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सिकंदराराऊ में ठगी से आहत किसान ने फांसी लगाई
अमर उजाला ब्यूरो, सिकंदराराऊ, हाथरस।
Updated Thu, 21 Dec 2017 11:21 PM IST
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(हाथरस)। जालसाज कंपनी के हाथों दो लाख रुपये ठगे जाने के बाद कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला मसंदपोरा निवासी एक किसान ने बुधवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मोबाइल आफर के जरिये जालसाजों ने बड़ा कर्ज देने का झांसा दे इस किसान से कई बार बैंक खाते से रुपये ट्रांसफर कराए थे। बाद में कंपनी के फोन स्विच ऑफ हो गए। परिजनों ने जब मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली तथा बैंक से ट्रांसफर की गई रकम की पर्ची देखी, तब पूरा माजरा मालूम हुआ। इस संबंध में परिजनों की ओर से कोतवाली में तहरीर दी गई है।
गांव नगला मसंदपोरा निवासी छविराम (32) पुत्र चरनसिंह सीधा साधा अनपढ़ किसान था। उसके मोबाइल पर कर्ज देने के लिए आफर आते रहते थे। पहले तो उसने उन पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में वह इनकी बातों में फंस गया। उसने कर्ज के लिए फोन पर रुचि दिखाई। इस पर उसको बताया गया कि सामान्य दस्तावेजों के आधार पर आसान शर्तों पर बड़ा कर्ज मिल जाएगा।
एहतियातन जब छविराम ने इस कंपनी से पहले लोन पाने वालों की जानकारी मांगी तो उसे कुछ मोबाइल नंबर दे दिए गए। जब उसने उन नंबरों पर बात की तो उसे विश्वास दिला दिया गया कि इस कंपनी का कामकाज ठीक हैै। वे सभी मोबाइल नंबर ठग कंपनी के लोगों के ही थे। इसके बाद छविराम से ठगी का सिलसिला प्रारंभ हुआ। कभी किसी कागज तो कभी अन्य कारण बता कर उससे कंपनी के खाते में पैसा ट्रांसफर कराया जाता रहा। छविराम का बैंक आफ इंडिया में खाता है।
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पहले तो छविराम अपने पास से पैसा ट्रांसफर करता रहा। बाद में उसने कर्ज लेकर पैसा ट्र्रांसफर किया। उससे करन सिंह, लक्ष्मण सिंह व जितेंद्र सिंह के खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। जब रकम दो लाख रुपये हो गई तो उसे चिंता हुई। उसने जल्दी लोन का पैसा अपने खाते में भेजने की कहा तो कंपनी के फोन नंबर ही मिलने बंद हो गए। इससे वह परेशान हो गया। आखिरकार जब उसे ठगे जाने का एहसास हुआ तो उसने तनाव में आकर छत के कुंडे में फंदा डाल कर फांसी लगा ली। मृतक अपने पीछे पत्नी व एक बेटा छोड़ गया है। वह घर में अकेला कमाने वाला था। परिजनों ने बगैर पोस्टमार्टम कराए ही छविराम के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। कोतवाली इंस्पेक्टर मनोज शर्मा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है, उसके बाद ही अग्रिम कार्यवाही होगी।
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गांव नगला मसंदपोरा निवासी छविराम (32) पुत्र चरनसिंह सीधा साधा अनपढ़ किसान था। उसके मोबाइल पर कर्ज देने के लिए आफर आते रहते थे। पहले तो उसने उन पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में वह इनकी बातों में फंस गया। उसने कर्ज के लिए फोन पर रुचि दिखाई। इस पर उसको बताया गया कि सामान्य दस्तावेजों के आधार पर आसान शर्तों पर बड़ा कर्ज मिल जाएगा।
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एहतियातन जब छविराम ने इस कंपनी से पहले लोन पाने वालों की जानकारी मांगी तो उसे कुछ मोबाइल नंबर दे दिए गए। जब उसने उन नंबरों पर बात की तो उसे विश्वास दिला दिया गया कि इस कंपनी का कामकाज ठीक हैै। वे सभी मोबाइल नंबर ठग कंपनी के लोगों के ही थे। इसके बाद छविराम से ठगी का सिलसिला प्रारंभ हुआ। कभी किसी कागज तो कभी अन्य कारण बता कर उससे कंपनी के खाते में पैसा ट्रांसफर कराया जाता रहा। छविराम का बैंक आफ इंडिया में खाता है।
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पहले तो छविराम अपने पास से पैसा ट्रांसफर करता रहा। बाद में उसने कर्ज लेकर पैसा ट्र्रांसफर किया। उससे करन सिंह, लक्ष्मण सिंह व जितेंद्र सिंह के खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। जब रकम दो लाख रुपये हो गई तो उसे चिंता हुई। उसने जल्दी लोन का पैसा अपने खाते में भेजने की कहा तो कंपनी के फोन नंबर ही मिलने बंद हो गए। इससे वह परेशान हो गया। आखिरकार जब उसे ठगे जाने का एहसास हुआ तो उसने तनाव में आकर छत के कुंडे में फंदा डाल कर फांसी लगा ली। मृतक अपने पीछे पत्नी व एक बेटा छोड़ गया है। वह घर में अकेला कमाने वाला था। परिजनों ने बगैर पोस्टमार्टम कराए ही छविराम के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। कोतवाली इंस्पेक्टर मनोज शर्मा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है, उसके बाद ही अग्रिम कार्यवाही होगी।