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Hapur: चिकित्सकों को रास नहीं आ रहे हापुड़ के सरकारी अस्पताल, दो साल में सात विशेषज्ञों ने छोड़ा साथ
Wed, 05 Oct 2022 01:09 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
Published by: गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 05 Oct 2022 01:09 AM IST
सार
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर जिले में जिला अस्पताल से लेकर आठ सीएचसी और 23 पीएचसी समेत 100 से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन अस्पतालों के भवन चिकित्सकों के इंतजार में वीरान ही पड़ रहते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
सरकारी अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। एक सर्जन के सहारे सभी अस्पताल चल रहे हैं, जबकि पांच पद खाली पड़े हैं। वहीं दो साल के अंदर सात विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विभाग का साथ छोड़ दिया है। कई चिकित्सकों ने तो नियुक्ति के बाद चार्ज तक नहीं लिया, सीधे नौकरी छोड़कर निजी अस्पतालों का दामन थाम लिया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से अस्पताल जूझ रहे हैं, इस अव्यवस्था से अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं।
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स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर जिले में जिला अस्पताल से लेकर आठ सीएचसी और 23 पीएचसी समेत 100 से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन अस्पतालों के भवन चिकित्सकों के इंतजार में वीरान ही पड़ रहते हैं। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही अन्य चिकित्सकों की भारी कमी है।
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आलम यह है कि गढ़ रोड सीएचसी की ओपीडी 2000 से अधिक है, जिसके चलते यहां चिकित्सक ज्यादा समय नहीं ठहर पाते। क्योंकि मरीजों की भीड़ के चलते उन्हें बैठने तक का समय नहीं मिल पाता। यही कारण है कि सबसे ज्यादा चिकित्सकों ने इस अस्पताल में नियुक्ति के दौरान ही विभाग का साथ छोड़ा है।
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आलम यह है कि 21 लाख की आबादी वाले जिले में विभाग के पास सिर्फ एक ही सर्जन है। जबकि ऑपरेशन कराने वालों की कतारें लगी रहती हैं। मजबूरी में उन्हें प्राइवेट अस्पतालों का ही सहारा लेना पड़ रहा है। अफसर पत्राचार कर ही अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। शासन भी इस ओर गंभीर नहीं है।