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Hardoi News: संयंत्र चलने के बावजूद इमरजेंसी में कंसंट्रेटर व सिलिंडरों के भरोसे मरीज
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फोटो-06- मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में कंसंट्रेटर से दी जा रही मरीज को ऑक्सीजन। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए ऑक्सीजन संयंत्र की सुविधा इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को नहीं मिल रही है। इमरजेंसी के ट्रायज एरिया में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए पाइप लाइन अभी तक नहीं लगाई गई है। इससे मरीजों को कंसंट्रेटर और सिलिंडरों के भरोसे ही रहना पड़ रहा है। वहीं, सिलिंडरों को रिफिल कराने में प्रतिदिन हजारों रुपये का बजट फिजूल में खर्च किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी गेट के पास स्थापित ऑक्सीजन प्लांट की 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन करने की क्षमता है। इस ऑक्सीजन प्लांट से इमरजेंसी, पीकू वार्ड और आईपीडी वार्ड में सप्लाई की जाती है। बता दें कि प्लांट को चालू किया जा चुका है। इससे उम्मीद थी कि मरीजों को अब सीधे बेड पर पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन मिलने लगेगी। साथ ही कंसंट्रेटर और सिलिंडरों पर मरीजों की निर्भरता समाप्त हो जाएंगी। हालांकि, आईसीयू, पीकू वार्ड और ग्रीन, रेड और येलो जोन में पाइप लाइन से मरीजों को ऑक्सीजन मिल रही है लेकिन सबसे गंभीर मरीजों के लिए बना इमरजेंसी का ट्रायज एरिया में आज भी मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए कंसंट्रेटर और सिलिंडर के भरोसे ही रहना पड़ रहा है और लाखों रुपये खर्च बनाए गए ऑक्सीजन प्लांट सिर्फ शोपीस बना हुआ है।
केस-1- सांडी के श्रीमऊ के ऐड़ाखेड़ा निवासी तोतालाल को साँस लेने में दिक्कत हो रही थी। परिजन उन्हें इमरजेंसी लेकर आए। इमरजेंसी में उन्हें कंसंट्रेटर से ही ऑक्सीजन दी गई।
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केस-2- कासिमपुर के भटौली निवासी रामू को शुक्रवार को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उन्हें साँस लेने में काफी परेशानी हो रही है। उन्हें शुक्रवार शाम से ही कंसंट्रेटर की मदद से ही ऑक्सीजन दी जा रही है।
मरीजों पर हर रोज खाली हो रहे चार सिलिंडर
सिलिंडर भरवाने की आड़ में जिम्मेदारों द्वारा कोई खेल तो नहीं खेला जा रहा। एक ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने में 400 से 450 रुपये का खर्च आता है। निजी स्तर पर हर सप्ताह लगभग 40 से 50 सिलिंडर भरे जाते हैं। यह अंदेशा जताया जा रहा है कि निजी लाभ और कमीशन के चलते ऑक्सीजन प्लांटों के संचालन पर जोर नहीं दिया जा रहा है। हर रोज चार से पांच सिलिंडर मरीजों को ऑक्सीजन दिए जाने में खर्च हो रहे हैं। ऐसे में हर रोज सिलिंडरों को भरवाने के लिए 1500 से 2000 रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
वैसे तो ट्रायज एरिया में गंभीर मरीज को कुछ ही देर के लिए ही भर्ती किया जाता है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। अगर इन वार्डों में पाइप से सप्लाई नहीं आ रही है तो जानकारी करके सुधरवा दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य
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मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी गेट के पास स्थापित ऑक्सीजन प्लांट की 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन करने की क्षमता है। इस ऑक्सीजन प्लांट से इमरजेंसी, पीकू वार्ड और आईपीडी वार्ड में सप्लाई की जाती है। बता दें कि प्लांट को चालू किया जा चुका है। इससे उम्मीद थी कि मरीजों को अब सीधे बेड पर पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन मिलने लगेगी। साथ ही कंसंट्रेटर और सिलिंडरों पर मरीजों की निर्भरता समाप्त हो जाएंगी। हालांकि, आईसीयू, पीकू वार्ड और ग्रीन, रेड और येलो जोन में पाइप लाइन से मरीजों को ऑक्सीजन मिल रही है लेकिन सबसे गंभीर मरीजों के लिए बना इमरजेंसी का ट्रायज एरिया में आज भी मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए कंसंट्रेटर और सिलिंडर के भरोसे ही रहना पड़ रहा है और लाखों रुपये खर्च बनाए गए ऑक्सीजन प्लांट सिर्फ शोपीस बना हुआ है।
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केस-1- सांडी के श्रीमऊ के ऐड़ाखेड़ा निवासी तोतालाल को साँस लेने में दिक्कत हो रही थी। परिजन उन्हें इमरजेंसी लेकर आए। इमरजेंसी में उन्हें कंसंट्रेटर से ही ऑक्सीजन दी गई।
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केस-2- कासिमपुर के भटौली निवासी रामू को शुक्रवार को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उन्हें साँस लेने में काफी परेशानी हो रही है। उन्हें शुक्रवार शाम से ही कंसंट्रेटर की मदद से ही ऑक्सीजन दी जा रही है।
मरीजों पर हर रोज खाली हो रहे चार सिलिंडर
सिलिंडर भरवाने की आड़ में जिम्मेदारों द्वारा कोई खेल तो नहीं खेला जा रहा। एक ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने में 400 से 450 रुपये का खर्च आता है। निजी स्तर पर हर सप्ताह लगभग 40 से 50 सिलिंडर भरे जाते हैं। यह अंदेशा जताया जा रहा है कि निजी लाभ और कमीशन के चलते ऑक्सीजन प्लांटों के संचालन पर जोर नहीं दिया जा रहा है। हर रोज चार से पांच सिलिंडर मरीजों को ऑक्सीजन दिए जाने में खर्च हो रहे हैं। ऐसे में हर रोज सिलिंडरों को भरवाने के लिए 1500 से 2000 रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
वैसे तो ट्रायज एरिया में गंभीर मरीज को कुछ ही देर के लिए ही भर्ती किया जाता है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। अगर इन वार्डों में पाइप से सप्लाई नहीं आ रही है तो जानकारी करके सुधरवा दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य

फोटो-06- मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में कंसंट्रेटर से दी जा रही मरीज को ऑक्सीजन। संवाद