{"_id":"64258bc8d8a9da0f65013534","slug":"40-feet-high-effigy-of-ravana-burnt-in-sahapau-2023-03-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: 175 साल पहले फैली थी बीमारी, सैंकड़ों लोग आए थे चपेट में, तब शुरू हुआ चैत्र में रावण दहन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: 175 साल पहले फैली थी बीमारी, सैंकड़ों लोग आए थे चपेट में, तब शुरू हुआ चैत्र में रावण दहन
Thu, 30 Mar 2023 06:47 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Thu, 30 Mar 2023 06:47 PM IST
सार
सहपऊ में 31 मार्च की शाम को रावण दहन मेला में इस बार 40 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। पुतले का निर्माण मुरसान के कारीगरों ने किया है।
विज्ञापन
हनुमान टीला मैदान में आयोजित कस्बा के ऐतिहासिक रावण दहन मेले के लिए चालीस फुट के रावण के पुतले को तै
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चैत्र मास में रावण दहन की परंपरा अपना एक इतिहास रखती है। 175 साल पहले एक बीमारी फैली थी, उसमें सैंकड़ों लोग चपेट में आए थे। उस समस्या का निराकरण चैत्र मास की नौवीं और दसवीं के दिन रावण दहन से निकला। तभी से सहपऊ कस्बे में रावण दहन की परंपरा शुरु हुई।
विज्ञापन
सहपऊ में 31 मार्च की शाम को रावण दहन मेला में इस बार 40 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। पुतले का निर्माण मुरसान के कारीगरों ने किया है। कारीगर शफीउद्दीन खान, शमीउद्दीन खान ने बताया कि पुतला निर्माण करने का काम उनके पुरखों के समय हो रहा है। वह एवं उनके परिवार के अन्य सदस्य रावण, मेघनाथ आदि के पुतले बनाते हैं। कस्बा में चैत्र मास में रामलीला होने के साथ के रावण दहन मेला आयोजित होने के पीछे एक परंपरा है।
विज्ञापन
बुजुर्ग बताते हैं कि कस्बा में लगभग 175 साल पहले एक बीमारी फैली थी। जिसकी चपेट में सैकड़ों लोग आए थे। ज्योतिषियों से इसका निराकरण पूछा। उन्होंने चैत्र मास में रामलीला के आयोजन के साथ नौवीं एवं दसवीं के दिन रावण दहन मेले का आयोजन करने की सलाह दी। तब से रावण दहन मेला का आयोजन होता चला आ रहा है। शांति व्यवस्था को लेकर पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
विज्ञापन