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नाबालिग के हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा
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नाबालिग के हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा
हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/पॉक्सो एक्ट कोर्ट तृतीय ने छेड़छाड़ का विरोध करने पर नाबालिग की गोली मारकर हत्या करने के मामले को दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, वहीं 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई मात्र साढ़े तीन साल में ही पूरी करते हुए सोमवार को निर्णय सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो करुणा नागर ने बताया कि थाना हापुड़ गढ़मुक्तेश्वर में चार मार्च 2019 को एक व्यक्ति ने तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उसकी 14 वर्षीय पुत्री खेत में काम कर रही थी, तभी भगतराम पुत्र कल्याण उनकी पुत्री के पास आया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। जिसका उसकी पुत्री द्वारा विरोध किया गया। जिस पर भगतराम ने उसकी पुत्री की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज की और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने मामले के आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। घटना नाबालिग के साथ होने के कारण मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/पॉक्सो एक्ट कोर्ट में चली।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश कमलेश कुमार ने सोमवार को मामले में निर्णय सुनाया। उन्होंने कहा कि प्रतिवादी पक्ष ने मामले की सुनवाई के दौरान घटना में आरोपी के संलिप्त न होने से संबंधित कोई भी साक्ष्य पेश नहीं किया। वहीं, वादी पक्ष के अधिवक्ता व पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य व गवाह घटना को आरोपी द्वारा अंजाम देना पूरी तरह से साबित करते है। जिसके आधार पर आरोपी भगतराम को उक्त मामले में हत्या का दोषी करार दिया जाता है और आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। साथ ही दोषी पर 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाता है।
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न्यायालय ने नहीं दी थी जमानत
विशेष लोक अभियोजक करुणा नागर ने बताया कि न्यायालय द्वारा मामले को बेहद गंभीर माना था। जिसके चलते ही न्यायालय ने मामले की सुनवाई तेजी के साथ पूरी की। मुकदमे की पूरी सुनवाई मात्र साढ़े तीन वर्ष में पूरी की गई। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए करीब साढ़े तीन वर्ष की सुनवाई के दौरान आरोपी को जमानत तक नहीं दी थी। आरोपी घटना के बाद से ही जेल में बंद है।
एक लाख रुपये की धनराशि देने के आदेश
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मृतका के पिता को एक लाख रुपये की प्रतिकार धनराशि दे। यदि प्राधिकरण के पास उक्त धनराशि देने के लिए फंड न हो तो जिलाधिकारी एक माह के अंदर उक्त धनराशि मृतका के पिता को दे। साथ ही न्यायालय ने कहा कि अर्थदंड की पचास प्रतिशत धनराशि भी मृतका के पिता को दी जाए।
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हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/पॉक्सो एक्ट कोर्ट तृतीय ने छेड़छाड़ का विरोध करने पर नाबालिग की गोली मारकर हत्या करने के मामले को दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, वहीं 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई मात्र साढ़े तीन साल में ही पूरी करते हुए सोमवार को निर्णय सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो करुणा नागर ने बताया कि थाना हापुड़ गढ़मुक्तेश्वर में चार मार्च 2019 को एक व्यक्ति ने तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उसकी 14 वर्षीय पुत्री खेत में काम कर रही थी, तभी भगतराम पुत्र कल्याण उनकी पुत्री के पास आया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। जिसका उसकी पुत्री द्वारा विरोध किया गया। जिस पर भगतराम ने उसकी पुत्री की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज की और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने मामले के आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। घटना नाबालिग के साथ होने के कारण मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/पॉक्सो एक्ट कोर्ट में चली।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश कमलेश कुमार ने सोमवार को मामले में निर्णय सुनाया। उन्होंने कहा कि प्रतिवादी पक्ष ने मामले की सुनवाई के दौरान घटना में आरोपी के संलिप्त न होने से संबंधित कोई भी साक्ष्य पेश नहीं किया। वहीं, वादी पक्ष के अधिवक्ता व पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्य व गवाह घटना को आरोपी द्वारा अंजाम देना पूरी तरह से साबित करते है। जिसके आधार पर आरोपी भगतराम को उक्त मामले में हत्या का दोषी करार दिया जाता है और आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। साथ ही दोषी पर 17 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाता है।
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न्यायालय ने नहीं दी थी जमानत
विशेष लोक अभियोजक करुणा नागर ने बताया कि न्यायालय द्वारा मामले को बेहद गंभीर माना था। जिसके चलते ही न्यायालय ने मामले की सुनवाई तेजी के साथ पूरी की। मुकदमे की पूरी सुनवाई मात्र साढ़े तीन वर्ष में पूरी की गई। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए करीब साढ़े तीन वर्ष की सुनवाई के दौरान आरोपी को जमानत तक नहीं दी थी। आरोपी घटना के बाद से ही जेल में बंद है।
एक लाख रुपये की धनराशि देने के आदेश
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मृतका के पिता को एक लाख रुपये की प्रतिकार धनराशि दे। यदि प्राधिकरण के पास उक्त धनराशि देने के लिए फंड न हो तो जिलाधिकारी एक माह के अंदर उक्त धनराशि मृतका के पिता को दे। साथ ही न्यायालय ने कहा कि अर्थदंड की पचास प्रतिशत धनराशि भी मृतका के पिता को दी जाए।