{"_id":"5e20b2048ebc3e4ad66011af","slug":"winter-hardoi-news-hardoi-news-knp538855767","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठंड से ठिठुरी बा छात्राएं, बीएसए को कारण बताओ नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंड से ठिठुरी बा छात्राएं, बीएसए को कारण बताओ नोटिस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरदोई। जिले में शिक्षा विभाग किस कदर बच्चों की स्कूलों की सुरक्षा के प्रति सक्रिय है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बा स्कूलों के मद में धनराशि मौजूद रहने के बाद भी सर्दी में छात्राएं ठिठुरती रहीं। जिला स्तर पर भले ही आला अधिकारियों को छात्राओं की पीड़ा न दिखी हो पर शासन ने इसे गंभीर मान बीएसए को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने जिले के बीएसए हेमंत राव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पत्र में बताया कि जिले के 20 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में रीप्लेसमेंट मद में प्रत्येक विद्यालय में 75 हजार की राशि पड़ी हुई है। इतनी ठंड भी छात्राओं ने उन्हीं रजाइयों में काट दी जिसको लेकर जिला स्तर पर कोई खरीद नहीं हुई जो काफी कष्टकर है और खेद का भी विषय है। यदि विद्यालयों में कोई भी अनहोनी होती है तो इसके व्यक्तिगत जिम्मेदार स्वयं बीएसए ही होंगे। ऐसा क्यों हुआ उन्होंने तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। उन्होंने बताया कि बार बार इस ओर निदेशालय द्वारा निर्देशित किए जाने के बाद भी उनके द्वारा इस ओर कोई सार्थक कदम न उठाना सीधे तौर पर लापरवाही सिद्ध करता है।
विज्ञापन
राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने जिले के बीएसए हेमंत राव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पत्र में बताया कि जिले के 20 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में रीप्लेसमेंट मद में प्रत्येक विद्यालय में 75 हजार की राशि पड़ी हुई है। इतनी ठंड भी छात्राओं ने उन्हीं रजाइयों में काट दी जिसको लेकर जिला स्तर पर कोई खरीद नहीं हुई जो काफी कष्टकर है और खेद का भी विषय है। यदि विद्यालयों में कोई भी अनहोनी होती है तो इसके व्यक्तिगत जिम्मेदार स्वयं बीएसए ही होंगे। ऐसा क्यों हुआ उन्होंने तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। उन्होंने बताया कि बार बार इस ओर निदेशालय द्वारा निर्देशित किए जाने के बाद भी उनके द्वारा इस ओर कोई सार्थक कदम न उठाना सीधे तौर पर लापरवाही सिद्ध करता है।
विज्ञापन