 साल पुराने एनकाउंटर मामले में फिर नहीं आए तीन पुलिसकर्मी
क्राइम न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
Updated Wed, 18 Jul 2018 12:28 AM IST
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35 साल पहले बहुचर्चित एनकाउंटर में तीन उपनिरीक्षक फरार चल रहे हैं। मंगलवार को पेशी के दौरान यह पुलिसकर्मी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए, जबकि इनके गैरजमानती वारंट पहले ही जारी हो चुके हैं। इसमें आरोपी एक पुलिसकर्मी की मौत हो चुकी है।
यह था मामला :
15 जनवरी 1983 को एटा कचहरी से वकील मनवीर सिंह के बिस्तर (तख्त) से कुछ पुलिसकर्मियों ने दिनदहाड़े एक ग्रामीण हीरालाल पुत्र बलवंत निवासी महमूदपुर सिकंदराराऊ को पकड़ा था। कचहरी परिसर में वकीलों ने इसका कड़ा विरोध भी किया था। पुलिस ने उसे कई दिन तक उसे सिकंदराराऊ और फिर चंदपा थाने में हिरासत में रखा था। 5 फरवरी 1983 को उसे चंदपा के गांव नगला ओझा के निकट मुठभेड़ में मार गिराया दर्शाया। पुलिस की इस कथित मुठभेड़ पर सवाल उठे। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई थी। शहर के अधिवक्ता रायवीर सिंह एडवोकेट की तहरीर पर 10 जनवरी 1987 को चंदपा के तत्कालीन एसओ आरके त्यागी सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज की गई चार्जशीट
उसके बाद जांच सीबीसीआईडी ने शुरू की। सीबीसीआईडी ने यह पाया कि हीरालाल को एटा कोर्ट परिसर से उठाया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। यही नहीं जांच में कुछ और पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए। इस पूरे मामले में सीबीसीआईडी ने 1996 में 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट स्थानीय कोर्ट में दाखिल की। इनमें सात दरोगा अनिल कुमार शर्मा, केएम उपाध्याय, केवल सिंह, धर्मसिंह यादव, आरके त्यागी, हरिशचंद्र विद्यार्थी बीडी दुबे के अलावा बहादुर खां, रूपराम, हरीशचंद, राजवीर सिंह, रामवीर सिंह, श्याम सिंह, धनपाल सिंह, एसपी शर्मा पुलिसकर्मी शामिल थे। इस मामले में उक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैरजमानती वांरट जारी हो गए।
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एक सिपाही गिरफ्तार, अन्य जमानत पर रिहा
पिछले दिनों इस मामले में एक याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने भी गृह सचिव से लेकर एसपी और चंदपा थानाध्यक्ष को तलब किया। हाईकोर्ट की सख्ती का यह असर हुआ कि वर्ष 2015 में इस मामले में चंदपा पुलिस ने एक आरोपी सिपाही हरिश्चंद को गिरफ्तार कर लिया। कुछ अन्य पुलिसकर्मियों ने पेश होकर कोर्ट से जमानत करा ली थी। एक दरोगा केवल सिंह की मृत्यु हो चुकी है। इस बहुचर्चित मामले में मंगलवार को फिर इन पुलिसकर्मियों की पेशी थी। इसमें से तत्कालीन एसआई आरके त्यागी, हरिश्चंद व धर्म सिंह यादव फिर गैरहाजिर रहे। इनके गैर जमानती वारंट पहले से ही जारी हैं। अन्य पुलिसकर्मियों ने हाजिरी माफी के लिए अपने प्रार्थनापत्र कोर्ट में भेज दिए थे।
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यह था मामला :
15 जनवरी 1983 को एटा कचहरी से वकील मनवीर सिंह के बिस्तर (तख्त) से कुछ पुलिसकर्मियों ने दिनदहाड़े एक ग्रामीण हीरालाल पुत्र बलवंत निवासी महमूदपुर सिकंदराराऊ को पकड़ा था। कचहरी परिसर में वकीलों ने इसका कड़ा विरोध भी किया था। पुलिस ने उसे कई दिन तक उसे सिकंदराराऊ और फिर चंदपा थाने में हिरासत में रखा था। 5 फरवरी 1983 को उसे चंदपा के गांव नगला ओझा के निकट मुठभेड़ में मार गिराया दर्शाया। पुलिस की इस कथित मुठभेड़ पर सवाल उठे। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई थी। शहर के अधिवक्ता रायवीर सिंह एडवोकेट की तहरीर पर 10 जनवरी 1987 को चंदपा के तत्कालीन एसओ आरके त्यागी सहित सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
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15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज की गई चार्जशीट
उसके बाद जांच सीबीसीआईडी ने शुरू की। सीबीसीआईडी ने यह पाया कि हीरालाल को एटा कोर्ट परिसर से उठाया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। यही नहीं जांच में कुछ और पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए। इस पूरे मामले में सीबीसीआईडी ने 1996 में 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट स्थानीय कोर्ट में दाखिल की। इनमें सात दरोगा अनिल कुमार शर्मा, केएम उपाध्याय, केवल सिंह, धर्मसिंह यादव, आरके त्यागी, हरिशचंद्र विद्यार्थी बीडी दुबे के अलावा बहादुर खां, रूपराम, हरीशचंद, राजवीर सिंह, रामवीर सिंह, श्याम सिंह, धनपाल सिंह, एसपी शर्मा पुलिसकर्मी शामिल थे। इस मामले में उक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैरजमानती वांरट जारी हो गए।
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एक सिपाही गिरफ्तार, अन्य जमानत पर रिहा
पिछले दिनों इस मामले में एक याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने भी गृह सचिव से लेकर एसपी और चंदपा थानाध्यक्ष को तलब किया। हाईकोर्ट की सख्ती का यह असर हुआ कि वर्ष 2015 में इस मामले में चंदपा पुलिस ने एक आरोपी सिपाही हरिश्चंद को गिरफ्तार कर लिया। कुछ अन्य पुलिसकर्मियों ने पेश होकर कोर्ट से जमानत करा ली थी। एक दरोगा केवल सिंह की मृत्यु हो चुकी है। इस बहुचर्चित मामले में मंगलवार को फिर इन पुलिसकर्मियों की पेशी थी। इसमें से तत्कालीन एसआई आरके त्यागी, हरिश्चंद व धर्म सिंह यादव फिर गैरहाजिर रहे। इनके गैर जमानती वारंट पहले से ही जारी हैं। अन्य पुलिसकर्मियों ने हाजिरी माफी के लिए अपने प्रार्थनापत्र कोर्ट में भेज दिए थे।