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दुष्कर्म के मामले में आठ वर्ष की कैद
क्राइम न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:35 AM IST
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय ने किशोरी को बहला-फुसला कर ले जाने एवं उसके साथ दुष्कर्म करने के एक आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त को आठ वर्ष के कारावास एवं पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त कारावास भी भोगना होगा।
कोतवाली हाथरस गेट पुलिस को दी गई तहरीर में किशोरी की नानी ने आरोप लगाया था कि उसकी धेवती को 20 मई 2013 को रंजीत उर्फ करुआ बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने पीड़िता को बरामद किया और उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया। इसमें पीड़िता के साथ दुष्कर्म होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से छह जनवरी,2014 को मामला सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया गया।
आरोपी ने न्यायालय में अपने जुर्म का इकबाल करने से इंकार किया।
उसने न्यायालय में सत्र परीक्षण कराए जाने की मांग की। न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। इस दौरान वादी की ओर से एडीजीसी एसएस चौहान ने साक्ष्य प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 363 में सात वर्ष की कैद व एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 व 376 आईपीसी में आठ-आठ वर्ष की कैद एवं दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। सभी सजाओं के एक साथ चलने एवं अर्थदंड अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भोगने का निर्णय भी न्यायालय ने दिया है।
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कोतवाली हाथरस गेट पुलिस को दी गई तहरीर में किशोरी की नानी ने आरोप लगाया था कि उसकी धेवती को 20 मई 2013 को रंजीत उर्फ करुआ बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने पीड़िता को बरामद किया और उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया। इसमें पीड़िता के साथ दुष्कर्म होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से छह जनवरी,2014 को मामला सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया गया।
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आरोपी ने न्यायालय में अपने जुर्म का इकबाल करने से इंकार किया।
उसने न्यायालय में सत्र परीक्षण कराए जाने की मांग की। न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। इस दौरान वादी की ओर से एडीजीसी एसएस चौहान ने साक्ष्य प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 363 में सात वर्ष की कैद व एक हजार रुपये अर्थदंड, धारा 366 व 376 आईपीसी में आठ-आठ वर्ष की कैद एवं दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। सभी सजाओं के एक साथ चलने एवं अर्थदंड अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भोगने का निर्णय भी न्यायालय ने दिया है।
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