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Hardoi News: व्यापारी नहीं देना चाहते अतिरिक्त कर, यूपीआई भुगतान से कन्नी काट रहे प्रतिष्ठान मालिक

Thu, 08 Oct 2026 11:43 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 11:43 PM IST
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Traders unwilling to pay additional taxes; business owners are shying away from UPI payments.
हरदोई। यूपीआई भुगतान को लेकर लागू हो रही नई व्यवस्थाओं का असर अब बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। बड़े प्रतिष्ठानों पर 2000 से अधिक राशि के यूपीआई भुगतान लेने से परहेज किया जा रहा है। इससे ग्राहकों के सामने भुगतान को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलने के बावजूद बड़े लेनदेन के लिए लोग नकदी या अन्य विकल्प तलाशने को मजबूर हैं।
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डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के दावों के बीच बाजार में यूपीआई से बड़ी रकम चुकाने वाले ग्राहकों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। खरीदारी के बाद भुगतान के समय सामने आ रही इस समस्या के चलते लोगों को नकदी या फिर दूसरे भुगतान विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्राहकों का कहना है कि मोबाइल से भुगतान की सुविधा ने खरीदारी को आसान बनाया है। जेब में नकदी रखने की जरूरत कम हुई है। अब खरीदारी के लिए यूपीआई का इस्तेमाल आम हो चुका है। ऐसे में प्रतिष्ठानों पर 2000 रुपये से अधिक का भुगतान डिजिटल माध्यम से स्वीकार करने में आनाकानी होने पर परेशानी बढ़ जाती है। कई बार ग्राहक सामान पसंद करने और खरीदारी पूरी करने के बाद भुगतान के विकल्प को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं।
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ग्राहकों से आरटीजीएस करवा रहे दुकानदार
यूपीआई से बड़े भुगतान पर अतिरिक्त कर भले ही अभी लागू नहीं हुआ है लेकिन दुकानदारों ने अभी से नकदी पर जोर देना शुरू कर दिया है। बड़े प्रतिष्ठान पर यदि कोई ग्राहक खरीदारी करने जाता है और उसको 25 से 50 रुपये या उससे अधिक भुगतान करना होता है तो कुछ पैसा नकद लेने के बाद ग्राहकों को आरटीजीएस करने के लिए कहा जाता है। ग्राहकों को भी 50 रुपये तक का सामान खरीदने पर आरटीजीएस करना पड़ रहा है।
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ग्राहकों का दर्द:
जेब खाली, मोबाइल में पैसे, फिर भी बेबस
जब सरकार हर छोटी-बड़ी दुकान पर क्यूआर कोड लगवा रही है, तो फिर 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर अतिरिक्त कर क्यों लग रहा है। दुकान अब ऑनलाइन भुगतान में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसे में परेशानी तो आम जनता की ही बढ़ रही है।


ग्राहक शिव शंकर
सरकार की तरफ से लगाया कोई कर आम जनता को ही भुगतना पड़ता है। दुकानदार उस अतिरिक्त कर को किसी न किसी तरह से वसूल लेगा, परेशान आम जनता को ही होना पड़ेगा। आज किसी बड़े भुगतान के लिए नकदी लेकर जानी पड़ रही है।
अनुराग सक्सेना, ग्राहक
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