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हाथरस: हसायन के 24 साल पुराने मामले में आया फैसला, आरोपी बरी, चार की हुई थी मौत

Thu, 10 Sep 2026 06:02 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 10 Sep 2026 06:02 PM IST
सार

अदालत ने पाया कि घटना के समय, प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई देरी और पुलिस द्वारा ट्रैक्टर का तकनीकी मुआयना न कराए जाने जैसे कई बिंदुओं पर अभियोजन पक्ष अपना पक्ष स्पष्ट नहीं कर सका।

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Accused acquitted in 24-year-old accident
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

हाथरस के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने वर्ष 2002 के एक सड़क हादसे के मामले में संदेह का लाभ देते हुए आरोपी निरोत्तम सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अभियुक्त पर लापरवाही और तेज गति से ट्रैक्टर-ट्राली चलाकर दुर्घटना करने का आरोप था, जिसमें चार लोगों की जान चली गई थी।

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मामला छह जुलाई 2002 का है। पीड़ित पक्ष अपने परिवार के सदस्यों के साथ कछला घाट से गंगा स्नान कर ट्रैक्टर-ट्राॅली से लौट रहा था। सिकंदराराऊ-जलेसर मार्ग पर बाड़ी बंबा के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में ईश्वरी देवी, गायत्री देवी, जितेंद्र और प्रियंका की बालू के नीचे दबने और गंभीर चोटें आने से मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। पीड़ित पक्ष का आरोप था कि मना करने के बावजूद आरोपी चालक ने ट्राॅली में बालू भरी और तेजी व लापरवाही से वाहन चलाया। मामले में पुलिस ने धारा 279, 338, और 304ए (भारतीय दंड संहिता) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
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गवाह मुकरे
मामले की सुनवाई और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने अभियुक्त निरोत्तम सिंह को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि घटना के दौरान मौके पर मौजूद मुख्य साक्षी अदालत में अपने बयानों से मुकर गए। उन्होंने अदालत को बताया कि ट्रैक्टर उबड़-खाबड़ सड़क की वजह से पलटा था और चालक की कोई लापरवाही नहीं थी।
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केवल तेज रफ्तार लापरवाही का सबूत नहीं
न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय की एक नजीर का हवाला देते हुए कहा कि केवल वाहन का तेज गति में होना अपने आप में लापरवाही साबित नहीं करता। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि घटना वास्तव में किस प्रकार चालक की लापरवाही से हुई।


विरोधाभास और पुलिस की कमियां
अदालत ने पाया कि घटना के समय, प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई देरी और पुलिस द्वारा ट्रैक्टर का तकनीकी मुआयना न कराए जाने जैसे कई बिंदुओं पर अभियोजन पक्ष अपना पक्ष स्पष्ट नहीं कर सका।

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