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18 साल बाद घर लौटे अतरौली नवासी महेश, बंट रही मठाइयां
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो अतरौली (अलीगढ़)।
18 साल पहले जिस बेटे के लापता होने के बाद परिजनों ने मान लिया था कि उसकी मौत हो गई वही जवान होकर परिजनों के सामने पहुंचा तो माता-पिता भी पहचान न सके। बचपन की बातें सुनने ही परिवार वालों को यकीन हो गया कि यही उनका महेश है। माता-पिता व बहन खुशी के मारे रो पड़े। गांव खेड़िया बहादुरगढ़ी का बच्चा-बच्चा यह खबर सुनकर महेश के दरवाजे पहुुंच गया। सभी खुश थे। परिवार मिठाई बांट रहा था। 18 साल वह कहां और कैसे रहे यह जानने को सभी उत्सुक बने हुए हैं।
गांव खेड़िया बहादुरगढ़ी निवासी किसान श्योराज सिंह के बेटे संजीव कुमार व महेश तथा एक बेटी विमलेश हैं। संजीव गुड़गांव में अपना व्यवसाय करते हैं। 18 साल पहले परिजनों ने किसी बात पर महेश को डांट दिया था तो उन्होंने रूठकर घर छोड़ दिया। उस समय महेश की उम्र महज 11 साल थी। महेश के अनुसार वह दिल्ली पहुंच गए।
दिल्ली स्टेशन पर बैठे रो रहे थे तभी उन्हें मुंबई निवासी राजेश कुमार मिले। वह अपने साथ मुंबई लिवा ले गए। राजेश कुमार ने महेश को कक्षा नौ तक पढ़ाया और मुंबई-गोवा के बीच माल ढोने वाले पानी की जहाज पर नौकरी लगवा दी थी।
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फेसबुक के जरिए भाई और फिर परिवार से मिलन
अतरौली। कुछ समय पहले महेश की अतरौली क्षेत्र के गांव भोजपुर निवासी हरेंद्र सिंह से फेसबुक पर दोस्ती हुई। दोनाें के बीच बातचीत होने लगी। एक दिन बातों के दौरान ही अतरौली क्षेत्र की डुकरिया वाली प्याऊ का जिक्र हुआ तो महेश को डुकरिया वाली प्याऊ की कुछ कुछ याद आई।
इसी तरह बातचीत में महेश को धीरे-धीरे अपने गांव और पिता का नाम याद आ गया। मां, भाई और बहन के नाम भी उसने हरेंद्र को बताए। इस पर हरेंद्र ने महेश का फोन नंबर उनके भाई संजीव को दिया। संजीव ने फोन पर महेश से बात करना शुरू कर दिया।
यह पुष्ट होने पर कि महेश उनका वही बिछड़ा हुआ भाई है उन्होंने महेश को गुड़गांव में अपने पास बुला लिया। रविवार को दोनों भाई जैसे ही घर पहुंचे तो माता-पिता के साथ ही परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। बेटे को पाकर उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।
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18 साल पहले जिस बेटे के लापता होने के बाद परिजनों ने मान लिया था कि उसकी मौत हो गई वही जवान होकर परिजनों के सामने पहुंचा तो माता-पिता भी पहचान न सके। बचपन की बातें सुनने ही परिवार वालों को यकीन हो गया कि यही उनका महेश है। माता-पिता व बहन खुशी के मारे रो पड़े। गांव खेड़िया बहादुरगढ़ी का बच्चा-बच्चा यह खबर सुनकर महेश के दरवाजे पहुुंच गया। सभी खुश थे। परिवार मिठाई बांट रहा था। 18 साल वह कहां और कैसे रहे यह जानने को सभी उत्सुक बने हुए हैं।
गांव खेड़िया बहादुरगढ़ी निवासी किसान श्योराज सिंह के बेटे संजीव कुमार व महेश तथा एक बेटी विमलेश हैं। संजीव गुड़गांव में अपना व्यवसाय करते हैं। 18 साल पहले परिजनों ने किसी बात पर महेश को डांट दिया था तो उन्होंने रूठकर घर छोड़ दिया। उस समय महेश की उम्र महज 11 साल थी। महेश के अनुसार वह दिल्ली पहुंच गए।
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दिल्ली स्टेशन पर बैठे रो रहे थे तभी उन्हें मुंबई निवासी राजेश कुमार मिले। वह अपने साथ मुंबई लिवा ले गए। राजेश कुमार ने महेश को कक्षा नौ तक पढ़ाया और मुंबई-गोवा के बीच माल ढोने वाले पानी की जहाज पर नौकरी लगवा दी थी।
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अतरौली। कुछ समय पहले महेश की अतरौली क्षेत्र के गांव भोजपुर निवासी हरेंद्र सिंह से फेसबुक पर दोस्ती हुई। दोनाें के बीच बातचीत होने लगी। एक दिन बातों के दौरान ही अतरौली क्षेत्र की डुकरिया वाली प्याऊ का जिक्र हुआ तो महेश को डुकरिया वाली प्याऊ की कुछ कुछ याद आई।
इसी तरह बातचीत में महेश को धीरे-धीरे अपने गांव और पिता का नाम याद आ गया। मां, भाई और बहन के नाम भी उसने हरेंद्र को बताए। इस पर हरेंद्र ने महेश का फोन नंबर उनके भाई संजीव को दिया। संजीव ने फोन पर महेश से बात करना शुरू कर दिया।
यह पुष्ट होने पर कि महेश उनका वही बिछड़ा हुआ भाई है उन्होंने महेश को गुड़गांव में अपने पास बुला लिया। रविवार को दोनों भाई जैसे ही घर पहुंचे तो माता-पिता के साथ ही परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। बेटे को पाकर उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।