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निराश्रित पशुओं को ट्रक में लदवाकर ग्राम सचिव चंपत
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शनिवार को गांव गिरधरपुर तुमरैल में पुलिस द्वारा पकड़े गये गोवंश । संवाद
- फोटो : HAPUR
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निराश्रित पशुओं को ट्रक में लदवाकर ग्राम सचिव चंपत
हापुड़। गिरधरपुर तुमरैल में ग्रामीणों की शिकायत पर गोवंशों को एक ट्रक में भर लिया गया। जान छूटाने के लिए ग्राम सचिव ने शिकायत करने वाले ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी करा लिए और इसके बाद चंपत हो गया। ग्रामीण देर रात तक सचिव का नंबर मिलाते रहे, लेकिन फोन नहीं उठ सका। ट्रक चालक ने भी पशुओं को गांव के बाहर ले जाकर छोड़ दिया, जो सुबह फिर से गांव पहुंच गए। इसके विरोध में ग्रामीणों ने शासन में शिकायत की बात कही है।
गांव निवासी संदीप, विजय, देवांशु, मोनिंदर ने बताया कि फसलों को निराश्रित पशु काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस संबंध में हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दी गई थी। ग्राम सचिव मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के सहयोग से एक अहाते में निराश्रित पशुओं को बंद करा लिया। जिसके बाद गौशाला ले जाने के नाम पर पशुओं को ट्रक में भी लदवा लिया।
आरोप है कि शिकायत करने वाले ग्रामीणों के हस्ताक्षर एक कागज पर करा लिए, इसके बाद चकमा देकर ग्राम सचिव चंपत हो गए। ग्रामीण उनका फोन मिलाते रहे, लेकिन फोन नहीं उठ सका। देर रात तक भी सचिव के वापस नहीं आने पर ट्रक चालक पशुओं को लेकर रवाना हो गया। गांव से करीब दो किलोमीटर दूर चलकर गोवंशों को छोड़ दिया।
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सुबह जब ग्रामीण उठे तो सभी गोवंश गांव में ही खेतों में घूमते मिले। इससे ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया। आरोप है कि शनिवार दिन में सचिव को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस मामले में ग्रामीणों ने शासन में शिकायत की बात कही है।
एसडीएम दिग्विजय सिंह का कहना है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई अमल में लाएंगे।
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हापुड़। गिरधरपुर तुमरैल में ग्रामीणों की शिकायत पर गोवंशों को एक ट्रक में भर लिया गया। जान छूटाने के लिए ग्राम सचिव ने शिकायत करने वाले ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी करा लिए और इसके बाद चंपत हो गया। ग्रामीण देर रात तक सचिव का नंबर मिलाते रहे, लेकिन फोन नहीं उठ सका। ट्रक चालक ने भी पशुओं को गांव के बाहर ले जाकर छोड़ दिया, जो सुबह फिर से गांव पहुंच गए। इसके विरोध में ग्रामीणों ने शासन में शिकायत की बात कही है।
गांव निवासी संदीप, विजय, देवांशु, मोनिंदर ने बताया कि फसलों को निराश्रित पशु काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस संबंध में हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दी गई थी। ग्राम सचिव मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के सहयोग से एक अहाते में निराश्रित पशुओं को बंद करा लिया। जिसके बाद गौशाला ले जाने के नाम पर पशुओं को ट्रक में भी लदवा लिया।
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आरोप है कि शिकायत करने वाले ग्रामीणों के हस्ताक्षर एक कागज पर करा लिए, इसके बाद चकमा देकर ग्राम सचिव चंपत हो गए। ग्रामीण उनका फोन मिलाते रहे, लेकिन फोन नहीं उठ सका। देर रात तक भी सचिव के वापस नहीं आने पर ट्रक चालक पशुओं को लेकर रवाना हो गया। गांव से करीब दो किलोमीटर दूर चलकर गोवंशों को छोड़ दिया।
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सुबह जब ग्रामीण उठे तो सभी गोवंश गांव में ही खेतों में घूमते मिले। इससे ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया। आरोप है कि शनिवार दिन में सचिव को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस मामले में ग्रामीणों ने शासन में शिकायत की बात कही है।
एसडीएम दिग्विजय सिंह का कहना है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई अमल में लाएंगे।