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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोगियों के लिए बनेगा अलग वार्ड
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फोटो-19- मेडिकल कॉलेज का टीबी वार्ड बनाने को चिह्नित स्थान। संवाद
हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में अब मनोरोगियों का भी उपचार हो सकेगा। मनोरोगियों के उपचार के लिए अभी कानपुर व लखनऊ जाना पड़ रहा है। मनोरोग विंग शुरू होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। वार्ड के लिए स्थान चिह्नित हाे गया है। इसके पास में ही डीआर टीबी वार्ड को भी शिफ्ट किए जाने पर विचार हो रहा है। वार्डाें को संचालित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिले में मनोचिकित्सक की नियुक्ति हो चुकी है। हर रोज 60 से 70 मानसिक रोगियों को विभागाध्यक्ष डॉ. कुंवर अखिलेश और सह आचार्य डॉ. ऋतु खरे परामर्श दे रही हैं। मानसिक रोगियों की ओपीडी हो रही है लेकिन भर्ती कर इलाज नहीं हो पा रहा है। इनके उपचार के लिए पुनर्वास सेंटर की आवश्यकता होती है। बेहतर उपचार के लिए परिजन उन्हें हैलट या फिर लखनऊ ले जाते हैं। आने वाले दिनों अब मनोरोगियों का उपचार जिले में हो सकेगा। मानसिक रोग वार्ड में रोगी और नशे के आदी मरीजों को भर्ती किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के सामने बंद पड़े पुराने बाल रोग विभाग और खाली हो चुके नेत्र चिकित्सालय में वार्ड बनाया जाएगा। इसमें मनोरोग विंग के साथ ही गंभीर टीबी से पीड़ित मरीजों को भर्ती किया जाएगा।
बता दें कि मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी यानी कि एमडीआर टीबी से पीड़ित मरीजों के लिए वार्ड जिला क्षय केंद्र के पास बना था लेकिन निर्माण कार्य के चलते बंद हो गया है। प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने बताया कि दोनों वार्ड सामान्य मरीजों से अलग होने चाहिए। चूंकि, वह वार्ड खाली पड़े हैं ऐसे यह दोनों वार्ड वहां संचालित कर दिए जाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भवन की मरम्मत कराकर वार्ड संचालित कराए जाएंगे।
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हड्डी वार्ड शिफ्ट होने से खाली हो गए कक्ष
नेत्र चिकित्सालय के कक्ष में हड्डी रोग से संबंधित मरीजों को भर्ती किया जा रहा था अब मरीजों को नवीन आईपीडी भवन में शिफ्ट किया जा चुका है। ऐसे में 10-10 बेडों के दो कक्ष अब खाली हो चुके हैं और बाल रोग विभाग का भवन पहले से ही खाली है। ऐसे में प्रबंधन ने इन स्थानों पर दोनों वार्ड संचालित करने की रुपरेखा तैयार की है। इसको लेकर प्रस्ताव भी भेज दिया गया है।
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मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिले में मनोचिकित्सक की नियुक्ति हो चुकी है। हर रोज 60 से 70 मानसिक रोगियों को विभागाध्यक्ष डॉ. कुंवर अखिलेश और सह आचार्य डॉ. ऋतु खरे परामर्श दे रही हैं। मानसिक रोगियों की ओपीडी हो रही है लेकिन भर्ती कर इलाज नहीं हो पा रहा है। इनके उपचार के लिए पुनर्वास सेंटर की आवश्यकता होती है। बेहतर उपचार के लिए परिजन उन्हें हैलट या फिर लखनऊ ले जाते हैं। आने वाले दिनों अब मनोरोगियों का उपचार जिले में हो सकेगा। मानसिक रोग वार्ड में रोगी और नशे के आदी मरीजों को भर्ती किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के सामने बंद पड़े पुराने बाल रोग विभाग और खाली हो चुके नेत्र चिकित्सालय में वार्ड बनाया जाएगा। इसमें मनोरोग विंग के साथ ही गंभीर टीबी से पीड़ित मरीजों को भर्ती किया जाएगा।
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बता दें कि मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी यानी कि एमडीआर टीबी से पीड़ित मरीजों के लिए वार्ड जिला क्षय केंद्र के पास बना था लेकिन निर्माण कार्य के चलते बंद हो गया है। प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने बताया कि दोनों वार्ड सामान्य मरीजों से अलग होने चाहिए। चूंकि, वह वार्ड खाली पड़े हैं ऐसे यह दोनों वार्ड वहां संचालित कर दिए जाएंगे। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भवन की मरम्मत कराकर वार्ड संचालित कराए जाएंगे।
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हड्डी वार्ड शिफ्ट होने से खाली हो गए कक्ष
नेत्र चिकित्सालय के कक्ष में हड्डी रोग से संबंधित मरीजों को भर्ती किया जा रहा था अब मरीजों को नवीन आईपीडी भवन में शिफ्ट किया जा चुका है। ऐसे में 10-10 बेडों के दो कक्ष अब खाली हो चुके हैं और बाल रोग विभाग का भवन पहले से ही खाली है। ऐसे में प्रबंधन ने इन स्थानों पर दोनों वार्ड संचालित करने की रुपरेखा तैयार की है। इसको लेकर प्रस्ताव भी भेज दिया गया है।