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अंकित हत्याकांड: सीसीटीवी कैमरे से मिले सुराग
Updated Sat, 01 Jul 2017 11:39 PM IST
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ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
कांशीराम कॉलोनी के 16 वर्षीय छात्र अंकित की हत्या के सवा महीने बाद भी कोतवाली पुलिस हत्या में शामिल दो आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। हालांकि मडराक टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरे में दोनों आरोपियों के ई-रिक्शा ले जाने की तस्वीरें कैद हो गई थीं।
इन तस्वीरों के बाद आरोपियों के जल्द पकड़ में आने की संभावना थी, लेकिन पुलिस और एसओजी की सुस्ती के कारण आरोपी पकड़ से दूर बने हुए हैं।
अंकित के भाई राहुल का कहना है कि हाल ही में कांशीराम कॉलोनी पहुंचे प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी ने परिवार को आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया था। साथ मौजूद सदर विधायक हरिशंकर माहौर ने भी एक महीने का राशन दिलवाने की बात कही थी लेकिन अभी तक यह मदद अंकित के परिजनों तक नहीं पहुंची है।
साफ है कि मौके पर नेताओं ने वाहवाही लूटने के लिए यह बातें कहीं थीं। राहुल का कहना है कि उनके परिवार को मदद का भरोसा बहुत लोगों ने दिलाया लेकिन एक समिति के सदस्यों ने ई-रिक्शा खरीदने के लिए उनके परिवार को 30 हजार रुपये की मदद की है।
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अंकित 23 मई को अपने घर से ई-रिक्शा लेकर गया था और इसके बाद से उसका पता नहीं चला था। 27 मई को उसका शव काफी खराब हालत में पोस्टमार्टम हाउस के पीछे मिला था। पुलिस ने इस मामले में अंकित के पड़ोसी मां-बेटा को जेल भेज दिया था।
हत्या में शामिल दो लुटेरों की तलाश पुलिस को है। इस मामले में सदर कोतवाल सूर्यकांत द्विवेदी का कहना है कि मामले की तफ्तीश जारी है। सीसीटीवी कैमरे में मिली तस्वीरें साफ नहीं हैं। आरोपियों की पहचान होने के बाद उन्हें दबोचा जाएगा।
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कांशीराम कॉलोनी के 16 वर्षीय छात्र अंकित की हत्या के सवा महीने बाद भी कोतवाली पुलिस हत्या में शामिल दो आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। हालांकि मडराक टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरे में दोनों आरोपियों के ई-रिक्शा ले जाने की तस्वीरें कैद हो गई थीं।
इन तस्वीरों के बाद आरोपियों के जल्द पकड़ में आने की संभावना थी, लेकिन पुलिस और एसओजी की सुस्ती के कारण आरोपी पकड़ से दूर बने हुए हैं।
अंकित के भाई राहुल का कहना है कि हाल ही में कांशीराम कॉलोनी पहुंचे प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी ने परिवार को आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया था। साथ मौजूद सदर विधायक हरिशंकर माहौर ने भी एक महीने का राशन दिलवाने की बात कही थी लेकिन अभी तक यह मदद अंकित के परिजनों तक नहीं पहुंची है।
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साफ है कि मौके पर नेताओं ने वाहवाही लूटने के लिए यह बातें कहीं थीं। राहुल का कहना है कि उनके परिवार को मदद का भरोसा बहुत लोगों ने दिलाया लेकिन एक समिति के सदस्यों ने ई-रिक्शा खरीदने के लिए उनके परिवार को 30 हजार रुपये की मदद की है।
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अंकित 23 मई को अपने घर से ई-रिक्शा लेकर गया था और इसके बाद से उसका पता नहीं चला था। 27 मई को उसका शव काफी खराब हालत में पोस्टमार्टम हाउस के पीछे मिला था। पुलिस ने इस मामले में अंकित के पड़ोसी मां-बेटा को जेल भेज दिया था।
हत्या में शामिल दो लुटेरों की तलाश पुलिस को है। इस मामले में सदर कोतवाल सूर्यकांत द्विवेदी का कहना है कि मामले की तफ्तीश जारी है। सीसीटीवी कैमरे में मिली तस्वीरें साफ नहीं हैं। आरोपियों की पहचान होने के बाद उन्हें दबोचा जाएगा।