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आज रात 12:42 बजे तक भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुहूर्त
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फोटो 23: आचार्य सनत्कुमार मिश्रा। संवाद
हरदोई। मंदिरों से लेकर घर-घर भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज मनाई जाएगी। जन्माष्टमी मनाने के लिए रात 11:17 से 12:42 बजे तक शुभ मुहूर्त है। उदयातिथि और रोहिणी नक्षत्र से इस बार जन्माष्टमी शुभ और अधिक फलदायी रहेगी।
भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की श्रद्धालुओं ने कई दिनों से तैयारी शुरू कर दी थी। आज जन्माष्टमी को खास बनाने के लिए अपने-अपने ढंग से व्यवस्थाएं जुटाई जाएंगी। आचार्य सनत्कुमार मिश्रा और शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि वैसे तो अष्टमी तिथि बृहस्पतिवार को ही लग गई है लेकिन उदयातिथि आज चार सितंबर शुक्रवार को है। सनातनी परंपरा और साकार ईश्वर पर विश्वास रखने वाले श्रद्धालु उदयातिथि को शुभ मनाते हैं।
बताया कि शुक्रवार रात 12:00 भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मानना सभी के लिए हितकर रहेगा। बताया कि जन्मोत्सव को लेकर मानसिक भ्रम न रखें। खीरे में लड्डू गोपाल को रखना भ्रम है। हर वर्ष भगवान गर्भ से नहीं निकलते हैं इसका कोई वैदिक विधान नहीं है। भगवान के स्थान को अलंकृत करें और रात्रि 12:00 बजे के समय भगवान को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत गंगाजल आदि से स्नान कराना चाहिए। वस्त्र-आभूषण आदि पहनाने के बाद चंदन का टीका, माला पहनाकर मेवा, मक्खन, मिश्री का भोग तुलसी दल डालकर लगाना चाहिए। सुख-समृद्धि की प्रार्थना और आरती करें।
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भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की श्रद्धालुओं ने कई दिनों से तैयारी शुरू कर दी थी। आज जन्माष्टमी को खास बनाने के लिए अपने-अपने ढंग से व्यवस्थाएं जुटाई जाएंगी। आचार्य सनत्कुमार मिश्रा और शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि वैसे तो अष्टमी तिथि बृहस्पतिवार को ही लग गई है लेकिन उदयातिथि आज चार सितंबर शुक्रवार को है। सनातनी परंपरा और साकार ईश्वर पर विश्वास रखने वाले श्रद्धालु उदयातिथि को शुभ मनाते हैं।
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बताया कि शुक्रवार रात 12:00 भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मानना सभी के लिए हितकर रहेगा। बताया कि जन्मोत्सव को लेकर मानसिक भ्रम न रखें। खीरे में लड्डू गोपाल को रखना भ्रम है। हर वर्ष भगवान गर्भ से नहीं निकलते हैं इसका कोई वैदिक विधान नहीं है। भगवान के स्थान को अलंकृत करें और रात्रि 12:00 बजे के समय भगवान को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत गंगाजल आदि से स्नान कराना चाहिए। वस्त्र-आभूषण आदि पहनाने के बाद चंदन का टीका, माला पहनाकर मेवा, मक्खन, मिश्री का भोग तुलसी दल डालकर लगाना चाहिए। सुख-समृद्धि की प्रार्थना और आरती करें।

फोटो 23: आचार्य सनत्कुमार मिश्रा। संवाद
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