पूर्व मंत्री रामवीर व बेटे को आए धमकी भरे पत्र
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इनमें उनको व उनके बेटे चिराग को धमकी दी गई है कि यदि उन्होंने पुष्पेंद्र हत्याकांड में सुलह नहीं की तो उन्हें और उनके परिवार को जिंदा नहीं छोड़ेंगे। इस मामले में चिराग व उनके सचिव रानू पंडित ने थाना हाथरस गेट में अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज कराई है। उपाध्याय परिवार ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा देने की मांग की है। वहीं राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पूर्व सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल ने इसे नाटक बताते हुए अपने खिलाफ साजिश करार दिया है।
विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रचार के दौरान आठ फरवरी को रामवीर के समर्थक सादाबाद निवासी पुष्पेंद्र की गोली लगने से मौत भी हो गई थी। इस मामले में पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल, उनके पुत्र रजत अग्रवाल सहित कई लोग जेल गए थे। अब यह मामला फिर से गरमा गया है।
इसे लेकर रामवीर उपाध्याय के लेबर कॉलोनी स्थित निवास पर स्पीड पोस्ट से धमकी भरे दो पत्र आए हैं। दोनों पत्र टाइप किए गए हैं। रामवीर को धमकी भरा पत्र राजेंद्र उर्फ राजा निवासी सहपऊ हाथरस के नाम से भेजा गया है। इस पर उसके हस्ताक्षर नहीं है। पत्र में कहा गया है कि रामवीर, तुमने हमारे नेता के साथ अच्छा नहीं किया।
चाहे कितनी भी सुरक्षा कर लो चिराग को गाड़ी सहित बम से उड़ा दिया जाएगा। वोट मांगने के दौरान तुम्हारी पत्नी सीमा को गोलियों से भून दिया जाएगा। तुम्हें और तुम्हारे परिवार को जिंदा नहीं छोड़ेंगे।
तुम्हें आखिरी चेतावनी दे रहे है कि पुष्पेंद्र वाले कांड में फैसला कर लो नहीं तो पछताओगे। चिराग को धमकी भरा पत्र सुनील कुमार निवासी जलेसर रोड सहपऊ के नाम से आया है। इसमें कहा गया है कि तुझे मारने के चक्कर में पुष्पेंद्र मर गया। इसमें हमारा नेता और उसका परिवार जेल में रहा है। अपने बाप से कहकर पुष्पेंद्र की हत्या का मुकदमा वापस कर ले या फैसला कर ले। नहीं तो तू कितनी भी सुरक्षा कर ले, हम तुझे मार देंगे। हमारे पास एके 47 है। इस पत्र पर सुनील कुमार नाम लिखा है लेकिन हस्ताक्षर नहीं हैं।
विरोधी वोटों से तो मुझे हरा नहीं पाते तो ऐसे में खिसिया कर इस तरह की हरकतें कराते हैं। अब मुझे, मेरे बेटे और परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई है। पुलिस इस मामले की जांच करे और जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ कार्रवाई करे।
रामवीर उपाध्याय, विधायक सादाबाद
अभियोग दर्ज कर लिया गया है। दोनों पत्रों पर जो नाम लिखे हैं, उनके बारे में खोजबीन कराई जा रही है कि वास्तव में वे लोग वहां रहते हैं या नहीं। यह पत्र अलीगढ़ के डाकघर से आए हैं।
- सिद्धार्थ वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक
यह पत्र ड्रामे के सिवाय कुछ नहीं हैं। पहले मुझे व मेरे परिवार को केस में फंसाकर जेल भिजवाया गया। अब मेरी व मेरे दोनों बेटों की हत्या करने की साजिश रची जा रही है। इन पत्रों के मामले की सीबीआई जांच कराई जाए तो हकीकत सामने आ जाएगी।
देवेंद्र अग्रवाल, पूर्व विधायक